राजस्थान में मनाली का एहसास:उदयपुर से 25Km दूर पहाड़ों पर बिछी हरियाली की चादर और बहने लगे झरने; बेहद कम लोग जानते हैं इस खूबसूरत जगह के बारे में

उदयपुर4 महीने पहलेलेखक: स्मित पालीवाल
अरावली पर्वत श्रृंखला के बीच बना अनोखा झरना।

उदयपुर से 25 किलोमीटर दूर रायता गांव बारिश के बाद राजस्थान का मनाली बन गया है। छोटे-छोटे रास्तों और पहाड़ चढ़कर यहां की खूबसूरती को भास्कर ने अपने कैमरे में कैद किया। जो आज भी आम लोगों की नजरों से दूर है। आसपास के कुछ ही लोग इस जगह के बारे में जानते हैं। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद यहां पहाड़ पूरी तरह हरियाली से ढक गए हैं। साथ ही प्राकृतिक झरने बहने लगे हैं।

सावन में हरा भरा हुआ झीलों का शहर उदयपुर।
सावन में हरा भरा हुआ झीलों का शहर उदयपुर।

मानसून के दौरान झीलों का शहर उदयपुर और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाता है। शहर से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर अरावली पर्वत श्रंखला में मानसून की बारिश के बाद प्राकृतिक झरने बहने लगते हैं। जिससे उदयपुर की खूबसूरत वादियां मनाली का एहसास कराती है।

उदयपुर में गिरता 25 फीट ऊंचा झरना।
उदयपुर में गिरता 25 फीट ऊंचा झरना।

आम जनता की नजरों से दूर
मानसून में हरियाली की चादर ओढ़े रायता गांव की पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक झरना बारिश के बाद बहना शुरू हो गया है। इसके बाद प्राकृतिक सौंदर्य के आनंद लेने के लिए उदयपुर के साथ ही आसपास के जिलों के कुछ लोग भी पिकनिक मनाने यहां पहुंचने लगे हैं। हालांकि अब भी इस जगह के बारे में बहुत लोग नहीं जानते हैं। जिसकी वजह से चुनिंदा लोग ही यहां तक पहुंच पाते हैं। यही कारण है कि खूबसूरत होने के साथ ही यह जगह आज भी मनमोहक और आकर्षक बनी हुई है।

मानसून की दस्तक के साथ ही पहाड़ों ने ओढ़ी हरियाली की चादर।
मानसून की दस्तक के साथ ही पहाड़ों ने ओढ़ी हरियाली की चादर।

अरावली ने की कोरोना से रक्षा
उदयपुर से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर आदिवासी अंचल की शुरुआत हो जाती है। यहां मूल रूप से आदिवासी समाज के लोग रहते हैं। यह लोग घने जंगलों में आज भी प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर खेती और मवेशियों का पालन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। यही कारण रहा कि कोरोना संक्रमण भी यहां नहीं फैल पाया। हालांकि ग्रामीण अंचल के कुछ लोग जो बाहरी इलाकों में रह रहे थे, वह संक्रमित हो कर लॉकडाउन के दौरान यहां लौटे थे, लेकिन प्रकृति के बीच रहकर वह भी कुछ ही दिनों में दुरुस्त हो गए। इसके बाद से ही ग्रामीण कोरोना को लेकर पहले के मुकाबले और अधिक सजग और सावधानी बरतने लगे हैं।

उदयपुर से 25 किलोमीटर दूर रायता की पहाड़ियों में बहता झरना।
उदयपुर से 25 किलोमीटर दूर रायता की पहाड़ियों में बहता झरना।

खूबसूरती के साथ बुझाता है शहरवासियों की प्यास
उदयपुर में अरावली की गोद में बने खूबसूरत झरने का पानी कालिदास फीडर से नांदेश्वर चैनल के माध्यम से सीसारमा में होता हुआ पिछोला झील में मिलता है। जो पिछोला झील के भर जाने के बाद स्वरूप सागर, फतेहसागर और आयड़ नदी से होता हुआ उदयसागर में जाता है। इस बीच यह पानी न सिर्फ उदयपुर की खूबसूरती में चार चांद लगाता है, बल्कि शहरवासियों की प्यास भी बुझाता है। हालांकि इस बार मानसून की बेरुखी से पानी की आवक काफी कम है। इस वजह से काफी कम मात्रा में पानी नांदेश्वर चैनल और सीसारमा के माध्यम से आगे जा रहा है।

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच पशुपालन करते ग्रामीण।
प्राकृतिक सौंदर्य के बीच पशुपालन करते ग्रामीण।

बता दें कि इस बार उदयपुर में औसत से भी कम बारिश हुई है। इसकी वजह से शहर में पानी की आवक पहले के मुकाबले काफी कम रह गई है। इस वजह से शहर की पहचान बन चुकी प्रमुख झीलें भी अब सूखने लगी है। हालांकि भारतीय मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार अगले कुछ दिनों में मेवाड़ समिति राजस्थान में मानसून फिर से सक्रिय होगा। इससे मूसलाधार बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में देखना होगा मानसून की बारिश उदयपुर में कब राहत बरसाती है।

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