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  • For The Fifth Time In A Row, The BJP Expressed Its Faith In Deepti For The Fifth Consecutive Victory, While The Congress Gave Tansukh A Chance To Send The BJP's Stronghold.

दीप्ति माहेश्वरी V/S तनसुख बोहरा:भाजपा की दीप्ति को सहानुभूति का सहारा तो लॉकडाउन में लोगों की मदद से चर्चा में आए कांग्रेस के बोहरा; दोनों को भीतरघात का खतरा

उदयपुर6 महीने पहलेलेखक: स्मित पालीवाल
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राजसमंद में आजकल चारों तरफ चुनावी चर्चा है। वेल्डिंग कारखाने में चुनावी चर्चा करते मजदूर। - Dainik Bhaskar
राजसमंद में आजकल चारों तरफ चुनावी चर्चा है। वेल्डिंग कारखाने में चुनावी चर्चा करते मजदूर।
  • राजसमंद सीट से बीजेपी ने दिवंगत किरण माहेश्वरी की बेटी की दीप्ति माहेश्वरी और कांग्रेस ने उद्योगपति तनसुख बोहरा को मैदान में उतारा है

राजसमंद विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम के ऐलान के साथ ही गली-मोहल्लों और चाय की दुकानों पर चुनावी चर्चा शुरू हो गई है। बीजेपी की कद्दावर नेत्री किरण माहेश्वरी के निधन के बाद पार्टी ने उनकी बेटी दीप्ति को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने बीजेपी के गढ़ को ढहाने के लिए उद्योगपति तनसुख बोहरा को अपना प्रत्याशी बना राजसमंद का मुकाबला रोचक बना दिया है।

बीजेपी में किरण माहेश्वरी के निधन के बाद कई राजनेता राजसमंद से अपनी दावेदारी जता रहे थे। पार्टी ने सिंपैथी फैक्टर को ध्यान में रखते हुए उनकी बेटी को उतारा है। राजसमंद नगर पालिका में कांग्रेस को मिली जीत के बाद पार्टी के मनोबल बढ़ा हुआ है। दोनों ही पार्टी के उम्मीदवार पहली बार चुनावी समर में कूदेंगे। इसे लेकर दोनों को भीतरघात का डर भी सता रहा है।

वहीं, राजसमंद से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उम्मीदवार के चुनावी रण में उतरने की भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि हनुमान बेनीवाल राजसमंद से किसी जाट उम्मीदवार को अपनी पार्टी का प्रत्याशी बना सकते हैं। इसके साथ ही बीजेपी के बागी भंवर सिंह पलाड़ा के भी राजसमंद से चुनावी रण में उतरने की चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। हालांकि, मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही है। अगर रालोपा और बागी भंवर सिंह पालड़ा मैदान में आते हैं तो यह दोनों बड़ी पार्टी के प्रत्याशी के वोटों का गणित बिगाड़ सकते हैं।

काकरोली में चाय की थड़ी पर चुनावी गपशप करते कॉलेज के छात्र।
काकरोली में चाय की थड़ी पर चुनावी गपशप करते कॉलेज के छात्र।

काकरोली के 100 फीट चौराहे पर चाय की थड़ी पर कॉलेज छात्र देवेंद्र सिंह अपने साथी मनोज और अमित से बीजेपी की जीत का दावा कर रहे थे। देवेंद्र कहते हैं कि किरण माहेश्वरी ने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया है। गांवों के घर-घर में लोग उन्हें पहचानते हैं। इसका फायदा इस बार उनकी बेटी दीप्ति को चुनाव में जरूर मिलेगा।

नजदीक बने एक कारखाने में कांग्रेसी प्रत्याशी तनसुख बोहरा को लेकर चर्चा हो रही थी। वेल्डिंग कर रहे शाकिर अपने साथी जाकिर से कांग्रेस की जीत का दावा कर रहे थे। शाकिर बता रहे थे कि तनसुख ने लॉकडाउन के वक्त काफी जरूरतमंद लोगों की मदद की है। यही वजह है कि कांग्रेस ने पार्टी के बड़े नेताओं को दरकिनार कर तनसुख को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं अपने साथी की बात का विरोध करते हुए जाकिर कहते हैं कि ऐसा नहीं होगा। बल्कि कांग्रेस को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि उन्होंने स्थानीय नेता को टिकट नहीं देकर बाहरी व्यक्ति को टिकट दिया है।

