आजादी पूर्व मेवाड़ रियासत में बना देश का पहला संविधान:महाराणा भूपाल के निर्देश पर केएम मुंशी ने तैयार किया था, संविधान में थे 10 चैप्टर व 24 अनुच्छेद

उदयपुर14 दिन पहले
उदयपुर के पूर्व महाराणा भूपालसिंह ने देश के संविधान बनने के 4 साल पहले ही मेवाड़ रियासत का अपना एक संविधान बना लिया था। जिसमें 10 चैप्टर और 24 अनुच्छेद थे।

उदयपुर के पूर्व महाराणा भूपालसिंह ने देश के संविधान बनने के 4 साल पहले ही मेवाड़ रियासत का अपना एक संविधान बना लिया था। जिसमें 10 चैप्टर और 24 अनुच्छेद थे। मेवाड गवर्नमेंट के इस संविधान में नागरिकों के लिए मूलभूत अधिकार, पब्लिक सर्विस कमीशन, शिक्षा व्यवस्था, हाईकोर्ट बैंच से लेकर विधानसभा की व्यवस्था थी। विधानसभा में 31 सदस्य थे, जिसमें भील और पिछड़े वर्ग की 10 सीट रिजर्व थींं। 3 सीट मुस्लिम और 2 सीट मजदूर और महिला के लिए थी। हाईकोर्ट और प्रशासनिक स्तर पर हिंदी और देवनागरी लिपि को मान्यता थी।

राजस्थान के एकीकरण के दौरान देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ मेवाड़ महराणा भूपालसिंह।
राजस्थान के एकीकरण के दौरान देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ मेवाड़ महराणा भूपालसिंह।

जैसे आज राष्ट्रपति को, वैसे संविधान में भगवान एकलिंग को थी शक्तियां
देश में जैसे आज राष्ट्रपति को संविधान में विशेष शक्तियां प्राप्त हैं। ऐसे ही अनुच्छेद-2 में भगवान एकलिंगजी को मेवाड़ के महाराजा और सर्वेसर्वा माना गया, जबकि राज परिवार के महाराणा को आज के प्रधानमंत्री की तरह एकलिंगजी का प्रतिनिधि या दीवान माना गया। अनुच्छेद-3 में महाराणा की ​शक्तियों का वर्णन था। अनुच्छेद-5 के तहत शिक्षा के लिए गरीब, अनाथ और पिछड़े वर्ग के बच्चों की शिक्षा, भोजन व आवास की नि:शुल्क व्यवस्था का प्रावधान था।

देश में जैसे आज राष्ट्रपति को संविधान में विशेष शक्तियां प्राप्त हैं। ऐसे ही अनुच्छेद-2 में भगवान एकलिंगजी को मेवाड़ के महाराजा और सर्वेसर्वा माना गया,
देश में जैसे आज राष्ट्रपति को संविधान में विशेष शक्तियां प्राप्त हैं। ऐसे ही अनुच्छेद-2 में भगवान एकलिंगजी को मेवाड़ के महाराजा और सर्वेसर्वा माना गया,

केएम मुंशी ने तैयार किया था मेवाड़ का संविधान
उस वक्त मेवाड़ ​रियासत में संवैधानिक सलाहकार रहे के.एम. मुंशी ने मेवाड़ का संविधान तैयार किया था। मुंशी बाद में देश की डॉ. भीमराव अम्बेडकर की संविधान निर्माण समिति के सदस्य भी बने। 23 मई 1947 को मेवाड़ राज्य का संविधान बनाया गया, जिसे 5 जून 1947 को महाराणा प्रताप 407वीं जयंति पर लागू किया। साल 1956 में राजस्थान की एकीकरण की प्रक्रिया होने तक मेवाड़ में यह संविधान करीब 10 साल तक लागू रहा।

उस वक्त मेवाड़ रियासत में संवैधानिक सलाहकार रहे के.एम. मुंशी ने मेवाड़ का संविधान तैयार किया था। मुंशी बाद में देश की डॉ. भीमराव अम्बेडकर की संविधान निर्माण समिति के सदस्य भी बने।
उस वक्त मेवाड़ रियासत में संवैधानिक सलाहकार रहे के.एम. मुंशी ने मेवाड़ का संविधान तैयार किया था। मुंशी बाद में देश की डॉ. भीमराव अम्बेडकर की संविधान निर्माण समिति के सदस्य भी बने।

अनुच्छेद में विदेशी नीति से लेकर सुरक्षा, पुलिस प्रबंध, सेना व कानून का व​र्णन
मेवाड़ सरकार के संविधान के अनुच्छेद 15 में विदेशी नीति का प्रावधान था। इसके अलावा अनुच्छेद 16 में नियोजन व विकास और अनुच्छेद 17 में आपातकालीन शक्तियों का उल्लेख था। इसी तरह अनुच्छेद-8 में विधायिका गठन, अनुच्छेद-9 में विधान परिषद का गठन और अनुच्छेद 14 में सुरक्षा, पुलिस प्रबंध, सेना और कानून की पालना की जानकारी दी गई।

उदयपुर के पूर्व महाराणा भूपालसिंह ने देश के संविधान बनने के 4 साल पहले ही मेवाड़ रियासत का अपना एक संविधान बना लिया था।
उदयपुर के पूर्व महाराणा भूपालसिंह ने देश के संविधान बनने के 4 साल पहले ही मेवाड़ रियासत का अपना एक संविधान बना लिया था।

मेवाड़ सविंधान के उदघाटन पर महाराणा भूपाल का वो भाषण
देश की आजादी से महज दो माह पूर्व मेवाड़ संविधान के उदघाटन पर महाराणा भूपाल ने कहा था कि मैं सभी देशी राजाओं से अपील कर चुका हूं और आज भी कर रहा हूं कि हमें दिल्ली में एक सुद्रढ़ शक्तिशाली, प्रजातांत्रिक जनकल्याणकारी संविधान आधारित शासन चलाने के लिए सहयोग करना चाहिए। भारत विश्व का एक शक्तिशाली देश बनता है तभी हमारा अस्तित्व रहेगा, यदि भारत शक्तिहीन होकर समाप्त होता है तो हमारे पूर्वजों का महान बलिदान, सनातन धर्म की संस्कृति व राष्ट्र निर्माण में उनके 1300 वर्षों के अतीत का नामोनिशान मिट जाएगा।