भास्कर विशेष:मी लोर्ड! आपके आदेशों पर मलबा... मंजूरी स्लरी डंप की, बना दिया प्लास्टिक का पहाड़

उदयपुर/गोगुंदाएक महीने पहले
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प्लास्टिक का ढेर। - Dainik Bhaskar
प्लास्टिक का ढेर।
  • मदारड़ा में मार्बल स्लरी के नदी में घुलने का मामला
  • भास्कर की खबर के बाद डंंपिंग यार्ड पहुंचे गोगुंदा तहसीलदार

गोगुंदा के मदारड़ा गांव में स्लरी डंपिंग यार्ड में मार्बल उद्यमी स्लरी ही नहीं प्लास्टिक भी डंप कर रहे हैं। पिछले 5 साल से लगातार डंपिंग से यहां प्लास्टिक का भी पहाड़ बन गया है। मार्बल स्लरी के मदारड़ा नदी में मिलने की खबर के बाद गुरुवार को जांच करने तहसीलदार, पटवारी यहां पहुंचे तो इसका पता चला। टीम ने मौके पर पाया कि मार्बल स्लरी नदी में मिल रही है, जिसके फतहसागर झील तक पहुंचे की भी आशंका है।

टीम ने जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी है। शुक्रवार को यहां उच्चाधिकारियों के निरीक्षण की संभावना है। जिले की मार्बल फैक्ट्रियों से निकलने वाली स्लरी के निस्तारण के लिए हाईकोर्ट की सशर्त मंजूरी के बाद 2016 में मदारड़ा गांव की ढाई सौ बीघा जमीन पर डंपिंग यार्ड शुरू किया गया था। आदेश में स्पष्ट कहा था कि मार्बल स्लरी मदार बड़ा तालाब सहित किसी जलाशय में नहीं मिलनी चाहिए और डंपिंग यार्ड का उपयोग सिर्फ स्लरी डंप करने के लिए होगा और किसी के लिए नहीं।

इसके बावजूद यहां मार्बल स्लरी के साथ प्लास्टिक भी डंप किया जा रहा है। जिसका पहाड़ बन चुका है। इस संबंध में मार्बल प्रोसेसिंग समिति के महासचिव कपिल सुराणा ने कहा कि प्लास्टिक पहले डालते थे। जो प्लास्टिक पड़ा है, वह पहले का है। अब बंद कर दिया है। भास्कर ने मौके पर प्लास्टिक कचरे से भरे ट्रेक्टर देखे।

चारदीवारी नहीं होने से मवेशी फंस रहे स्लरी में, कई की हो चुकी मौत
ग्रामीणों ने बताया कि डंपिंग यार्ड की तारबंदी नहीं होने से गत 23 जून को 3 भैंसे स्लरी के एनीकट में गिरी और मौत हो गई। पूर्व उप प्रधान पप्पू राणा ने कहा कि यहां कई जानवरों की मौत हो चुकी है। डंपिंग यार्ड की सशर्त मंजूरी में स्पष्ट लिखा है कि जानवरों को बचाने के लिए यार्ड की फेंसिंग की जाएगी। सभी नियमों का उल्लंघन के बाद भी प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा है।

निरीक्षण के बाद तहसीलदार भी बोले- डंपिंग यार्ड से नदी में मिल रही है स्लरी
गुरुवार को टीम के साथ डंपिंग यार्ड का निरीक्षण किया। यार्ड चारों तरफ से खुला है। पक्की दीवार या तारबंदी नहीं है। स्लरी बहकर आगे नहीं जाए, इसके लिए मिट्टी के चार-पांच एनीकट बना रखे हैं, लेकिन अभी तेज बारिश के कारण स्लरी बह रही है। यह पानी मदार तालाब में घुल रहा है। प्लास्टिक व स्लरी दोनों की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। -रविंद्र चौहान, कार्यवाहक तहसीलदार, गोगुंदा

आज जिला उद्योग केंद्र के अध्यक्ष के साथ निरीक्षण कर बनाएंगे रिपोर्ट : एसडीएम
गुरुवार को तहसीलदार ने डंपिंग यार्ड का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाई है। यार्ड से स्लरी का रिसाव होना पाया है। स्लरी मदारड़ा नदी में जा रही है। इस नदी का पानी मदार बड़ा तालाब से हाेते हुए शहर की फतहसागर झील में मिल रहा है। जिला उद्योग केंद्र के अध्यक्ष और मैं खुद शुक्रवार को जाकर रिपोर्ट तैयार करेंगे।-नीलम लखारा, उपखंड अधिकारी, गोगुंदा

​​​​​​​2015-16 में किया था धरना-प्रदर्शन, धनबल के आगे हारे ग्रामीण

डंपिंग यार्ड के दुष्परिणाम काे लेकर ग्रामीण सतर्क थे। मदार बड़ा और फतहसागर के जलग्रहण क्षेत्र को लेकर वर्ष 2015-16 में ग्रामीणों ने उदयपुर में धरने प्रदर्शन किए थे, न्यायालय में भी लड़ाई लड़ी। लेकिन मार्बल एसाेसिएशन के धन बल के आगे हार गए और कैचमेंट एरिया मदारड़ा में डंपिंग यार्ड बन गया।

उसके परिणाम अब सामने आ रहे हैं। मदारड़ा पंचायत के गांवाें का पानी खराब हाे चुका है। वहीं अब लबालब भरे स्लरी के एनीकटाें से स्लरी बरसात के पानी के साथ बहकर मदारड़ा नदी में बह रही है। यदि मदारड़ा डंपिंग यार्ड पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई ताे शहर की झील में जल प्रदूषण के रूप में दुष्परिणाम सामने आएंगे।

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