परिंदों का प्रवास:परदेसी परिंदों की मेवाड़ सैर; बर्ड विलेज मेनार समेत प्रमुख जलाशयों पर अभी इन्हीं की चहक

उदयपुरएक महीने पहले
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राजस्थान के उदयपुर शहर से 45 किलोमीटर दूर बर्ड विलेज यानी परिंदों का गांव कहे जाने वाला मेनार तालाब इन दिनों तीन हजार किलोमीटर दूरी का फासला तय करके आए प्रवासी पक्षियों से गुलजार है। सर्दियों में यहां चीन, मंगोलिया, साइबेरिया और सेंट्रल एशिया से लेकर यूरोप तक के पक्षियों की प्रजाति पहुंच चुकी हैं।

सर्दियों की दस्तक के साथ ही मेवाड़ अंचल के जलाशयों में स्थानीय व प्रवासी परिंदों की जलक्रीड़ाएं शुरू हो चुकी हैं। एक तरफ शहर की सभी प्रमुख झीलों में जहां कम संख्या में प्रवासी पक्षी दिखाई दे रहे हैं, वहीं बर्ड विलेज मेनार और आसपास के अन्य जलाशयों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी डेरा डाले हुए हैं।

पक्षी विशेषज्ञ विनय दवे बताते हैं कि इन दिनों जलाशयों में लगभग सभी प्रजातियों के प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं। आरंभिक दौर में इनकी संख्या भले ही कम हो लेकिन जैसे-जैसे सर्दी का प्रभाव बढ़ेगा, वैसे-वैसे इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी होती जाएगी। वर्तमान में मेनार में सर्वाधिक संख्या में फ्लेमिंगो व कॉमन क्रेन हैं। प्रवासी पक्षी शॉवलर्स, पिनटेल, रडी शेलडक, गडवाल, कॉमन पोचार्ड, टफ्टेड पोचार्ड, यूरेशियन विजन, ब्लैक टेल्ड गॉडविट,रेडशंक, ग्रीन शंक, विस्कर्ड टर्न, ग्रे लेग गूज, मार्श हैरियर, कॉमन टील आदि की जल क्रीड़ाएं देखी जा रही हैं। बड़े आकार के सुंदर पक्षी पेलिकन भी पहुंच गए हैं। यूरोप, रशिया, तुर्कमेनिस्तान व हिमालय पार से आने वाले प्रवासी पक्षियों के आगमन के साथ ही बर्ड वॉचर्स का भी जलाशयों तक पहुंचना शुरू हो गया है।

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