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  • Even After The Government Holiday, The Schools Are Arriving Every Day, So That The Trees That Give Life To Water Can Drink The Plants.

पेड़ बचाने की जिद:कैंपस में लगे पेड़-पौधों की सांसें बची रहें, इसलिए सरकारी छुट्टी के बाद भी 20 किलोमीटर का सफर कर रोज आते हैं स्कूल

उदयपुरएक महीने पहलेलेखक: स्मित पालीवाल
शारीरिक शिक्षक घनश्याम पेड़ पौधों को बचाने के लिए छुट्टी के बावजूद हर दिन पहुंच रहे स्कूल। - Dainik Bhaskar
शारीरिक शिक्षक घनश्याम पेड़ पौधों को बचाने के लिए छुट्टी के बावजूद हर दिन पहुंच रहे स्कूल।

कोरोनाकाल में लोगों ने ऑक्सीजन की कीमत को समझा है। किताबों में, नारों में, भाषणों में भले ही पेड़ लगाने की लंबी-लंबी बातें होती हों, पर धरातल पर ईमानदारी से इसे हम उतार नहीं पाते हैं। ऐसे समय में उदयपुर के एक शिक्षक नजीर बनकर सामने आए हैं। लॉकडाउन में स्कूल बंद है। बावजूद इसके वह रोज 20 किलोमीटर का सफर कर स्कूल आते हैं। वजह सिर्फ इतनी है कि स्कूल कैंपस में लगे पेड़-पौधों की सांसें बची रहें। उनका जीवन खतरे में न पड़े। यह शिक्षक रोज इन पेड़-पौधों में पानी डालते हैं और देखभाल करते हैं। रोज करीब 3 घंटे का वक्त इस काम के लिए देते हैं। इन्हीं की वजह से गर्मी में भी स्कूल की बगिया हरी-भरी है। इस शिक्षक का नाम है- घनश्याम।

छुट्टी की वजह से मुरझाने लगे थे पौधे

उदयपुर के ग्रामीण अंचल में बने राजकीय माध्यमिक विद्यालय काया के शिक्षक घनश्याम रोज अपने घर हिरण मगरी, सेक्टर-9, सवीना (उदयपुर) से आते हैँ। उन्होंने बताया कि बढ़ते कोरोना के बाद स्कूल बंद हो गए थे। इसकी वजह से स्कूल में शिक्षक, छात्र या फिर किसी और का प्रवेश बंद हो गया था। परिसर में लगे 200 से अधिक पेड़-पौधे मुरझाने लगे थे। इन्हें छात्रों के साथ मिल हमने बड़ी मेहनत से लगाया था।

स्कूल परिसर में लगे पेड़-पौधों में पानी डालते शिक्षक घनश्याम।
स्कूल परिसर में लगे पेड़-पौधों में पानी डालते शिक्षक घनश्याम।

गर्मी बढ़ने के साथ ही पेड़-पौधे सूख रहे थे। इन्हें पानी की जरूरत थी। बकौल घनश्याम, छुट्‌टी होने के बावजूद मैं रोज स्कूल आता हूं। पौधों में पानी डालता हूं। इनकी हरियाली देखकर मन को बहूत सुकून मिलता है। पेड़-पौधों को हम बचाएंगे तो ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। बारिश के लिए हम नहीं तरसेंगे। धरती हरी-भरी रहेगी।

सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो कर स्कूल जाते छात्र। (फाइल फोटो)
सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो कर स्कूल जाते छात्र। (फाइल फोटो)

सोशल डिस्टेंसिंग का नायाब तरीका

शारीरिक शिक्षक घनश्याम खटीक को 3 माह पहले श्रेष्ठ कार्य करने के लिए सरकार द्वारा 21 हजार की राशि से पुरस्कृत किया गया था। तब घनश्याम ने सरकार से मिली राशि का उपयोग अपने विद्यालय के छात्रों को कोरोना से बचाने के लिए किया है। छात्रों के लिए 250 छाते और 500 फेस मास्क बनवाए हैं। ताकि कोरोना संक्रमण के इस दौर में विद्यालय आने वाले छात्र कोरोना को मात दे सकें। छाते के पीछे लॉजिक यह है कि बच्चे पर्याप्त सोशल डिस्टेंस बचाए रख सकें।

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