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पुरातत्व विभाग ने शुरू करवाया काम:चार हजार साल पुरानी आहाड़ सभ्यता में नई जान फूंक रहे, 1 करोड़ रु. में होगा जीर्णाेद्धार, दिसंबर से पर्यटक देख सकेंगे

उदयपुर20 दिन पहले
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आहाड़ संग्रहालय में टीलाें की सुरक्षा दीवार की रिपेयरिंग करते कारीगर। - Dainik Bhaskar
आहाड़ संग्रहालय में टीलाें की सुरक्षा दीवार की रिपेयरिंग करते कारीगर।
  • जर्जर हो चुकी दीवारों की भी कर रहे मरम्मत

4 हजार साल पुरानी आयड़ सभ्यता का दर्शन करवाने वाले आहाड़ या आयड़ संग्रहालय परिसर का जीर्णाेद्वार शुरू हाे गया है। प्राेजेक्ट के तहत टीलाें पर सभ्यता के अवेशषाें का संरक्षण किया जा रहा है। नए कलेवर वाले परिसर में पाथ-वे और गार्डन भी होंगे, जहां पर्यटक वॉक के साथ कुछ समय ज्यादा बिता सकेंगे।

रिनोवेशन के कामों पर पुरातत्व विभाग 1 कराेड़ रुपए से ज्यादा खर्च करेगा। अधिकारियों का कहना है कि टीलाें पर बबूल के पेड़ाें की जड़ें साइट काे खराब कर रही थीं। इन पेड़ाें काे हटाकर साइट काे साफ किया जा चुका है। जर्जर हाे चुकी दीवार की भी रिपेयरिंग की जा रही है। विभाग के अनुसार दिसंबर तक काम पूरा हाेने की उम्मीद है।

परिसर में रेलिंग-लाइटिंग लगेगी, वॉक के लिए पाथ-वे, गार्डन में घास-फूल लगाएंगे

  • टीलाें की सुरक्षा दीवार को मजबूत किया जाएगा।
  • साथ परिसर में रेलिंग लगाएंगे और लाइटिंग भी की जाएगी।
  • वाॅक के लिए पाथ-वे और गार्डन बनाया जाएगा। इस बार बड़े पेड़ नहीं लगाए जाएंगे, क्याेंकि इनकी लंबी जड़ाें से साइट खराब हाेती है।
  • गार्डन में गुलाब, जूही के पाैधाें के साथ घास लगाई जाएगी।

पाषाण सभ्यता से रू-ब-रू कराता है म्यूजियम

आहड़ संग्रहालय में पाषाण उपकरण वीथिका, ताम्र उपकरण, मिट्‌टी के बर्तन, धातु, सीपियों से बने आभूषण, खिलौने जैसी पुरा सामग्री का कलेक्शन है। साढ़े चार हजार साल वर्ष पुरानी यह सामग्री ताम्र संस्कृति को जीवंत करती है।

लाल-काली मिट्टी के बर्तन आहाड़ संस्कृति के प्रतिनिधि मृदभांड हैं। इनमें कटोरे-थालियां तो हैं ही, पत्थराें से बने हथियार भी हैं। यहां उपलब्ध अनाज के बड़े-बड़े कोठार जो कुषाण काल के बताए जाते हैं। यह पुरा संपदा इस संस्कृति के विकास और वैभव को दर्शाती है।

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