ब्लास्ट से 70KM दूर दोबारा मिले 27 पैकेट विस्फोटक:5 जगहों पर मिली 500 जिलेटिन की छड़ें, 5 एजेंसी के 50 अधिकारी तैनात

उदयपुर3 महीने पहले
एनआईए, एनएसजी, सेंट्रल आईबी और एटीएस समेत एजेंसियों के टीम के आने बाद भी अब तक आरोपियों के बारे में कोई खास सुराग नहीं मिल सके है। पुलिस अब तक 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है, लेकिन किसी से भी कोई लीड नहीं मिल सकी है।

उदयपुर में ओढ़ा रेलवे ब्रिज पर ब्लास्ट में बड़ी साजिश की आशंका और गहरी हो गई है। ब्लास्ट के चौथे दिन लगातार दूसरी बार 70किमी दूर भारी मात्रा में जिलेटिन की छड़ें मिली हैं। मंगलवार को डूंगरपुर जिले के गडा नाथजी के पास सोम नदी पर बने भबराना पुल के नीचे 186 किलो जिलेटिन की छड़ें मिली थी। अब बुधवार को दोबारा डूंगरपुर जिले के आसपुर में भबराना पुल के पास 540 जिलेटिन की छड़ें मिली है। जानकारी के अनुसार बुधवार सवेरे भबराना पुल के पास कुछ महिलाओं ने बताया कि झाड़ियों में कुछ पैकेट पड़े हैं। सूचना के बाद डीएसपी कमल कुमार व सीआई सवाई सिंह सोढ़ा मौके पर पहुंचे। साथ ही डूंगरपुर की डीएसटी भी पहुंचे। जांच के दौरान गडा नाथजी के पास सोम नदी पर बने भबराना पुल के समीप ही झाड़ियों में 5 अलग-अलग जगहों पर 27 पैकेट मिले हैं। में भरी थी।

आसपुर पुलिस ने इन्हें जब्त कर लिया है। इधर, बुधवार दोपहर करीब एक बजे गुजरात से आईबी की टीम भी मौके पर पहुंच गई और जांच शुरू की है।

100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ

उदयपुर में ओड़ा रेलवे ब्रिज पर ब्लास्ट मामले में चौथे दिन भी पुलिस के हाथ खाली है। एनआईए, एनएसजी, सेंट्रल आईबी और एटीएस समेत एजेंसियों के टीम के आने बाद भी अब तक आरोपियों के बारे में कोई खास सुराग नहीं मिल सके है। पुलिस अब तक 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है, लेकिन किसी से भी कोई लीड नहीं मिल सकी है। पुलिस ने सीडीआर की मदद से दो हजार से ज्यादा नंबर्स की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस उन नंबर्स पर ज्यादा फोकस कर रही है, जो शनिवार शाम को उस इलाके में 5 मिनट से ज्यादा एक्टिव रहे थे।

पुलिस का मानना है कि इस धमाका में तीन से ज्यादा लोगों ने मिलकर यह ब्लास्टिंग की फिटिंग की होगी। पिछले 4 दिनों से केवड़ा पुलिस चौकी, पलोदड़ा पुलिस चौकी और जावर माइंस चौकी में लगातार लोगों को बुलाया जा रहा है। इन्हीं बिल्डिंग्स में पुलिस के कई बडे़ अधिकारियों ने भी डेरा डाल रखा है।

इस केस पर सभी एजेंसीज अपने स्तर पर जांच कर रही है। हालांकि अब तक किसी को खास लीड मिली नहीं है।
इस केस पर सभी एजेंसीज अपने स्तर पर जांच कर रही है। हालांकि अब तक किसी को खास लीड मिली नहीं है।

जांच के लिए 50 से ज्यादा अधिकारी तैनात

इस केस में उदयपुर पुलिस के 150 से ज्यादा कर्मचारी पूरी तरह लगे हुए है। इसके साथ अलग-अलग एजेंसी के 50 से ज्यादा अधिकारी लगे हुए है। हालांकि लोकल नेटवर्क नहीं होने की वजह से सभी एजेंसी के अधिकारी भी पूरी तरह पुलिस पर निर्भर है। लगातार वे प्लानिंग के बाद पुलिस टीमों को निर्देश दे रहे है।

राजस्थान एटीएस अधिकारियों ने भी अपनी जांच बढ़ाया है। एटीएस के अधिकारियों ने मौके पर डेमो के रूप में कुछ वायरिंग की फिटिंग कर धमाके की इंटेंसिटी का अनुमान लगाने की कोशिश की है। एटीएस के अधिकारी मान रहे है कि जिस स्तर का ब्लास्ट किया गया है। वो आरोपियों ने करीब 100 से 150 मीटर के दायरे में किया होगा।

टीम के अधिकारियों ने रेलवे ब्रिज से करीब 300 मीटर की दूरी से बस्ती के घरों में जाकर लोगों ने जानकारी जुटाई। लोगों ने पुलिस को बताया शनिवार शाम को ब्लास्ट का कंपन इतना तेज था कि मानो तेज भूकंप आया हो।

दरअसल, इस केस में पुलिस लोकल किसी व्यक्ति के शामिल होने की संभावना पर ज्यादा जोर देते हुए काम कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि माइनिंग क्षेत्र में काम करने वाले किसी प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा डेटोनेटर और वायरिंग की फिटिंग की होगी। उसे धमाके की क्षमता और उसकी मौजूदगी को कितना दूर रखना चाहिए, इस बारे में उसे समझ होगी।

पुलिस ने नए रेलवे ब्रिज के साथ पुराने पूल और उसके पास के नाले में बारीकी से चेकिंग की। हालांकि शराब की टूटी हुई बोटल्स और रेलवे के टूटे सामान के अलावा वहां कुछ नहीं मिला है।

फिलहाल उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे ट्रैक पर उसी तेजी से ट्रेन दौड़ने लगी है। बुधवार को ओड़ा पर बीते 2 दिनों के मुकाबले थोड़ी स्पीड से ट्रेन को निकाली गया।
फिलहाल उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे ट्रैक पर उसी तेजी से ट्रेन दौड़ने लगी है। बुधवार को ओड़ा पर बीते 2 दिनों के मुकाबले थोड़ी स्पीड से ट्रेन को निकाली गया।

हर संदिग्ध से पूछताछ अब तक पुलिस 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। पुलिस किसी भी संदिग्ध को नहीं छोड़ रही है। दो-दो तरीकों से क्रॉस चेक किया जा रहा है। पुलिस ने जावर माइंस में ब्लास्टिंग का काम करने वाले या पहले कर चुके व्यक्ति को नहीं छोड़ना चाहती है। उनसे एक से मिले एक पाइंट को लिखकर अधिकारियों को बताया जा रहा है।

पुलिस को जिस बाइर्क्स गैंग के किसी व्यक्ति को शामिल होने का शक था, मगर उस दिशा में भी पुलिस को कुछ मिला नहीं है। ज्यादातर नाबालिग युवकों ने ट्रैक पर बैठकर अक्सर शराब पार्टी करने की बात स्वीकार की है, मगर किसी संदिग्ध को देखे जाने के बारे में बात नहीं की है।

इस केस में एजेंसीज के इशारे पर इस रेलवे ट्रैक को बनाने वाले कई छोटे ठेकेदार, सुपरवाइजर और मजदूरों की हिस्ट्री को खंगालते हुए पूछताछ हो रही है। पुलिस ने ओड़ा के दो दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों से पूछताछ की है। यही नहीं पुलिस ने ब्लास्ट की सबसे पहले सूचना देने वाले संदीप मीणा और उसके दोस्त से भी लंबी बात की है।