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  • If The Ceremony Is Postponed In The Wedding Season, The Sale Of Ghee Fell By 50 Percent And That Of Mawa By 90%, The Price Reduced By 40 To 50 Rupees.

भास्कर खास:शादी के सीजन में समारोह टले तो घी की बिक्री 50 फीसदी और मावे की 90% तक गिरी, 40 से 50 रुपए कम हुए दाम

उदयपुर6 दिन पहले
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  • घी 380 और मावा 180 रुपए प्रति किलो बिक रहा, शादी सीजन में 220 रुपए तक बिकता है मावा

शादी के सीजन में लॉकडाउन का असर बाजार पर भी दिख रहा है। विवाह समारोह नहीं होने से घी-मावा की बिक्री काफी प्रभावित हुई है। दो महीने के दौरान ही घी का भाव 400 के नीचे चला गया है। व्यापारियों के अनुसार अप्रैल में घी (प्रति किलो) 420 रुपए के भाव से बिक रहा था। लेकिन अब यह 10 फीसदी तक गिरकर 380 रुपए से भी कम रह गया है। इस सीजन में घी की बिक्री 50 फीसदी से भी कम हुई है। मावा की बिक्री भी 5 से 10 फीसदी तक ही रह गई है। व्यापारियों का कहना है कि समारोह रद्द होने और कार्यक्रम नहीं होने से इस सीजन में मावे के ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। जिससे मावे का भाव 180-190 रुपए तक बना हुआ है।

जबकि इस सीजन में मावे का भाव 220 से भी ज्यादा रहता था। ऑयल एंड सीड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कोठारी ने बताया कि शादी के सीजन में अप्रैल-जुलाई और नवंबर-दिसंबर के दौरान घी-मावे की खपत काफी बढ़ जाती है। जिससे भाव में भी फर्क साफ तौर पर देखा जा सकता है। लेकिन बाजार बंद होने और शादी समारोह नहीं होने से डिमांड प्रभावित हुई है। अब सिर्फ ऑनलाइन फूड स्टोर या रेस्टोरेंट में ही घी-मावे की सप्लाई हो रही है। वह भी उम्मीद से भी काफी कम है। ऐसे में धंधा चौपट हो चुका है।

खाद्य तेल के भाव 200 रुपए प्रति किलो के करीब पहुंचे

जहां पेट्रोल 100 रुपए के पार जा चुका है, वहीं खाद्य तेल के भाव भी 200 रुपए प्रति किलो के करीब हैं। कीमतों में बढ़ोतरी के चलते दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। ऑयल एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के सदस्य प्रताप राय चुघ ने बताया कि सनफ्लावर का तेल अभी 180 रुपए के भी पार कर चुका है। पिछले 6 महीने के दौरान तेल की कीमतों में (प्रति 15 लीटर) 500 से 600 रुपए तक की वृद्धि हुई है। सनफ्लावर तेल 185 रुपए, सोयाबीन 145 से 152 रुपए, सरसों 160 से 185 रुपए, मूंगफली 185 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि पाम ऑयल की कीमतों में वृद्धि का असर स्थानीय बाजार पर भी साफ तौर पर दिख रहा है। इसके अलावा बिक्री मूल्य पर अंकुश नहीं होने के चलते भी खाद्य तेल मंहगा हो चुका है।

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