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हकीकत में तब्दील:पीएमसीएच में नवजात की गैस्ट्रोचाइसिस की सफल सर्जरी कर दिया नया जीवन

उदयपुरएक महीने पहले
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विश्वस्तरीय सुविधाओं को हकीकत में तब्दील करते हुए भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल काॅलेज एवं हास्पिटल में नवजात बच्ची की गैस्ट्रोचाइसिस जटिल बीमारी की सफल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया। दरअसल चित्तौडगढ निवासी महिला की पीएमसीएच में सिजेरियन डिलेवरी हुई। प्रसव के बाद 2 किलों वजन की नवजात बच्ची पैदा हुई जिसकी आंतें पेट के बाहर निकली पड़ी हुई थी।

ऐसे में नवजात शिशु सर्जन डाॅ.प्रवीण झंवर एवं उनकी टीम नसें बिना समय गवाएं नवजात का आपरेशन किया और जान बचाई। आपरेशन में नवजात की आंतों को पेट में पुन अपनी जगह पर स्थापित किया गया। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ.दिनेश रजवानिया एवं पिडियाट्रिक क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डाॅ.पुनीत जैन एवं उनकी टीम की देख रेख में एक दिन तक बच्ची को वेंटीलेटर पर रखा गया एवं उसका पूरा ख्याल रखा जिसके चलते वह बहुत जल्दी से रिकवर हो सकी। बच्ची अभी पूरी तरह से स्वस्थ्य है और उसको छुट्टी दे दी है।

एवं नवजात शिशु सर्जन डाॅ. प्रवीण झंवर ने बताया कि गैस्ट्रोचाइसिस एक जन्मजात बीमारी है जिसमें भ्रूण के विकास के दौरान बच्चे के पेट की बाहरी त्वचा पूरी तरह से नहीं बनती है। जिससे बच्चे की आंतें पेट के बाहर फैल जाती हैं, जो समय से पहले प्रसव और खराब भ्रूण वृद्धि जैसी जटिलताओं का कारण बन सकती हैं। गैस्ट्रोचाइसिस बीमारी का सर्जरी ही एक मात्र उपचार है और यह अक्सर उसी दिन किया जाना चाहिए जिस दिन बच्चा पैदा होता है।

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