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विमंदित पुनर्वास केंद्र में बच्चों की मौत का मामला:जांच कमेटी ने अंतरिम रिपोर्ट की पेश, नारायण सेवा संस्थान में माना अपर्याप्त मेडिकल स्टाफ और पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया

उदयपुर2 महीने पहले
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एमबी अस्पताल में भर्ती बच्चे। - Dainik Bhaskar
एमबी अस्पताल में भर्ती बच्चे।

उदयपुर के विमंदित बाल पुनर्वास केंद्र में तीन बच्चों की मौत के मामले में बनाई गई कमेटी ने अंतरिम रिपोर्ट पेश कर दी है। अंतरिम रिपोर्ट में कमेटी ने माना है। पानी में ईकोलाई बैक्टीरिया की उपलब्धता है। सीवरेज सिस्टम के बोरवेल के करीब होने से पेयजल के दूषित होने की आशंका है। कमेटी ने संस्थान में अपर्याप्त मेडिकल स्टाफ होना भी पाया है। हालांकि अभी फूड सैंपल और विसरा रिपोर्ट आना बाकी है। दरअसल 9 दिन पहले बड़ी स्थित नारायण सेवा संस्थान के विमंदित बाल पुनर्वास केंद्र में हुई 3 बच्चों की मौत और 6 बच्चों के उल्टी-दस्त से ग्रसित होने का मामला सामने आया। कहा जा रहा था कि दूषित भोजन के सेवन से सभी बच्चे बीमार हुए। इसके बाद हरकत में आये जिला कलक्टर चेतन देवड़ा के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ दिनेश खराड़ी के संयोजन में एक टीम का गठन हुआ। टीम ने निरीक्षण के 8 दिन बाद जांच अंतरिम रिपोर्ट पेश की है।

कमेटी ने रिपोर्ट में ये लिखा

कमेटी ने अंतरिम रिपोर्ट में लिखा है कि नारायण सेवा के विमंदित पुनर्वास केंद्र में काम में लिए जाने वाले पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मौजूद है। इसके साथ ही सीवरेज सिस्टम और बोरवेल के करीब होने से पानी से संक्रमण की आशंका जताई गई। टीम ने अपर्याप्त मेडिकल स्टाफ के होने की भी बात लिखी हैं। वहीं जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा का कहना है कि टीम ने संस्थान में कई खामियां पाई है, फिलहाल फूड सैंपल और विसरा की रिपोर्ट के बाद ही फाइनल कुछ कहा जा सकेगा। विमंदित बच्चों के साथ किसी भी स्तर की लापरवाही नहीं करने दी जाएगी।

वहीं, टीम द्वारा पेश रिपोर्ट पर नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल का कहना है कि संस्थान में हर महीने आरओ प्लांट की जांच की जाती है। मानक मापदंडों के पालन करते हुए ही पेयजल काम में लिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल के दौरान ज्यादातर मेडिकल स्टाफ के सरकारी सेवा की ओर करने से स्टाफ की कमी हुई हैं। अब नए स्टाफ के आने से यह कमी सुधार ली गई है। अग्रवाल ने कहा कि सीवरेज और बोरवेल के पास-पास होने की बात पर भी अपने स्तर पर जांच करवा रहे है। गुणवत्ता के उचित सुधार पर पूरी फोकस है।

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