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संपत्ति की सूची:ड्राेन से तस्वीरें लेकर नक्शे पर किया खसरा मिलान, अब चार टीमों ने शुरू किया संपत्ति का वेरिफिकेशन

उदयपुर11 दिन पहले
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  • रिसीवर प्रतिनिधि जिला परिषद एसीईओ सुराणा की निगरानी में बन रही संपत्ति की सूची
  • 252 करोड़ का लक्ष्मी विलास होटल फिलहाल सरकार का

प्रशासन ने बुधवार को सीबीआई कोर्ट का आदेश मिलते ही हाेटल लक्ष्मी विलास काे कब्जे में ले लिया। प्रशासनिक टीम देर शाम तक इसकी चल-अचल संपत्ति की गणना में लगी रही। दाेपहर करीब साढ़े 12 बजे कलेक्टर चेतन देवड़ा, नगर निगम आयुक्त कमर चाैधरी, यूआईटी सचिव अरुण हसीजा, गिर्वा एसडीएम सौम्या झा, जिला परिषद एसीईओ शैलेष सुराणा, आरटीडीसी के सुनील माथुर आदि होटल पहुंंचे। परिसर काे

कब्जे में ले संपत्ति सूचीबद्ध करना शुरू किया। संभागीय आयुक्त विकास भाले और अतिरिक्त संभागीय आयुक्त बी.एल. मंत्री भी आए। तीन दिन में पालना रिपोर्ट सीबीआई काेर्ट में पेश करनी है। इसलिए प्रक्रिया की मॉनिटरिंग के लिए कलेक्टर ने आरएएस अधिकारी सुराणा काे रिसीवर प्रतिनिधि नियुक्त किया, जिनकी देखरेख में देर शाम तक हाेटल में कागजी प्रक्रिया चली। कलेक्टर ने पर्यटन मंत्रालय अाैर भारतीय पर्यटन

विकास निगम लिमिटेड काे पत्र लिखा है, क्योंकि सीबीआई कोर्ट ने केंद्रीय उपक्रम से ही होटल संचालन का आदेश भी दिया है। कोर्ट : क्लोजर रिपोर्ट के तथ्य मानने लायक नहीं : सीबीआई कोर्ट ने 18 अगस्त, 2019 को आदेश दिया कि जिन तथ्यों पर क्लोजर रिपोर्ट लगाई, वे मानने योग्य नहीं हैं। खुद सीबीआई की जांच से जमीन की कीमत

251 करोड़ साबित होती है। अफसरों ने यह होटल भारत होटल्स को मनमानी रेट पर बेचने की दृढ़ प्रतिज्ञा कर रखी थी और बेच दिया। अग्रिम अनुसंधान की जरूरत है, फाइल लौटाते हैं। डीएसपी स्तर का अफसर जांच कर नतीजा पेश करे।

सत्यापन के लिए आज सुबह से काम शुरू करेंगे दल

हाेटल की चल-अचल संपत्ति का सत्यापन करने के लिए कलेक्टर के निर्देश पर नगर निगम और यूआईटी के दाे-दाे दल बनाए गए हैं। दल में शामिल कर्मचारी गुरुवार सुबह से काम शुरू करेंगे। इससे पहले बुधवार काे राजस्व टीम ने ड्राेन से तस्वीरें लेकर नक्शे पर हाेटल के खसरे का मिलान किया। सीमा ज्ञान के बाद पुराने और नए खसरे के हिसाब से नक्शे पर मिलान किया गया। हाेटल प्रबंधन से चल-अचल संपत्ति का

रजिस्टर ले सत्यापन के लिए यूआईटी सचिव अरुण हसीजा और निगम उपायुक्त अनिल शर्मा ने दाे-दाे दल बनाए हैं। यूआईटी के पहले दल में एक एईएन और दाे जेईएन, दूसरे में एक एईएन और चार जेईएन हैं। निगम के पहले दल में एक राजस्व अधिकारी, दाे राजस्व निरीक्षक अाैर दूसरे में एक एईएन अाैर दाे जेईएन हैं।

कलेक्टर बोले-कोर्ट के आदेश पर हाेटल कब्जे में लिया

सीबीआई काेर्ट के आदेश पर हमने होटल का कब्जा ले लिया है। जिला परिषद एसीईओ शैलेष सुराणा काे प्रभारी अधिकारी नियुक्त कर उनकी देखरेख में चल-अचल संपत्ति की सूची बना रहे हैं। काेर्ट ने केंद्र सरकार के उपक्रम से हाेटल संचालित करने का आदेश भी दिया है, जिसके लिए भी हमने पर्यटन मंत्रालय काे पत्र लिखा है। चेतन देवड़ा, कलेक्टर, उदयपुर

