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आदेश दिए:केंद्र के अफसरों को नहीं, प्रशासन आज कोर्ट को ही लौटाएगा 57 किलो सोना

उदयपुर11 दिन पहले
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  • पूर्व पीएम शास्त्री को तौलने 56 साल पहले जुटाया था 27 करोड़ का सोना

जिला प्रशासन देश के दूसरे प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री के तुलादान का 56.863 किलाे साेना केंद्र सरकार को सौंपने पर निर्णय नहीं कर पाया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक 27 करोड़ का यह सोना सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) विभाग को सौंपा जाना था, लेकिन अब प्रशासन ने तय कर लिया है कि सोमवार को इसे जिला एवं सेशन न्यायालय को लौटा दिया जाएगा।

प्रशासन का तर्क है कि उसके पास यह सोना जिला एवं सेशन न्यायालय की ओर से ही रखा गया था। सुपुर्दगी के बाद कोर्ट ही इसे लेकर आगे की कार्रवाई करेगा। बता दें, साढ़े 6 माह पहले काेर्ट ने सोना सीजीएसटी काे सौंपने के आदेश दिए थे।

मार्च में सुपुर्दगी की बारी आई तो सामने आया कि काेर्ट के दस्तावेज और कलेक्टर के मालखाना रजिस्टर में साेने की जब्ती के नंबर मेल नहीं खा रहे। इस पर कलेक्टर कार्यालय ने साेना सुपुर्दगी करने से मना कर दिया। कलेक्टर चेतन देवड़ा ने पत्र के जरिए काेर्ट से नंबराें की स्पष्टता करने का आग्रह भी किया था।

कोर्ट-कलेक्ट्रेट के मालखाने में अलग नंबर के कारण ऐन वक्त पर अटकी थी सुपुर्दगी

56 साल पुराने इस मामले का फैसला इसी साल फरवरी में हुआ था। कलेक्टर कार्यालय से सोना सीजीएसटी को इसलिए नहीं सौंपा गया, क्योंकि मामले में कोर्ट का केस नंबर 11/70 है। यानी कोर्ट में यह सोना 1970 में 11वें नंबर पर है। दूसरी ओर कलेक्ट्री मालखाने में यह 38/81 नंबर पर दर्ज है।

यानी यहां 1981 में जमा हुआ। इस पर कलेक्टर चेतन देवड़ा ने सेशन न्यायालय मालखाना डबल लाॅक प्रभारी काे गत 5 मई काे पत्र जारी किया था। इसमें कहा था कि काेषालय के डबल लाॅक में मालखाना प्रविष्टि संख्या 11/70 पर काेई इन्द्राज नहीं हाेने से सोने की सुपुर्दगी संभव नहीं है। कोर्ट से नंबर स्पष्ट करने की आग्रह भी किया गया गया। बता दें, इस सोने से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का तुलादान होना था, लेकिन 1965 में शास्त्री के निधन के कारण यह काम नहीं हो पाया था।

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