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आग लगेगी तो खोदेंगे कुआं:यूआईटी, नगर निगम, कलेक्ट्रेट जैसे बड़े संस्थानों में फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं

उदयपुरएक महीने पहले
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  • यूआईटी में आग से रिकॉर्ड जलने के बाद

प्यास लगेगी ताे कुआं खाेद लेंगे...। कुछ इसी फार्मूले पर शहर की प्लानिंग करने वाले बड़े संस्थान चल रहे हैं कि... आग लगेगी ताे कुआं खाेद लेंगे। गुरुवार काे गुरुवार शाम यूआईटी के रिकॉर्ड शाखा में आग लगने के बाद शुक्रवार काे भास्कर टीम कलेक्ट्रेट, नगर निगम और सुविवि जैसे बड़े संस्थानों में पहुंची ताे कहीं पर भी फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं मिला। सालों पुराने रिकॉर्ड और रोजाना हजारों लाेगाें के आवागमन के बीच कलेक्ट्रेट और नगर निगम ने कुछ जगह सिर्फ अग्निशमन यंत्र टांग रखे हैं।

किसी भी संस्थान में आग की बड़ी घटना हाे जाए ताे आग पर तत्काल काबू पाने के लिए जरूरी कोई व्यवस्था नहीं दिखी। सबसे चौंकाने वाले हालात ताे शहर काे फायर एनओसी देने वाली नगर निगम में मिले।

अंग्रेजों के जमाने की दाे मंजिला बिल्डिंग में कभी किसी अधिकारी ने फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने की सोची ही नहीं। हालात यह है कि पूरे शहर काे फायर एनओसी देने वाली आपदा प्रबंधन शाखा के पास ही एनओसी नहीं है।

शहर की बड़ी बिल्डिंगों सहित प्राइवेट संस्थानों काे फायर फाइटिंग सिस्टम के लिए नोटिस देने वाले निगम ने अपनी बिल्डिंग में सालभर पहले अग्नि शमन यंत्र टांगे थे, लेकिन कुछ दिन से वह भी रिफिल के नाम पर अशोक नगर स्थित अग्निशमन केेंद्र पर रखे हैं।

कलेक्ट्रेट के बाद आम जनता का सबसे ज्यादा आना-जाना यूआईटी और निगम में ही रहता है। निगम और यूआईटी की अधिकांश शाखाओं में रिकॉर्ड भी रखे हुए हैं उसके बावजूद आग लगने पर तत्काल काबू पाने की व्यवस्था नहीं है।

इधर, यूआईटी ओएसडी पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने यूआईटी में लगी आग की जांच जांच शुरू कर दी है। शेखावत ने बताया कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, वहां काम करने वाले कर्मचारियाें-अधिकारियाें के बयान लिए हैं।

कलेक्ट्रेट : जहां आईजी, कलेक्टर, एसपी बैठते हैं, वहां की बिल्डिंग भी 15 फायर सिलेंडर के भरोसे

शहर की सबसे महत्वपूर्ण बिल्डिंग कलेक्ट्रेट में कलेक्टर चेतन देवड़ा, आईजी सत्यवीर सिंह, एसपी डॉ. राजीव पचार बैठते हैं और वह बिल्डिंग भी 15 फायर सिलेंडर के भरोसे है। यहां राेजाना करीब करीब दाे हजार लोग अपने दस्तावेज लेने और समस्या लेकर आते-जाते हैं।

जल्द ही चर्चा करेंगे : एडीएम

फायर ब्रिगेड पास ही तैनात रहती हैं। फिर भी इस मामले काे दिखवाते हैं। जल्द ही सभी संस्थाओं में फायर फाइटिंग सिस्टम लगवाने पर चर्चा करेंगे।
-ओपी बुनकर, एडीएम प्रशासन

यूआईटी : तीन आरएएस सहित 100 से ज्यादा अफसर और कर्मचारी, फिर भी गंभीर लापरवाही

तीन आरएएस अधिकारी के रूप में सचिव, ओएसडी और भूमि अवाप्ति अधिकारी यूआईटी में बैठते हैं। दाे एसई, 20 से अधिक इंजीनियर सहित 100 से अधिक कार्मिक मौजूद रहते हैं। विभिन्न कामों के लिए यहां हर समय 200 से 400 लाेगाें का आना-जाना भी लगा रहता है।

अब लगवाएंगे सिस्टम : सचिव
रिकॉर्ड वाली शखा में सबसे पहले वहां फायर फाइटर सिस्टम लगाएंगे। कमरों काे सीसीटीवी कैमरे से भी जाेड़ेंगे। ताकि कोई घटना हाे ताे कैमरे में कैद हाे सके। -अरुण हसीजा, यूआईटी सचिव​​​​​​​

