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कृषि उपकरण:एमपीयूएटी : प्रिज्म याेजना में बने कृषि उपकरण देश में दूसरे नंबर पर, आईआईटी जैसे संस्थानाें काे पछाड़ा

उदयपुरएक महीने पहले
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  • देश के 13 सेंटर में से एक उदयपुर सीटीएई में संचालित है नवाचाराें काे प्राेत्साहन देने वाली प्रिज्म याेजना

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की ओर से देश के 13 सेंटराें पर चल रही नवाचाराें काे प्राेत्साहन देने वाली प्रिज्म याेजना में बने यंत्राें के मूल्यांकन में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सीटीएई काे दूसरा स्थान मिला है। काॅलेज के डीन डॉ. अजय कुमार शर्मा बताया कि पिछले साल अलग-अलग कार्य योजनाओं का हाल ही मूल्यांकन किया गया। इसमें एमपीयूएटी ने आईआईटी कानपुर और खड़गपुर जैसे बड़े संस्थानाें काे पीछे छाेड़कर दूसरा स्थान हासिल किया है।

बेल पल्प निष्कासन यंत्रः सीटीएई के शोध विद्यार्थी मादा सांई श्रीनिवास ने बेल फल से पल्प के निष्कासन के यंत्र का निर्माण किया है। इससे मानव श्रम में कमी हो सकती हैं। यह यंत्र बेल फल का पल्प को निकालने के लिए उपयोगी है। इस निष्कासन यंत्र का मूल्य लगभग 2 लाख रुपए हैं और इस यंत्र से 1 घंटे में 10 से 12 बेल फलों का पल्प निकाला जा सकता हैं।

सौर ऊर्जा चालित माइक्रो सिंचाई यंत्र ः अन्वेषक मदन लाल मेहता ने इस यंत्र का निर्माण 2 लाख रुपए में किया। इसमें ना केवल सिंचाई अपितु उर्वरकों को भी खेत में आसानी से छिड़कोौाव किया जा सकता है। इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह लाया ले जाया जा सकता है। इस प्रकार दूरस्थ इलाकों में सौर ऊर्जा चालित माइक्रो सिंचाई यंत्र (बूंद-बूंद सिंचाई) अाैर उर्वरकों का उचित प्रयोग किया जा सकता हैं।

मिर्ची के डंठल तोड़ने वाली मशीन ः शोध छात्र श्रीनिवास गिरिजल ने मिर्ची के ऊपरी डंठल को तोड़ने के लिए यंत्र को विकसित किया। यंत्र से 50 किलो मिर्ची का ऊपरी हिस्सा 1 घंटे में आसानी से पृथक किया जा सकता है। इससे मिर्च पाउडर को बनाने के लिए समय की बचत होती है।

क्या है प्रिज्म परियोजना -अधिष्ठाता डॉ. शर्मा ने बताया कि किसी भी भारतीय नागरिक काे इस परियोजना में अपने मौलिक नवाचार को प्रोटोटाइप में बदलने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। परियोजना में अनुसंधानकर्ता के नवाचार को पहचान कर सीटीएई में स्थित केंद्र के सहयोग से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए 90 प्रतिशत फंड योजना के तहत और केवल 10 प्रतिशत इनोवेटर को देना होता हैं। सीटीएई केंद्र ने 50 से अधिक नवाचरों को 1.5 करोड़ से अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करने में अन्वेषकों की सहायता की है।

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