राजनेता हमेशा चुप रहे, देर से सही, लेकिन जनभावना जीती

{अंबालाल नायक : इसे जन भावना की जीत बताया है। नायक ने बताया कि औने-पौने दाम पर हाेटल निजी हाथाें में साैंप दी गई थी। राजनेता हमेशा चुप रहे, लेकिन अाज सीबीआई काेर्ट के अादेश से इस बात पर मुहर लग गई कि हाेटल का जाे विनिवेश हुअा था वह गलत था। देर से सही, लेकिन अाज उदयपुर की जनभावना की जीत हुई है। {केके शर्मा : मजदूर कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केके शर्मा ने भी इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा है कि एनडीए सरकार के समय कौड़ियों में यह हाेटल बेच दिया गया। हाेटल की कीमत इतनी कम अांकी गई थी कि कल्पना भी नहीं थी।

भ्रष्टाचार मान चुकी सीबीआई पांच साल बाद पलट गई, जज का ऑब्जेक्शन

विनिवेश मंत्रालय के सचिव बैजल ने लैजार्ड प्रालि के एमडी आशीष गुहा, वैल्यूअर कांतिलाल करमसे, भारत होटल्स के प्रतिनिधि व अन्य अफसरों ने अापराधिक षड्यंत्र कर सरकार को 143.48 करोड़ की सदोष हानि व भारत होटल्स को सदोष लाभ पहुंचाया है।

वैल्यूअर ने होटल को रेड जोन में बताया व हाईटेंशन लाइन के कारण प्रॉपर्टी की कीमत नहीं होना बताकर 2001 में जमीन की डीएलसी रेट 45 रुपए वर्ग फीट आंकी। जबकि उस वक्त डीएलसी रेट 500 से 1000 रुपए वर्ग फीट थी। स्विमिंग पूल, बिल्डिंग आदि की कीमत 3.67 करोड़ से ज्यादा थी। बेचने से पहले ही रिनोवेशन पर 1.50 करोड़ खर्च हुए। अफसरों ने नहीं देखा।

आईटीडीसी का अधिकृत वैल्यूअर मै. एपी सक्सेना एंड एसोसिएट्स था। डिपार्टमेंट ने उसे सलेक्ट भी किया था, परंतु साजिश के तहत उसे हटा कर कांति करमसे को लाया गया था।

नीलामी में 15 में से 3 पार्टियां डिसक्वालिफाई हुई, 6 का विड्राल हुआ। बाकी में से 5 ने पैसा समय पर जमा नहीं किया, सिर्फ भारत होटल्स ने बोली लगाई। रिजर्व प्राइस 6.12 करोड़ रखी और 7.50 करोड़ में होटल बिक गया।

2019- क्लोजर रिपोर्ट में कहा

उस वक्त 500 से 1000 रुपए वर्ग फीट की डीएलसी रेट में काफी फर्क था, इसलिए वैल्यूअर ने रेट 45 रुपए वर्ग फीट मानी। क्योंकि जमीन रेड जोन की थी, 500 मीटर झील किनारे थी और हाईटेंशन लाइन भी थी। वहां कोई निर्माण नहीं किया जा सकता था, इसलिए कोई खरीदार भी नहीं था।

वैल्यूअर की रिपोर्ट इंटर मिनिस्ट्रीयल ग्रुप ने रिकमंड की थी, जिसमें विनिवेश, शहरी विकास, आईटीडीसी व फाइनेंशियल एडवाइजर भी थे। इसे कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरी ऑन डिस-इन्वेस्टमेंट कैबिनेट कमेटी ने मंजूरी दे दी थी। जमीन वैल्यूएशन डीसीएफ, बैलेंस शीट, ट्रांजेक्शन मल्टीपल व असेस वैल्यूएशन मैथड से होता है। मैथड कमिशन तय नहीं कर पाया था। वैल्यूअर व भारत होटल्स के बीच किसी कनेक्शन के सबूत भी नहीं मिले। पूरे प्रोसेस में भारत होटल्स लिमिटेड की भूमिका साबित नहीं हो रही थी। इस तरह होटल को अापराधिक साजिश के तहत कम रेट पर बेचने के ठोस सबूत नहीं हैं। किसी की गलत मंशा नहीं थी, इसलिए क्लोजर रिपोर्ट लगा बंद कर रहे हैं।

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