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खगोल-विज्ञान:दो जून से कर्क में मंगल : ज्योतिषविद् बोले- मौसम में भारी बदलाव, स्काई मेट की भी यही राय

उदयपुर23 दिन पहले
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  • ग्रहों की चाल दे रही ऋतु परिवर्तन के संकेत, मौसम का पूर्वानुमान भी यही कह रहा

अगले माह ग्रहों की दृष्टि से महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। वजह यह है कि मंगल 2 जून से मिथुन राशि छोड़कर 48 दिन से अधिक समय के लिए कर्क में गोचर करेंगे। चूंकि कर्क के स्वामी चन्द्रमा जल तत्व प्रधान हैं, ऐसे में मानसून के रूप में महत्वपूर्ण प्राकृतिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

इससे पहले शनिवार को ही मौसम को लेकर बड़े संकेत मिले हैं। इसके अनुसार 30 मई के आसपास मानसून से पहले की स्थितियां बन रही हैं और मानसून अगले 24 घंटे में केरल पहुंच सकता है। सुविवि में संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. नीरज शर्मा ने बताया कि मंगल 2 जून को सुबह 6:50 बजे कर्क में प्रवेश करेंगे, जहां 20 जुलाई शाम 5:53 बजे तक रहेंगे। मंगल के कर्क राशि में इस परिभ्रमण काल के दौरान अन्य ग्रहों से दृष्टि संबंध के चलते अलग-अलग परिस्थितियां दिखाई देंगी।

चन्द्र-मंगल की युति से लक्ष्मी योग भी बनेगा। मंगल के कर्क में प्रवेश के बाद मिथुन राशि में बुध और शुक्र अकेले रह जाएंगे। इसका पूर्ण शुभ प्रभाव सबको मिलेगा। इधर शनिदेव मकर राशि में 23 मई से वक्री हैं, जो कर्क राशि में मंगल के साथ समसप्तक योग बनाएंगे। शनि-मंगल की यह स्थिति संभलकर रहने और पूरी सावधानी बरतने का संकेत करती है। क्योंकि शनि न्याय और प्रजा के कारक हैं। ज्योतिषविद् बताते हैं- 2 जून की रात 2 बजकर 12 मिनट पर बुध देव वक्री (उल्टी चाल) होकर वृष राशि में प्रवेश करेंगे। फिर 23 जून दोपहर 3 बजकर 34 मिनट तक मार्गी (सीधी गति में) रहेंगे।

इसके बाद शुक्र को सूर्य का साथ मिलेगा। सूर्य 15 जून सुबह 5 बजकर 59 मिनट पर मिथुन राशि में प्रवेश कर 22 जून तक शुक्र के साथ युति योग बनाएंगे। इसी महीने 20 जून की रात 8:36 बजे कुंभ राशि में गुरु वक्री होंगे, जो 18 अक्टूबर को 11 बजे मार्गी होंगे। देव गुरु बृहस्पति पूरे साल कुंभ राशि में ही गोचर करेंगे।

ऐसे समझें चंद्रमा-मंगल की युति से ऋतु पर प्रभाव की मान्यता

राशि चक्र में कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। यह शीत व जलचर राशि है। दूसरी आेर अग्नि तत्व का प्रतीक मंगल उग्र ग्रह है। मंगल का प्रकृति, पर्यावरण, मनुष्यों, प्राणियों आदि पर विशेष प्रभाव रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से इनकी युति प्राकृतिक परिवर्तनों का संकेत देती है। अनुमान यह भी है कि दक्षिण पश्चिम से जुड़े राज्यों में बारिश की स्थिति आरंभ होगी।

क्योंकि मंगल का चंद्रमा की राशि में परिभ्रमण रहेगा। इस दृष्टि से दक्षिण पश्चिम से जुड़े राज्यों में जून से जुलाई माह में मानसून प्रबल रहने के आसार हैं। वैज्ञानिक आधार पर स्काई मेट ने भी कहा है कि जून के पहले 10 दिनों के लिए दक्षिण प्रायद्वीप और पश्चिमी तट के साथ मानसून की शुरुआत का चरण आशाजनक लग रहा है। रफ्तार से बढ़ रहा मानसून अगले 24 घंटे में केरल तक पहुंच जाएगा।

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