वहीं कुछ दूरी पर बने राजसमंद ट्रक ट्रांसपोर्ट यूनियन के पदाधिकारी बीजेपी प्रत्याशी दीप्ति माहेश्वरी को लेकर बहस कर रहे थे। एसोसिएशन के महामंत्री गिर्राज पालीवाल टिकट वितरण से नाखुश थे। उन्होंने कहा कि मैं इस चुनाव मैं वोट नहीं दूंगा, क्योंकि बीजेपी ने वंशवाद के आधार पर गलत व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया है। वहां मौजूद यूनियन के उपाध्यक्ष शंकर सिंह राठौड़ उन्हें ऐसा नहीं करने की सलाह दे रहे थे। राठौड़ बोल रहे थे कि बीजेपी ने जिताऊ प्रत्याशी को मौका दिया है।

राजसमंद ट्रक यूनियन ऑफिस में चुनावी चर्चा करते पदाधिकारी।
राजसमंद ट्रक यूनियन ऑफिस में चुनावी चर्चा करते पदाधिकारी।

राजसमंद के इतिहास में पहली बार उपचुनाव हो रहे हैं। इस सीट पर कांग्रेस के लिए अच्छी बात यह है कि कांग्रेस 1951 से अब तक हुए चुनाव में 7 बार राजसमंद विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। वहीं, भाजपा 6 बार चुनाव जीत चुकी है, लेकिन कांग्रेस के लिए बड़ी दिक्कत यह है कि कांग्रेस पार्टी साल 2003 से लेकर साल 2018 तक लगातार 4 बार यहां से भाजपा से चुनाव हार चुकी है। 1998 में आखिरी बार कांग्रेस के बंशीलाल गहलोत इस सीट से चुनाव जीते थे।

खास बात यह है राजसमंद सीट से भाजपा ने तो 6 बार चुनाव जीता है, लेकिन यहां पार्टी का स्थानीय प्रत्याशी कभी चुनाव नहीं जीत पाया। भाजपा के जीते हुए प्रत्याशी हमेशा राजसमंद के बाहर के थे। किरण माहेश्वरी भी मूल रूप से उदयपुर की थीं। 1977 में कैलाश मेघवाल जीते वह भी उदयपुर के थे। वहीं दो बार विधायक रहे नानालाल भी चित्तौड़गढ़ के थे।

हालांकि, जिस तरीके से साल 2003 से 2018 तक चार बार भाजपा ने इस सीट पर जीत दर्ज की है। उसी तरीके से कांग्रेस पार्टी ने भी साल 1957 से लेकर 1972 तक लगातार चार बार राजसमंद सीट पर कब्जा किया था। ऐसे में इस बार राजसमंद विधानसभा में हो रहे उपचुनाव में इस बात पर सब की नजर होगी कि भाजपा 5 बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बना पाती है। या फिर सत्ताधारी दल कांग्रेस चुनाव में जीत दर्ज करेगा।

कब कौन रहा विधायक

सालपार्टीविधायक
1951भैरू सिंहकृषि लोक परिषद
1957निरंजन आर्यकांग्रेस
1962निरंजन आर्यकांग्रेस
1967अमृतलालकांग्रेस
1972नानालालकांग्रेस
1977कैलाश चंद्रजनता पार्टी
1985मदनलालकांग्रेस
1990शांतिलाल खोईवालभाजपा
1993शांतिलाल खोईवालभाजपा
1998बंशीलाल गहलोतकांग्रेस
2003बंशीलाल खटीकभाजपा
2008किरण माहेश्वरीभाजपा
2013किरण माहेश्वरीभाजपा
2018किरण माहेश्वरीभाजपा

जाति के आधार पर मतदाताओं की संख्या:

  • राजपूत मतदाताओं की संख्या- 40,000
  • कुमावत मतदाताओं की संख्या- 36,000
  • ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या- 25,000
  • जैन मतदाताओं की संख्या- 17,000
  • गुर्जर मतदाताओं की संख्या 14,000
  • मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 11,000
  • एससी-एसटी मतदाताओं की संख्या 50,000
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