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स्मार्ट सिटी:घूसखोरी में गिरफ्तार एफए का डिजिटल दस्तखत ब्लॉक, आयड़ विकास सहित 7 बड़े कामों के लिए करने पड़े 110 करोड़ के री-टेंडर

उदयपुरएक महीने पहले
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उदयपुर. टेंडर प्रक्रिया अटकने से आयड़ नदी के विकास का काम और देरी से शुरू हो सकेगा।
  • आयड़ नदी विकास, चांदपाेल में पीछाेला किनारे अल्टरनेट राेड बनाने, एलिवेटेड रोड जैसे काम अटकने से 125 करोड़ की निविदाओं पर संकट

(देवेंद्र शर्मा) उदयपुर स्मार्ट सिटी कंपनी में फाइनेंशियल एडवाइजर (एफए) आबिद खान के पिछले दिनाें 2 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार हाेने से उदयपुर के ड्रीम प्रोजेक्ट आयड़ नदी विकास सहित कुम्हाराें का भट्टा एलिवेटेड राेड, चांदपाेल क्षेत्र में पीछाेला किनारे अल्टरनेट राेड बनाने जैसे अहम प्राेजेक्ट सहित करीब 125 कराेड़ के टेंडर पर संकट आ गया है। ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया में इस्तेमाल के लिए आबिद खान के नाम राज्य सरकार से डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) जारी हुआ था, वह ब्लाॅक होने से ये हालात बने हैं।

बिना डीएससी के ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में काेई भी डॉक्यूमेंट खाेला भी नहीं जा सकता। ऐसे में आबिद के समय जाे भी ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया चल रही थी, वह ठप हाे गई। जबकि टेक्निकल बिड जून में ही खुल चुकी थी। मजबूर हाेकर स्मार्ट सिटी कंपनी काे अब 110 कराेड़ के 7 प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से टेंडर लगाने पड़े हैं।

पिछली टेंडर प्रक्रिया में आयड़ नदी के विकास के लिए 13, एलिवेटेड राेड के लिए 7, पीछाेला किनारे अल्टरनेट राेड बनाने 1 और बाकी के काम के लिए 4 से 5 ठेकेदार शामिल हुए थे। अब इन कामाें की टेक्निकल बिड 14 अगस्त से 3 सितंबर के बीच खुलेगी। फिर फाइनेंशियल बिड होगी। ऐसे में ये प्राेजेक्ट और देरी से शुरू हो पाएंगे।

दाे टेंडर कमेटियां, आबिद दाेनाें में सदस्य, अब दूसरे अधिकारी काे चार्ज देकर काम चलाया, फिर भी कामों में देरी तो तय

स्मार्ट सिटी कंपनी बाेर्ड में दाे टेंडर कमेटियां हैं। पांच कराेड़ तक के काम की कमेटी के अध्यक्ष एसीईओ और उससे बड़े टेंडर की कमेटी के अध्यक्ष सीईओ हैं। दाेनाें कमेटियों में एसई, एक्सईएन और फाइनेंशियल एडवाइजर सदस्य हाेते है। ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में काेई भी डॉक्यूमेंट अपलाेड करने या टेंडर खाेलते समय इनके डिजिटल सिग्नेचर की जरूरत हाेती है। उसके बिना न ताे टेेंडर अपलाेड हाे सकते हैं, न खाेल सकते हैं। आबिद का डीएससी ब्लाॅक हाेने से अब फाइनेंशियल बिड खाेलने के लिए काेई दूसरा व्यक्ति डिजिटल सिग्नेचर कर नहीं सकता।

हाल ही एमएलएसयू के एफए सुरेश कुमार जैन काे स्मार्ट सिटी कंपनी में अतिरिक्त चार्ज दिया गया और टेंडर प्रक्रिया में अटके इन प्राेजेक्ट के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। ये सभी काम वर्क ऑर्डर जारी हाेने के बाद 6 से 18 माह में पूरे हाेंगे।

प्रभावित प्रोजेक्ट के लिए नए टेंडर लगाए हैं
^तत्कालीन एफए का डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट तकनीकी रूप से ब्लॉक हो गया है। उसे अब काेई दूसरा व्यक्ति उपयोग में नहीं ले सकता। उसके अभाव में उस समय की टेंडर प्रक्रिया पूरी भी नहीं हाे सकती। इस कारण हमने प्रभावित प्राेजेक्ट के लिए नए सिरे से टेंडर लगाए है। काेशिश रहेगी कि टेंडर खुलने के बाद बाकी की प्रक्रिया समय पर पूरी हाे जाए और प्राेजेक्ट के काम भी शुरु हाे जाए।
कमर चाैधरी, सीईओ, स्मार्ट सिटी

रीकॉल : काम और एफए की गिरफ्तारी
स्मार्ट सिटी कंपनी ने आयड़ नदी के विकास के लिए 75 कराेड़, कुम्हारों का भट्टा पर एलिवेटेड राेड के लिए 19.60 कराेड़ सहित करीब सवा कराेड़ के प्राेजेक्ट के लिए मार्च में टेंडर मांगे थे। 15 अप्रैल काे टेक्निकल बिड खाेली जानी थी, लेकिन लाॅकडाउन के कारण जून मेें खाेली गई। फाइनेंशियल बिड खाेलने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले गत 10 जुलाई काे एसीबी ने उदयपुर स्मार्ट सिटी कंपनी के एफए आबिद खान काे स्मार्ट सिटी ऑफिस के चैंबर में ही दलाल आरिफ के साथ 2 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।

खान के पास नगर निगम के एफए का अतिरिक्त चार्ज भी था और निगम मेें डाेर टू डाेर कचरा संग्रहण में ऑटाे टीपर लगाने के काम से जुड़े ठेकेदार का बिल पास करने की एवज में उसने रिश्वत ली थी।

सीएम बजट घाेषणा में शामिल आयड़ नदी का विकास भी अटका
टेंडर प्रक्रिया अटकने से सबसे बड़ा असर आयड़ नदी के विकास पर पड़ता नजर आ रहा है। सीएम गहलाेत ने पिछले बजट सत्र मेें ही आयड़ नदी के विकास के लिए 75 कराेड़ की घाेषणा की थी। फिर स्मार्ट सिटी, नगर निगम और यूआईटी का शेयर तय कर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस काम की टेक्निकल बिड सितंबर में खुलेगी और फाइनेंशियल बिड खाेल संबंधित ठेकेदार काे नवंबर या दिसंबर तक वर्क ऑर्डर दिया जा सकेगा।

काम शुरू हाेते-हाेते फिर अगले मानसून का समय आ जाएगा। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया सफल भी हुई ताे भी आयड़ नदी के विकास की योजना अगले मानसून के विदा हाेने या नदी में बहाव बंद हाेेने पर ही गति पकड़ती नजर आ सकती है। क्योंकि मानसून के समय नदी पेटे में दलदल के कारण काम करना संभव नहीं हाे पाएगा।

इस प्राेजेक्ट के तहत पुलां पुलिया से सेवाश्रम पुलिया तक पांच किलाेमीटर हिस्से में गेबियन वाॅल, वाटर चैनल, वाॅकिंग ट्रैक और नदी किनारे छाेटे छाेटे पार्क बनाकर नदी का रूप सुधारा जाएगा। 75 कराेड़ के इस प्राेजेक्ट मेें फिलहाल 35 कराेड़ स्मार्ट सिटी,35 कराेड़ यूआईटी और 5 कराेड़ नगर निगम वहन करना तय किया गया है।

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