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किन्नरों ने निभाई पीहर पक्ष की भूमिका:ओगणा में शादी में धर्म की बहन के घर नाचते गाते पहुंचे दर्जनों किन्नर, गहने-नकदी और कपड़ों के साथ भरा मायरा

उदयपुर2 महीने पहले
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मायरे की रस्मों को निभाते किन्नर परिवार के सदस्य। - Dainik Bhaskar
मायरे की रस्मों को निभाते किन्नर परिवार के सदस्य।

अब तक हमने शादी समारोह या अन्य किसी खुशी के मौके पर नाचते-गाते, बधाई मांगते हुए किन्नरों को देखा होगा। लेकिन उदयपुर एक शादी में किन्नरों ने एक पीहर पक्ष की भूमिका अदा करते हुए मायरा भरा। ओगणा कस्बें में हुई शादी में किन्नरों ने मायरे में कान के झूमके, पायजेब, नकदी और कपड़े भी दिए। मेवाड़ में किन्नरों द्वारा मायरा भरने का यह पहला उदाहरण है, जिसे देखने के लिए भीड़ भी जमा हो गई।

दरअसल ओगणा के किन्नर परिवार के मुखिया ललिता ने अपनी धर्म बहिन कैलाशीदेवी पत्नी देवीलाल खटीक के पुत्र विष्णु के विवाह के दौरान मायरा भरा। हालांकि किन्नर समुदाय के मुखिया ललिता के साथ ही कैलाशी देवी के पीहर पक्ष से भी लोग मायरा लेकर आए थे। इस दौरान सभी किन्नर ढोल नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाते हुए वैवाहिक स्थल पर पहुंचे और पारंपरिक अंदाज में रस्मों को निभाया।

घर में किराए पर रहने के कारण बना रिश्ता
किन्नर परिवार के मुखिया करीब पांच वर्ष पूर्व ओगणा में रहने आए थे, तब किसी ने उन्हें मकान किराए पर नहीं दिया। देवीलाल खटीक ने उन्हें अपना घर किराए पर रहने को दिया था। सभी पांच वर्ष इन्ही के घर में किराए पर रहने के कारण इनका पारिवारिक रिश्ता बन गया और देवीलाल की पत्नी कैलाशी देवी को किन्नर ललिता ने धर्म बहन बना लिया। देवीलाल और कैलाशी की चार बेटियां और दो बेटे हैं, जिसमें चारों बेटियों की शादी हो चुकी है।

मायरे में लाए कान के झूमके, पायजेब और कपड़े

मायरे में नकदी, गहने कपड़े समेत कई चीजें दी गई।
मायरे में नकदी, गहने कपड़े समेत कई चीजें दी गई।

ललिता अपनी धर्म बहिन के परिवार को देने के लिए मायरे में ढाई तोले सोने के झुमके, पौन तोले सोने की अंगूठी, दस तोले चांदी के पायजेब, ग्यारह हजार रुपए नगद के साथ ही दूल्हे के लिए सूट व जूते, परिवार जनों के लिए साड़ियां,कपड़े और जूते लाए। इस दौरान किन्नर परिवार के मुखिया ललिता के साथ उनके किन्नर चेले भी मौजूद रहे।

इनपुट- दुष्यंत पूर्बिया।