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पीने के पानी में घुल रही मार्बल स्लरी:झील संरक्षण समिति सदस्य बोले- इंसानों, पशुओं, पौधों के श्वसन तंत्र को खराब करती है स्लरी, चित्रकूट नगर में भी गलत तरीके से बना था डंपिंग यार्ड

उदयपुर4 महीने पहले
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मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड। - Dainik Bhaskar
मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड।

मदारड़ा में मार्बल स्लरी के मदार तालाब के पानी में घुलने के चलते शहर भर में इसका विरोध हो रहा है। मार्बल स्लरी पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। इसे लेकर अब झील संरक्षण समिति के सदस्य डॉ. अनिल मेहता ने प्रशासन से मांग की है। उन्होंने कहा कि स्लरी जब सूखती है, तब हवा के साथ उड़ती है। इसके माइक्रो पार्टिकल इंसानों, पशुओं, पौधों सभी के श्वसन को बाधित करते हैं। डॉ. मेहता ने बताया कि स्लरी काफी नुकसानदायक होती है और इसका स्थायी समाधान होना चाहिए।

डॉ. मेहता बताते हैं कि यह पार्टिकल जल शिराओं (वाटर वेन्स) को क्लोग भी कर सकते हैं। यानी भूजल पुनर्भरण को बाधित और भूजल में जाकर उसकी गुणवत्ता का सत्यानाश करते हैं। साथ ही सबसे खतरनाक बात यह कि यह स्लरी केवल मार्बल और ग्रेनाइट की डस्ट ही नही हैं, इन पत्थरों, ब्लॉक्स को काटने के लिए कई तरीके के केमिकल्स भी काम मे लिए जाते हैं। जो जल स्रोत में जाकर पर्यावरणीय प्रदूषण करते है। इंसानों के लिए इनसे गंभीर खतरा है। क्योंकि इनसे स्किन, लंग्स, आंखों, मस्तिष्क, किडनी को डैमेज पहुंच सकता है।

डॉ. अनिल मेहता।
डॉ. अनिल मेहता।

मेहता ने मांग कि है कि तुरंत प्रभाव से स्थानीय ग्राम वासियों, विशेषज्ञों, प्रदूषण नियंत्रण मंडल , जल संसाधन विभाग के दल को पूरी जांच कर इस स्लरी प्रवाह को रोकना चाहिए। साथ ही बड़ी, मदार से लेकर उदय सागर तक के जल ग्रहण क्षेत्र, आयड़ बनास के जल ग्रहण क्षेत्र को बचाते हुए स्लरी का समाधान करना चाहिए।

चित्रकूट नगर में भी गलत बना था डंपिंग यार्ड

डॉ. मेहता ने बताया कि इससे पहले स्लरी डंपिंग यार्ड चित्रकूट नगर की पहाड़ियों में शहर के ऊपर बनाया गया। मूलतः मास्टर प्लान में यह क्षेत्र जलाशय निर्माण के लिए प्रस्तावित थी। लेकिन बाद में मार्बल प्रोसेसर्स को लीज पर दे गई। जहां बेतरतीब पत्थर के बांध बनाकर स्लरी भरी गई । कुल पांच स्लरी के तालाब बन गए। जल संसाधन विभाग ने खुद माना था कि ये बांध तकनीकी रूप से गलत है। अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार के फैसले के तहत 2 मीटर से ऊंची बांध की दीवारें बनाना गलत था, फिर भी बना दी गई। ये बांध कभी भी ढह सकते हैं। डॉ. मेहता ने बताया कि इन बांध के नीचे खेलगांव और आगे पूरी बस्ती है। यह क्षेत्र रूप सागर और आयड़ का जल प्रवाह क्षेत्र है। जब यहां जगह पूरी तरह भर गई तो मदारड़ा में नया डंपिंग यार्ड बनाया गया।

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