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  • In Udaipur, What Was Understood Was 56.863 Kg Of Gold, 67.800 Kg Of Gold Was Found There, Due To Different Numbering On A Biscuit And Document, 3 Kg 200 Grams Of Gold Was Kept Here

मालखाने से निकला 32 करोड़ का 64.600 सोना:जमा कराते समय कीमत सिर्फ 5 लाख और वजन 56.863, आधी रात कड़ी सुरक्षा के बीच CGST टीम लेकर हुई रवाना, तीन किलो 200 ग्राम अब भी जमा

उदयपुर2 महीने पहले
1965 में राजस्थान में 56 किलो 863 ग्राम सोना जमा कराया गया था। जब सोना निकाला गया तो ये 67.800 किलो हो गया है।

देश के दूसरे प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री को तौलने के लिए साल 1965 में राजस्थान में सोना जमा किया गया था। जब शास्त्री जी राजस्थान नहीं जा पाए तो यह सोना उदयपुर में कलेक्टर ने जब्त कर लिया था। अब 56 साल बाद सोना कलेक्ट्रेट के मालखाने से बाहर आ गया है। ये सोना केंद्र सरकार को मिलना है।

जिस समय सोना कलेक्ट्रेट के मालखाने में जमा कराया गया था तब इसका वजन 56 किलो 863 ग्राम था। तब इसकी कीमत 5 लाख रुपए था। जब सोना निकाला गया तो ये 67.800 किलो मिला है, जिसकी कीमत 32 करोड़ रुपए से ज्यादा है। सोना लेने के लिए CGST (सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स) टीम उदयपुर पहुंची थी। सोमवार आधी रात को टीम 64 किलो सोने के आभूषण और सोने के बिस्किट लेकर दिल्ली रवाना हो गई है। बचा हुआ 3.2 किलो का सोना फिलहाल मालखाने में ही जमा करा दिया गया है। बचे हुए सोने के बिस्किट और दस्तावेजों पर लिखे शब्दों में अंतर आ रहा है। अब फिर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र पेश किया जाएगा। इसके बाद फैसला होगा।

मालखाने के बाहर सोमवार दोपहर से देर रात तक सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। सीजीएसटी अधिकारियों के बार-बार आने जाने से गहमा-गहमी का माहौल बना रहा।
मालखाने के बाहर सोमवार दोपहर से देर रात तक सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। सीजीएसटी अधिकारियों के बार-बार आने जाने से गहमा-गहमी का माहौल बना रहा।

जमा कराया तब 5 लाख का, निकला तो कीमत बढ़कर 32 करोड़ से ज्यादा हो गई
1965 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को तोलने के लिए छोटी सादड़ी के गणपत आंजणा नामक व्यवसायी ने सोना जमा किया था। तत्कालीन पीएम शास्त्री बड़ी सादड़ी नहीं आए तो सोना कलेक्टर के पास जमा करा दिया गया। इसी दौरान लाल बहादुर शास्त्री की मौत हो गई। सोना चित्तौड़गढ़ कलेक्टर ने जब्त कर लिया। मामले में गांव के गुणवंत नामक व्यक्ति ने गणपत, हीरालाल आदि पर 1969 में केस कर दिया।गुणवंत का कहना था कि सोना शास्त्री जी तक नहीं पहुंचा है तो उसे जनता को लौटा दिया जाए। मामला कोर्ट में चलने के बाद 11 जनवरी 1975 में उदयपुर एसीजेएम कोर्ट ने सीजीएसटी को सोना सुपुर्द करने के आदेश दिए।

1982 में इस सोने को उदयपुर कलेक्ट्रेट के मालखाना में शिफ्ट कर दिया गया। तब से अब तक इस पर केस चल रहा था। उदयपुर एसीजेएम कोर्ट के आदेश के पालन में एडीजे-1 कोर्ट ने जीएसटीसी के पक्ष में फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि यह सोना सीजीएसटी को सौंप दिया जाए। वहीं गणपत लाल आंजना ने अभी भी सोने से जुड़े सभी आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की हुई है, जिस पर भी फैसला आना बाकी है।

14 सितम्बर 2007 में सौंपा जाना था, मगर सीजीएसटी को पता नहीं लगा कि हाईकोर्ट में यह डिस्पोजल हो गया। 2020 में वापस सीजीएसटी के वकील ने उदयपुर न्यायालय में याचिका लगाई थी। फिर अब इसका निस्तारण हुआ। सीजीएसटी ने कागजों में लिखते वक्त गलती कर दी। अब इसे मानवीय भूल माना गया है। पुराने कागजों के आधार पर अधिकारियों ने कोर्ट में दिए दस्तावेजों में सोने की मात्रा कम लिख दी। हालांकि न्यायलय ने सोने की मात्रा का जिक्र न करते हुए समस्त सोने की सुपुर्दगी के आदेश दिए।

ज्यादा सोना निकलने पर विवाद
सोमवार शाम को सीजीएसटी को सौंपने के लिए सोना तोला गया तो दस्तावेज के रिकॉर्ड से ज्यादा निकला। सीजीएसटी के वकील प्रवीण खण्डेलवाल ने साल 1975 में एसीजेएम कोर्ट के आदेश की जानकारी दी। जिसमें पूरा सोना सीजीएसटी को सौंपने के आदेश दिए गए हैं। इस पर न्यायिक अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने सहमति दी। इसके बाद सोने पर लिखे नंबर और कोर्ट के पास मौजूद दस्तावेजों में लिखे नंबरों को मैच करवाया गया। इनमें 3 किलो 200 ग्राम के सोने के एक बिस्किट पर नंबर जी 2560 लिखा हुआ था और दस्तावेजों में एम 2560 लिखा हुआ था। नंबर अलग-अलग होने पर ये सोने के बिस्किट को यहीं पर रखा गया। बाकी सोने को सीजीएसटी के सुपुर्द किया गया।

मालखाने के बाहर सोमवार दोपहर से देर रात तक सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। सीजीएसटी अधिकारियों के बार-बार आने जाने से गहमा-गहमी का माहौल बना रहा। सुरक्षा कारणों के चलते इस सोने को कहां भेजा गया, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

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