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ज्वैलर्स के चेहरे दमके:उदयपुर में ढाई माह में सोने के 500 किलो जेवर पर हॉलमार्किंग, 300 किलो बचे, अब इन्हें भी सर्टिफाइड कराने को 3 माह मिले

उदयपुर16 दिन पहले
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पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ बीआईएस डीजी की बैठक के बाद ज्वैलर्स के लिए कई राहत की घोषणा की गई थी। - Dainik Bhaskar
पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ बीआईएस डीजी की बैठक के बाद ज्वैलर्स के लिए कई राहत की घोषणा की गई थी।
  • बीआईएस ने लोकल एसोसिएशन को हाॅलमार्किंग सेंटर खाेलने की अनुमति दी, 20 कैरेट का प्रावधान भी जोड़ा
  • पुरानी ज्वैलरी पर अब 30 नवंबर तक करा सकेंगे हॉलमार्किंग

केंद्र सरकार और भारत मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने ज्वैलर्स को राहत देते हुए पुराने स्टॉक पर हॉलमार्किंग की आखिरी तारीख को 30 नवंबर तक आगे बढ़ा दिया है। तारीख आगे बढ़ने से व्यापारियों को ज्वैलरी के पुराने स्टॉक को बेचने में काफी मदद मिलेगी। ऐसे में नवंबर तक ज्वैलरी का पूरा पुराना स्टॉक बिकने की उम्मीद जताई जा रही है। जयपुर सर्राफा कमेटी के महामंत्री मातादीन सोनी ने बताया कि जब हॉलमार्किंग अनिवार्य की गई तब प्रदेश में 20 टन सोना बिना हॉलमार्क का था।

अब बीते दो महीनों में पुराने स्टॉक के करीब 50 फीसदी आभूषण पर हॉलमार्किंग हो चुकी है। इसका बाजार मूल्य 1 हजार करोड़ के करीब था। इसी तरह उदयपुर में सोने का पुराना स्टॉक करीब 800 किलो था। अब इसमें से 300 किलो सोना ही ऐसा बचा है जिस पर हॉलमार्किंग नहीं हैं। सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष यशवंत आंचलिया के मुताबिक हालमार्किंग में 20 कैरेट का प्रावधान जुड़ जाने से भी ज्वैलर्स की परेशानी काफी हद तक खत्म हुई है। पहले 18, 22 और 24 कैरेट की हॉलमार्किंग का ही प्रावधान था। लेकिन अब 20 कैरेट की हॉलमार्किंग जुड़ने से प्रक्रिया ज्यादा आसान हो गई है। इससे स्टॉक खत्म करने में काफी मदद मिलेगी।

3 आभूषणों तक हॉलमार्किंग तुरंत, 10 पीस पर बड़े लॉट रोककर करना होगा काम

पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ बीआईएस डीजी की बैठक के बाद ज्वैलर्स के लिए कई राहत की घोषणा की गई थी। इसमें लोकल एसोसिएशन को सब्सिडी देकर हॉलमार्किंग सेंटर खोलने की इजाजत भी दी गई थी। हॉलमार्किंग के लिए अब सेंटर को एक-एक आभूषण भी स्वीकार करने होंगे। तीन आभूषणों तक की हॉलमार्किंग तुरंत करनी होगी। जबकि 10 पीस तक के लॉट को बड़े लॉट रोक कर प्राथमिकता देते हुए पहले हॉलमार्क करना होगा। रिटेलर या ज्वैलर के लिए अपने नाम की लेजर मुहर लगवाने का प्रावधान भी तय किया गया।

पोर्टल पर रिकॉर्ड रखने की अब बाध्यता नहीं, प्राइवेसी भंग होने की आशंका भी खत्म हुई

जयपुर सर्राफा कमेटी का कहना है कि मियाद बढ़ने के साथ ही पोर्टल पर रिकॉर्ड रखने की बाध्यता खत्म होने से भी ज्वैलर्स को फायदा मिलेगा। कमेटी की मांग थी कि पोर्टल पर रिकॉर्ड को डिजिटल ना किया जाए। क्योंकि इसके तहत ज्वैलर्स को खरीदने-बेचने का हिसाब पोर्टल पर उपलब्ध कराना होता था। जिससे ना सिर्फ ज्वैलर्स, बल्कि ग्राहक की भी प्राइवेसी भंग होने की आशंका थी। लेकिन अब मांगे माने जाने के बाद यह आशंका भी दूर हो गई है।

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