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  • In The Matter Of Landing The Cruise In Purnela, The Court Will Give Its Verdict Today, Before This, The Opposition Are Giving Their Own Arguments.

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क्रूज उतारने का मामला:पीछाेला में क्रूज उतारने के मामले में काेर्ट आज सुनाएगी फैसला, इससे पहले पक्ष-विपक्ष दे रहे अपने-अपने तर्क

उदयपुर10 दिन पहले
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पीछोला झील में क्रूज उतारने के मामले में स्थानीय काेर्ट शुक्रवार को फैसला सुनाएगी। इसी से तय होगा कि क्रूज पीछोला में रहेगा या नहीं? प्रार्थी तेजशंकर पालीवाल, जयदीप पालीवाल और अशाेक पालीवाल ने इस क्रूज को झील से निकालने के लिए अर्जी लगाई थी। कोर्ट ने 5 अप्रैल को बहस पूरी हाेने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। झील प्रेमियाें के वकीलाें ने बहस में तर्क दिया था कि नगर निगम के ठेेकेदार ने संबंधित विभागाें से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बगैर ही हाेली के दिन झील में क्रूज उतार दिया। इसमें काेर्ट के निर्देशाें की भी पालना नहीं की गई है।

झील प्रेमियों की आपत्ति के बाद डीटीओ ने इसे सील कर दिया था। फैसला आने से पहले भास्कर ने झील प्रेमियों के साथ नगर निगम, क्रूज को उतारने वाली कंपनी और विशेषज्ञों से बात की। ये अपने-अपने तर्क दे रहे हैं।
कोर्ट ने क्रूज संचालन पर रोक नहीं लगाई, बल्कि कुछ चीजों पर लगाई थी : निगम
नगर निगम आयुक्त हिम्मत सिंह बारहठ ने कहा कि क्रूज के लिए 2016 में निविदा मांगी गई थी। यह 2018 में पूरी होकर अमल में आ गई। पांच निविदा आवेदकों में से एमएम ट्रावेल्स को अनुमति जारी की। इसके विरोध में तेशंकर पालीवाल ने जनहित याचिका दायर की थी, जिसे स्थानीय अदालत ने निर्णित करते हुए क्रूज संचालन पर रोक नहीं लगाई, लेकिन भोजन बनाने, खिलाने और रात्रि विश्राम की नियम विरुद्ध अनुमति नहीं दी। क्रूज संचालन के लिए विभिन्न शर्तों के तहत इसमें भोजन नहीं बनाया जाएगा। शराब का वितरण नहीं होगा। सीवरेज के लिए ऑर्गेनिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
कानूनी रूप से संचालन की बिड हासिल की, अब पेंच फंसा रहे : क्रूज संचालक
क्रूज संचालक अशरफ खान ने कहा कि हम तो ठेकेदार हैं। निगम ने हमको लीगल बिड के माध्यम से अनुमति प्रदान की है। अब जब संचालन का समय आया तो तरह-तरह के पेच लगाए जा रहे हैं।
डीजल से नोका चलाने की परमिशन नहीं, ये झील के सत्यानाश का प्रयास : झील प्रेमी
पहले भी जिला कलेक्टर ने डीजल से चलने वाले नौकाओं को चलाने की अनुमति नहीं दी थी। इस क्रूज की जल विस्थापन क्षमता करीब 300 टन है। इससे पानी में अत्यधिक स्तर पर मानवीय गतिविधियां होंगी। यह झील का सत्यानाश करने का प्रयास है।

बिना फिटनेस-रजिस्ट्रेशन उतारा, इसलिए पाबंद : डीटीओ
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डीटीओ कल्पना शर्मा ने कहा कि क्रूज को बिना फिटनेस और बिना रजिस्ट्रेशन के ही झील में उतारा गया। यह नियम विरुद्ध था। जांच-पड़ताल के बाद चालान काटकर संचालक को नियम विरुद्ध संचालन नहीं करने के लिए पाबंद किया गया।​​​​​​​

क्रूज चलाना किसी के घर में पटाखे फोड़ने जैसा : पर्यावरणविद्
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पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक डाॅ. सत्यप्रकाश मेहरा ने कहा कि क्रूज संचालन से जलीय जीवों का जीवन चक्र अस्थिर हो जाएगा। यह बिल्कुल किसी के घर में फटाके फोड़ने जैसा है। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि उदयपुर की शान पीछोला झील का संरक्षण हमारा कर्तव्य है।​​​​​​​


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