पुस्तकों का विमोचन:लोकसभा-राज्यसभा में हिंदी व क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग, अंग्रेजी में होती है नोटिंग, इसे बदलना होगा

उदयपुर2 महीने पहले
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  • विद्यापीठ में डॉ. भार्गव, प्रो. चतुर्वेदी, डॉ. वेददान और प्रो. लोढ़ा की 5 पुस्तकों का विमोचन

जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय बेंगलुरू और जनबोध संस्थान उदयपुर के साझे में मंगलवार को प्रतापनगर स्थित विद्यापीठ के सभागार में एक साथ चार समाजशास्त्रियों की पांच पुस्तकों का विमोचन किया गया।

इसमें डॉ. नरेश भार्गव, प्रो. अरूण चतुर्वेदी, डॉ. वेददान सुधीर, प्रो. संजय लोढ़ा द्वारा संपादित समाजशास्त्र रीडर शृंखला के तहत समाजशास्त्र अर्थ एवं उपागम, समाजशास्त्रीय विचारक: प्रमुख पाश्चात्य विचारक, भारतीय समाज, भारतीय सामाजिक व्यवस्था, सामाजिक परिवर्तन का लोकार्पण कुलपति प्रो. एसएस सारंगदेवोत, पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी, कुल प्रमुख भंवरलाल गुर्जर, रजिस्ट्रार डॉ. हेमशंकर, डॉ. हद्धयकांत दिवान, प्रो. मोहन अडवाणी, आईआईएम के डॉ. सौरभ गुप्ता ने किया।

मुख्य अतिथि प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि सशक्त व सुदृढ़ राष्ट्र के निर्माण के लिए साहित्य का होना बहुत जरूरी है। साहित्य समाज का दर्पण है। प्रो. सोडाणी ने कहा कि मौलिक व स्वतंत्र चिंतन का लेखन सिर्फ मातृ भाषा से ही संभव है।

हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए बड़े आयोजनों में हिन्दी को स्थान देने की आवश्यकता है। आज हमारे जनप्रतिनिधि लोकसभा व राज्यसभा में हिन्दी व क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग करते हैं, लेकिन उसकी नोटिंग अंग्रेजी भाषा में ही की जा रही है, जिसे बदलना होगा।

हमारे जनप्रतिनिधि तो हिन्दी को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन ब्यूरोक्रेट्स अंग्रेजी के पक्षधर हैं। विचारों की अभिव्यक्ति तो मातृभाषा से ही संभव है। हमारी नई शिक्षा नीति-2020 में बच्चे की पांचवीं कक्षा तक की शिक्षा मातृभाषा में ही हो। लेखक का अनुभव ही उनके लेखन का आधार होता है, जो कठिन समय को चुनौती मानकर आगे बढ़ने की जरूरत है।

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