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अवैध शराब:फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाला इथाइल खरीदकर बनाते हैं अवैध शराब, इसमें मिला मेथनॉल-केमिकल होता है जानलेवा

उदयपुर2 महीने पहले
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  • ढाबाें पर अवैध रूप से निकालकर बेचते हैं, यहां से तस्कर खरीदते हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं हाेती
  • काेई शराब बनाने में दुरुपयाेग ना करे इसलिए ट्रांसपाेर्ट के दाैरान कंपनियां इथाइल एल्काेहल के टैंकराें में मेथनॉल मिलाती है, फिर भी धड़ल्ले से हो रहा उपयोग

नकली या अवैध शराब से माैत, आंखों की राेशनी चले जाने की मुख्य वजह इथाइल एल्काेहल में मिला मेथनाॅल केमिकल या अन्य केमिकल हाेते हैं। भरतपुर में जहरीली शराब पीने से 8 लाेगाें की माैत की वजह एल्काेहल निर्मित यूपी की अवैध देसी शराब थी। आबकारी अधिकारियाें का कहना है कि सरकारी शराब इथाइल एल्काेहल से बनती है।

जाे इस प्रकार की माैताें का कारण नहीं बनती। जबकि औद्याेगिक उपयाेग में काम आने के लिए टैंकराें से सप्लाई हाेने वाले इथाइल एल्काेहल खरीदकर इससे बनी शराब घातक हाेती है। क्याेंकि टैंकराें में सप्लाई हाेने वाले इथाइल में कंपनियां इसलिए मेथनॉल केमिकल मिला देती है कि काेई इसका शराब बनाने में उपयाेग नहीं करे।

जबकि तस्कर इसी केमिकल मिले एल्काेहल काे टैंकर चालकाें से खरीदकर शराब बनाते हैं। मेथनाॅल के साथ अन्य केमिकल का मिला हाेना तथा बनाते वक्त इसका ज्यादा मात्रा में उपयाेग कर लेने से कभी-कभार इससे आंखों की राेशनी के साथ जान भी चली जाती है।

पानी, कलर और एसेंस मिलाकर कबाड़ी से खरीदी शराब की खाली बोतलों में भर देते हैं

एल्काेहल युक्त शराब बनाने के लिए तस्कर कबाड़ियाें से शराब की बाेतलें खरीदते हैं। कलर-पेंट या फैक्ट्रियों में उपयाेग के लिए टैंकराें से इथाइल भेजा जाता है। इथाइल में मेथनॉल सहित अन्य कैमिकल मिलाए जाते हैं। टैंकराें से ट्रांसपोर्ट के दाैरान तस्कर कुछ मात्रा में अवैध रूप से इसे खरीद लेते हैं। इसमें पानी, कलर और एसेंस मिलाकर शराब बनाकर बाेतलाें में भर दिया जाता है। प्याेर इथाइल और मेथनॉल मिली इथाइल के रंग और गंध में अंतर नहीं हाेता है। इसमें कलर नहीं मिला देने पर देसी और कलर मिलाने पर शराब अंग्रेजी जैसी दिखती है। इस शराब के स्वाद में भी ज्यादा फर्क नहीं हाेता है।

ढाबे वाले 220 लीटर का ड्रम चालकों से 5 हजार में खरीदकर तस्कराें काे 20 हजार तक में बेचते हैं

इथाइल का परिवहन करने वाले टैंकर चालक ढाबा संचालकाें काे अवैध रूप से 220 लीटर के एल्काेहल के ड्रम काे 5000 रुपए में बेच देते हैं। यहीं ड्रम ढाबा संचालक शराब तस्कराें काे 20 हजार रुपए में बेचते हैं। इससे बनी शराब का पव्वा तस्कर 80 रुपए में बेच देते हैं जबकि आबकारी का यह पव्वा 100 रुपए में मिलता है।

सस्ते दाम के चक्कर में लाेग इसे खरीद लेते हैं। इथाइल एल्काेहल में मेथनॉल सहित अन्य कैमिकल मिले हाेने पर यह कभी-कभार जानलेवा बन जाता है। शराब बनाने की प्रक्रिया के दाैरान एल्काेहल की ज्यादा मात्रा काम में ले लें तब भी इसके सेवन से जी मचलाना, आंखों की राेशनी चली जाना और फिर माैत तक हाे सकती है।

3 रूट से निकलते हैं एल्काेहल भरे टैंकर

इथाइल एल्काेहल से भरे टैंकर मुख्य रूप से तीन रूट से हाेकर निकलते हैं। गुजरात के कांडला से रवाना हाेकर पाली, ब्यावर, अजमेर, जयपुर से प्रदेश के औद्याेगिक क्षेत्र जैसे अलवर, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा तक जाते हैं। दूसरा रूट रतनपुर बॉर्डर से उदयपुर, चित्ताैड़गढ़, अजमेर और जयपुर तक है। तीसरा रूट बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, मंदसाैर, नीमच, निंबाहेड़ा हाेते हुए जयपुर तक है। हालांकि टैंकराें में सप्लाई हाेने वाला यह एल्काेहल अवैध नहीं हाेता है, लेकिन टैंकराें से निकालकर इसे अवैध बेचा जाता है।

जंगल में बनाते हैं अवैध शराब
सड़ाने की प्रक्रिया के समय ड्रम या बड़ी पॉलिथीन थैली में रखते हैं, जाे खुली रहती है। अवैध है, इसलिए इसे जंगलाें में बनाते हैं। इसमें काेई जहरीला जानवर गिर जाने पर यह जहरीली बन जाती है। इसके सेवन से माैत हाे सकती है।

जिले में इन जगहाें पर हथकढ़ और नकली शराब पकड़ चुके हैं

आबकारी विभाग की कार्रवाइयाें और अनुसंधान में सामने आया है कि झाड़ाेल, काेटड़ा, अंबासा, खेरवाड़ा सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्राें में हथकढ़ शराब धडल्ले से बनती है। नकली शराब मावली, सलूंबर और शहरी क्षेत्र के आस-पास बनती है।

10 माह में आबकारी विभाग ने 5 हजार बाेतल हथकढ़ शराब पकड़ी

सहायक आबकारी अधिकारी लाेकेश जाेशी ने बताया कि आबकारी विभाग ने दस माह में अवैध शराब पर कई कार्रवाइयां की है। इसमें 5 हजार बाेतल हथकढ़ शराब, 1.54 लाख लीटर दूसरी शराब पकड़ी है।

अवैध शराब घातक : विभाग
आबकारी विभाग से इथाइल एल्काेहल का उपयाेग कर पूरी प्रक्रिया से गुजरने के बाद शराब बनाई जाती है। मेथनॉल (मिथाइल एल्काेहल) से बनी शराब मानव स्वास्थ के लिए जानलेवा हाेती है। इसके सेवन करने के बाद व्यक्ति की आंखों की राेशनी चली जाती है और माैत भी हाे सकती है।
-हेमेन्द्र नागर, जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी विभाग।

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