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भास्कर एक्सक्लूसिव:सामुदायिक भवन की नींव तक नहीं रखी, काम पूरा बताकर उठा लिए 10 लाख रुपए

उदयपुर17 दिन पहले
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गुरु गोलवलकर योजना के तहत झाड़ोल के सांचरवाड़ा में फर्जीवाड़ा - Dainik Bhaskar
गुरु गोलवलकर योजना के तहत झाड़ोल के सांचरवाड़ा में फर्जीवाड़ा

गुरु गोलवलकर जनभागीदारी विकास योजना के तहत झाड़ाेल उपखंड क्षेत्र के सांचरवाड़ा में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां सामुदायिक भवन निर्माण के नाम पर 10 लाख रुपए का भुगतान तत्कालीन सरपंच और तत्कालीन वीडीओ ने उठा लिया, जबकि यह भवन बनना तो दूर, उसके लिए नींव की एक ईंट तक नहीं रखी गई।

काम पूरा बताकर जिला परिषद काे पूर्णता और उपयाेगिता प्रमाण पत्र भी भेज दिया गया। कमेटी ने पूरे फर्जीवाड़े की जांच रिपाेर्ट जिला परिषद सीईओ काे साैंप दी है। बता दें कि कलेक्टर चेतन देवड़ा पिछले दिनों झाड़ोल के दौरे पर आए थे तो क्षेत्र के लोगों ने इसकी शिकायत की थी।

बीडीओ ने भी नहीं रोका अवैध ट्रांसफर

जांच कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक कार्यालय अध्यक्ष हाेने के नाते तत्कालीन बीडीओ रमेशचंद्र मीणा की भी जिम्मेदारी थी कि जिला परिषद काे फर्जी यूसी नहीं भेजी जाए। पहले उन्हें इसकी जांच करनी चाहिए थी। मीणा झाड़ाेल पंचायत काे गैरकानूनी रूप से चार लाख रुपए से ज्यादा का हस्तांतरण नहीं रोक पाए।

ये है मामला : 2017 में स्वीकृति, 3 माह पहले सौंपा उपयोगिता प्रमाण पत्र

सांचरवाड़ा में जैन समाज के पुराने भवन की जगह नए सामुदायिक भवन का निर्माण तय हुआ, 2017 में स्वीकृति के बाद लोगों ने 2 लाख रुपए जमा करवाए थे। यहां ईंट तक नहीं रखी, लेकिन मार्च में उपयोगिता प्रमाण पत्र दे दिया।

जांच रिपोर्ट : वीडीओ अंजना माथुर ने ही फर्जी दस्तावेज तैयार किए और रुपए ट्रांसफर किए

जिला परिषद के एसीईओ शैलेष सुराणा, एईएन संजय जैन और वरिष्ठ लेखाधिकारी पवन कुमार शर्मा की जांच कमेटी ने रिपाेर्ट में बताया है कि कार्यकारी एजेंसी झाड़ाेल पंचायत के सरपंच शंकरलाल अाैर तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी अंजना ने काम पूरा हाेने के गलत और फर्जी दस्तावेज तैयार किए।

चेकलिस्ट और फर्जी फाेटाे लगाकर उपयाेगिता प्रमाण पत्र भी बना लिए। अंजना माथुर ने इस सामुदायिक भवन काे लेकर इसी साल 26 मार्च काे पेश जवाब में स्वीकार किया था कि निर्माण करवाए बिना ही उपयाेगिता और पूर्णता प्रमाण पत्र जिला परिषद से समायाेजन करवाकर 7 लाख 99 हजार 289 रुपए पंचायत के खाते में हस्तांतरित किए थे। बचाव में अंजना ने तर्क दिया था कि न यह फंड खर्च नहीं किया गया है और न किसी ठेकेदार काे भुगतान हुआ है।

अधीनस्थ कर्मचारी बोले-सील व हमारे साइन फर्जी

तत्कालीन कनिष्ठ तकनीकी सहायक ईश्वर सिंह और तत्कालीन एईएन रमेश साेलंकी ने कमेटी काे बताया कि उपयाेगिता प्रमाण पत्र, पूर्णता प्रमाण पत्र, चेक लिस्ट, फाेटाे आदि पर उनके हस्ताक्षर और सील फर्जी हैं। अगर एफएसएल जांच में इसकी पुष्टि हाेती है ताे अंजना फर्जी हस्ताक्षर और सील के दुरुपयोग की भी दाेषी होंगी।

हालांकि रिपाेर्ट आने तक कमेटी ने ईश्वर सिंह और रमेश साेलंकी काे भी दाेषी माना है। वजह यह है कि कनिष्ठ लेखाकार राजेंद्र मीणा ने कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरती और फर्जी प्रमाण पत्र जिला परिषद काे भेजे।

आगे क्या : तत्कालीन सरपंच और रिटायर्ड वीडीओ से होगी रिकवरी

जांच रिपोर्ट के आधार पर झाड़ोल के तत्कालीन सरपंच शंकरलाल झरिया और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) अंजना माथुर से वसूली हो सकती है। माथुर रिटायर हाे चुकी हैं।

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