तूफान, कोरोना और उम्मीदें:इतिहास गवाह है...तूफान थमते ही हैं, फिर चाहे मौसमी हों या महामारी के

उदयपुर6 महीने पहले
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शहर में बुधवार को तेज तूफान आया। तबाही भी मचाई। कुछ ऐसा ही तूफान इस समय कोरोना का है। सड़क पर फैले सूखे पत्तों और हवा में धूल की तरह इस महामारी का वायरस भी हर तरफ फैला पड़ा है। तूफान ने पेड़-पौधे, होर्डिंग्स-बैनर, टेंट-तंबू, बिजली के तार गिराए तो कोरोना का तूफान भी जिंदगियां गिरा रहा है।

तूफान में इंसान की एडी से लेकर सिर तक धूल के कण काबिज हो गए, ठीक वैसे ही कोरोना भी एक बार छू लेने के बाद पूरे शरीर पर काबिज होने की कोशिश करता है। लेकिन इतिहास गवाह है...तूफान थमते हैं और उन्हीं में से आशा की नई उम्मीद दिखती है।

ठीक वैसे ही जैसे इस तूफान काे चीरकर मरीज को ले जा रही यह एंबुलेंस। कोरोना में भी मेडिकलकर्मी, पुलिसकर्मी, प्रशासन के नुमाइंदे हमारे लिए आशा की किरणें हैं। जरूरत हौसले के साथ हमारे भी डटे रहने की है। कोरोना गाइडलाइन की पालना, समय पर वैक्सीनेशन कराने और दूसरों को भी टीका लगाने के लिए प्रेरित कर हम कोरोनारूपी तूफान को जरूर थाम देंगे।

तूफान

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