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  • On The Pretext Of Asking For Rent Or College Fees, If The New Acquaintance Asks For The Account Number For Fund Transfer, Then Be Careful, Don't Be

जिला परिषद सीईओ के पति से ऑनलाइन फ्रॉड:किराया या कॉलेज फीस मंगवाने के बहाने नया परिचित फंड ट्रांसफर के लिए खाता नंबर मांगे तो हो जाएं सावधान, बन न

उदयपुर12 दिन पहले
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  • मास्टर माइंड के मोहरे चंद रुपयों का लालच देकर करवा रहे ऐसे ट्रांजेक्शन, खाता नंबर बताने पर

जिला परिषद सीईओ डाॅ. मंजू चाैधरी के पति सुरेश कुमार जाखड़ से 16000 रुपए की ऑनलाइन ठगी के मास्टर माइंड अभी भी गिरफ्त से दूर हैं। पुलिस जिन दो आरोपियों को दिल्ली से पकड़ लाई है, वे सिर्फ मोहरे हैं। ये दोनों अपने ही मासूम परिचितों के वे खाते उपलब्ध कराते थे, जिनमें मास्टर माइंड अपने शिकार का पैसा ट्रांसफर करते थे। इन्हें खाता नंबर उपलब्ध कराने के तीन-तीन हजार रुपए मिलते, जबकि 500 रुपए खाता धारक को मिलते।

ठगी का पैसा ऐसे खातों में ट्रांसफर होने के बाद मास्टर माइंड 3500 रुपए इन मोहरों को दे देते और ऊपर की रकम या तो अपने खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लेते या कैश लेन-देन कर लेते। यह सब करने के पीछे मास्टर माइंड का मकसद यह होता है कि जांच हो तो खाते के जरिए पुलिस उन तक पहुंच ही नहीं पाए। फिलहाल जाखड़ से ठगी के आरोपी देसरी कुड़वा (बिहार) निवासी अभिषेक निशांत पुत्र पुत्र अखिलेश कुमार सिंह और बिहार हाल सागरपुर नॉर्थ (दिल्ली) के शिवम कुमार पुत्र अभय सिंह काे भूपालपुरा पुलिस ने अदालत में पेश कर दो दिन रिमांड पर लिया है। पुलिस को इनके जरिए मास्टर माइंड तक पहुंचने की उम्मीद है, क्योंकि एक आरोपी और ठग में रिश्तेदारी सामने आई है।

शिवम ने एक महीने में 25 खाते दिए, सवाल- ठगाें को मिलती कैसे है क्रेडिट कार्ड की जानकारी

पुलिस ने अभिषेक और शिवम कुमार से सख्त पूछताछ की। सामने आया कि शिवम नंबर उपलब्ध कराता था। जिस खाते में जाखड़ के रुपए ट्रांसफर किए गए, वह अभिषेक का है। उसके खाते में ऐसे दाे बार ट्रांजेक्शन हुए हैं। शिवम ने बताया कि फाेन के जरिए बातचीत होती थी। ठग को सिर्फ खाता नंबर की जरूरत होती थी। वह उसे एक खाता नंबर के बदले में 3000 रुपए देता था। जिसका खाता होता था, उसे 500 रुपए दिए जाते थे।

शिवम ने एक महीने में 25 दाेस्ताें और परिचितों के खाते ठगाें काे उपलब्ध कराए हैं। इन सबमें अवैध ट्रांजेक्शन हुए हैं। अभिषेक 12वीं का छात्र है अाैर शिवम फर्स्ट ईयर में पढ़ता है। शिवम ने पुलिस काे कहा कि खाता नंबर लेने के लिए कभी काॅलेज फीस ताे कभी कमरे का किराया घर से अाने का बहाना बनाते थे। खाताधारक को लालच देते कि रुपए खाते में अाने के बाद निकालने पर 500 रुपए देंगे। जाखड़ केस में शिवम ने अभिषेक से कहा था कि भाई किराये के 16000 रुपए भेज रहा है। फंड ट्रांसफर हुआ तो अभिषेक ने बाद 500 रुपए रखकर बाकी राशि शिवम काे दे दी और उसने 3000 रुपए काटकर रुपए ठगों तक पहुंचा दिए। जांच में सामने आया कि ठग शिवम का रिश्तेदार ही है।

भास्कर अलर्ट : बैंक कभी नहीं पूछते ग्राहक की गोपनीय जानकारियां

कोई भी सरकारी और निजी बैंक अपने ग्राहकों से उनके खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारियां फोन कॉल या मैसेज के जरिए नहीं मांगता। समय-समय पर जारी एडवाइजरी में खाताधारकों को अपने फोन नंबर पर मैसेज के जरिए मिलने वाले लिंक या कॉल्स को लेकर अलर्ट किया जाता है। ठग डेबिट या क्रेडिट कार्ड्स, लोन या लुभावनी स्कीम का लालच देकर बैंक ग्राहकों को झांसे में ले लेते हैं।

दो और आरोपी नामजद, पुलिस जुटी पड़ताल में

पुलिस ने दो और आरोपियों को नामजद किया है। इनकी तलाश की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद सामने आएगा ये बदमाश क्रेडिट कार्ड की जानकारियां कहां से लाते हैं। इसमें बैंक कर्मचारी या क्रेडिट कार्ड बनवाने वाले एजेंट भी हाे सकते हैं। पुलिस के लिए यह जानकारी जुटाना इसलिए भी जरूरी है, क्याेंकि ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर ही अपने शिकार को फाेन करते हैं। क्रेडिट कार्ड की थोड़ी बहुत जानकारी बताने पर शिकार विश्वास में आ जाता है और बाकी की गोपनीय जानकारियां भी साझा कर लेता है। जाखड़ से ठगी भी इसी तरह से हुई थी।

यह था मामला : डाॅ. मंजू चाैधरी के पति झुुंझुनूं हाल अंबामाता ओटीसी स्कीम निवासी सुरेश कुमार पुत्र भगवाना राम जाखड़ ने 29 जून काे थाने में रिपाेर्ट दी थी। बताया था कि आरबीएल बैंक से हाल ही क्रेडिट कार्ड बनवाया था। 29 जून काे किसी नंबर से फोन आया। कॉलर ने बताया कि वह आरबीएल बैंक से बोल रहा है और क्रेडिट कार्ड की डिटेल बताई। कॉलर ने कार्ड एक्टिवेट करने के बहाने जाखड़ से उनके नंबर पर आने वाले ओटीपी के बारे में पूछा। परिवादी ने विश्वास में आकर ओटीपी बताया तो उनके क्रेडिट कार्ड से 16160 रुपये नोब्रोकर रेंटपेमेंट्स नाम की वेबसाइट से कटने का मैसेज आया।


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