परीक्षा से पहले पेपर बाजार में:निदेशालय ने डीईओ-संयोजक को माना दोषी, कार्रवाई के लिए सरकार को भेजा प्रस्ताव

उदयपुरएक महीने पहले
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संयोजक सुरेंद्र सिंह धाभाई। - Dainik Bhaskar
संयोजक सुरेंद्र सिंह धाभाई।

समान परीक्षा व्यवस्था के तहत पेपर वितरण में हुई गड़बड़ी के मामले में निदेशालय ने डीईओ और परीक्षा संयोजक को दोषी माना है। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। इधर, विभाग में चल रही लापरवाही, जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया के बीच अर्द्धवार्षिक परीक्षा सोमवार से शुरू हो गई। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि विभाग ने अगर पेपर को लीक माना है तो परीक्षाएं कैसे शुरू करवा दी?।

जबकि शिक्षक संगठन नए पेपर छपवाकर परीक्षाएं करवाने की मांग कर चुके हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक कानाराम ने बताया कि परीक्षा से पहले पेपर बाजार में आने के मामले में कमेटी ने जांच पूरी कर रिपोर्ट भेज दी है। डीईओ मुकेश पालीवाल और परीक्षा संयोजक व गोवर्धन विलास स्कूल के प्रिंसिपल सुरेंद्र सिंह धाभाई ने पेपर वितरण में गंभीर लापरवाही बरती। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भी भिजवा दिए गए है।

दोषियों के खिलाफ दर्ज हो एफआईआर, परीक्षा शुल्क की भी हो वसूली, कभी न मिले परीक्षा की जिम्मेदारी : विधि विशेषज्ञ

इस पूरे मामले में राजस्थान हाइकोर्ट में एडवोकेट रामप्रताप सैनी का कहना है कि अगर पेपर लीक में विभागीय अफसरों की भूमिका है, तो एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। परीक्षा में गड़बड़ी पर छात्रों पर सख्त कार्रवाई की जाती है, अब ऐसी ही कार्रवाई इन शिक्षकों पर भी होनी चाहिए। इसके अलावा परीक्षा में खर्च की वसूली दोषी अधिकारी से की जानी चाहिए।

भविष्य में इन्हें किसी भी परीक्षा की जिम्मेदारी ना दी जाए। दोषी अधिकारी के सर्विस रिकॉर्ड में इसका विवरण होना चाहिए। एडवोकेट का ये भी कहना है कि दोषियों को तुरंत प्रभाव से एपीओ कर बीकानेर मुख्यालय भेज देना चाहिए, जिससे वह किसी भी तरह से मामले को प्रभावित न कर सके।

ऐसे हुई थी गड़बड़ी : कम पड़ने पर शिक्षकों को थमा दिए थे पेपर, कहा- कॉपी करा लाे

अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं से पहले शनिवार को नोडल केंद्र गोवर्धन विलास स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों-संस्था प्रधानों को पेपर वितरित किए गए थे। पहले तो शिक्षकों को पेपरों के लिफाफे लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। जैसे ही लिफाफे सामने आए तो कई शिक्षक यह देखकर चौंक गए कि पेपर ही कम हैं।

हंगामे पर शिक्षकों से कहा गया कि जिन स्कूलों के लिफाफों में पेपर कम हैं, वे फोटो कॉपी करवाकर परीक्षा करवा लें। कई शिक्षकों ने कहा कि एग्जाम से पहले ही पेपर लीक हो गया है, क्योंकि कई शिक्षक जिरोक्स कराने के लिए पेपर लेकर बाजार में निकल पड़े थे। मामला सामने आते ही विभाग में हड़कंप मच गया था। शिक्षक संघ परीक्षा की गोपनीयता भंग होने का आरोप लगाया। उन्होंने जांच कराने व पेपर तैयार करने वाली संस्था को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की थी।

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