नगर निगम : यहीं से चलती है शहर की सरकार, दिनभर में हजारों लाेग आते हैं दस्तावेज बनवाने

यहां मेयर, डिप्टी मेयर, आयुक्त और उपायुक्त के साथ ही 300 से अधिक कर्मचारी हर समय मौजूद रहते हैं। दिन भर में कई पार्षदों के अलावा हर दिन एक हजार से ज्यादा लाेग अपने दस्तावेज बनवाने और नेताओं से अपने काम करवाने आते हैं।

प्रस्ताव लेंगे : फायर ऑफिसर

​​​​​​​बिल्डिंग में करीब 30 अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था की हुई है। निगम ने फायर फाइटर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव भी जल्द पास करवाकर व्यवस्था करेंगे।
-राकेश व्यास, निगम के फायर ऑफिसर

आरएनटी मेडिकल कॉलेज : यहां राेजाना आते हैं 15 हजार मरीज, लेकिन एनओसी ही नहीं

आरएनटी में बाल चिकित्सालय-एमबी और जनाना अस्पताल में दिनभर डाॅक्टर्स, नर्सेस, स्टाफ, भर्ती मरीजों और तीमारदारों सहित अन्य लोगों का करीब 15 हजार का फुटफॉल रहता है। यहां नवजात-नौनिहाल-प्रसूता, कैंसर, हार्ट आदि से पीड़ित गंभीर रोगी हर वक्त रहते हैं।

कमियों को दूर करेंगे : प्रिंसिपल

फायर फाइटिंग सिस्टम लगा है। छोटी-मोटी कमियों के चलते एनओसी नहीं मिली है। अब इन्हें दूर कर निगम की टीम से एनओसी ले लेंगे।
-डॉ. लाखन पोसवाल, प्रिंसिपल, आरएनटी

​​​​​​​यह है नियम​​​​​​​

जहां भी लाेग आते-जाते हैं वहां फायर सिस्टम हाे

​​​​​​​आपदा प्रबंधन के अनुसार जिस भी संस्थान या जगह पर लाेगाें की आवाजाही ज्यादा रहती है और जान-माल के नुकसान की संभावना ज्यादा रहती हैं, वहां फायर फाइटिंग सिस्टम हाेना ही चाहिए। फिर चाहे वाे एक मंजिला भवन हाे या हाईराइज। 9 मीटर से ऊंचे व्यवसायिक भवन और 15 मीटर से ऊंचे आवासीय भवानों में हर हाल में फायर फाइटर सिस्टम हाेेना ही चाहिए।

एक साल में 400 काे नाेटिस

​​​​​​​निगम की आपदा प्रबंधन शाखा एक साल में 400 लाेगाें काे फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं हाेने पर नोटिस दे चुकी है। इसके चलते कुछ बड़े भवन और डिपार्टमेंटल स्टाेर सीज भी किए जा चुके हैं। शहरी क्षेत्र में निगम ने फाइटर सिस्टम वाले करीब 300 भवनों काे एनओसी जारी कर रखी हैं।​​​​​​​

...और दीया तले अंधेरा निगम के आपदा प्रबंधन ने पिछले साल 30 अग्निशमन यंत्र सभी शाखाओं के कमरों के बाहर लगाए थे। दिसंबर 2020 में इनको रिफिलिंग के लिए भेजा गया, लेकिन तभी से अग्निशमन केंद्र पर पड़े हैं। कोई लाकर लगाने की जहमत भी नहीं उठा रहा है।

यह हालात तब...एमबी अस्पताल में 2 साल पहले लग चुकी भीषण आग​​​​​​​

दो साल पूर्व एमबी अस्पताल के कैंसर विभाग में शॉर्ट-सर्किट से आग लग गई थी। रिकॉर्ड रूम में रखे दस्तावेज जलकर राख हो गए थे। रेजिडेंट, कैंसर वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों और नर्सिंग स्टाफ को खिड़कियां तोड़कर जैसे-तैसे बाहर निकाला गया था। अन्य वार्डों में भर्ती 50 से ज्यादा मरीजों को इधर-उधर शिफ्ट किया था।

मौके पर पहुंची 10 से ज्यादा दमकलों ने दो घंटे में आग पर काबू पाया। इसके बाद से कॉलेज प्रशासन फायर फाइटिंग सिस्टम को दुरुस्त रखने के लिए एक निजी एजेंसी को 8-9 लाख रुपए सालाना भुगतान कर रही है। इसके बावजूद फायर फाइटिंग सिस्टम दुरुस्त नहीं है। हालही में निगम की अग्निशमन शाखा ने इसे एनओसी देने से मना कर दिया।

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