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शिशु न्यूनेटल एब्सीटिनेंस सिंड्रोम से ग्रसित:अफीम की आदी मां से गर्भ में पहुंचा नशा, जन्म के बाद नहीं मिला तो नवजात को पड़े दौरे, इलाज के बाद दाेनों स्वस्थ

उदयपुरएक महीने पहले
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  • एक लाख में ऐसा एक केस होता है
  • महिला अफीम की आदी थी,प्रसव हुआ तो नवजात को दौरे पड़ने लगे

प्रेग्नेंसी में नशा गर्भस्थ शिशु और खुद मां के लिए कितना घातक हो सकता है, इसका उदाहरण उदयपुर में सामने आया है। महिला अफीम की आदी थी। गर्भावस्था में उसने नशा छोड़ने की दवाइयां लीं, लेकिन इनमें भी नशा था। प्रसव हुआ तो नवजात को दौरे पड़ने लगे।

डॉक्टरों का कहना है कि शिशु न्यूनेटल एब्सीटिनेंस सिंड्रोम से ग्रसित हो गया था। एक लाख में ऐसा एक केस होता है। फिलहाल नवजात और प्रसूता स्वस्थ हैं। केस नीमच निवासी 28 वर्षीय अंजलि (काल्पनिक नाम) का है, जिसे प्रसव के लिए पिछले दिनों जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उसे नशे की लत थी।

गायनेकोलॉजिस्ट डाॅ. शिल्पा गोयल ने बताया कि हाई रिस्क सिजेरियन कामयाब तो रहा, लेकिन दो दिन बाद ही नवजात को शरीर अकड़ने के दौरे पड़ने लगे। जांचों के में वर्टिकल ट्रांसमिशन से नशे की लत लगने की बात सामने आई। गर्भ में रहते प्लेसेंटा के जरिए मां के शरीर से नशा बच्चे तक पहुंच रहा था।

बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनूप पालीवाल का दावा है कि गर्भस्थ शिशु में नशे के वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो 10 हजार में से एक ऐसा मामला सामने आता है। लेकिन ऐसा केस एक लाख में एक होता है। जन्म के बाद मां का दूध नहीं मिलने से नवजात को नशा नहीं मिला और ताण आने लगी। अमूमन ऐसे झटके बालिग उम्र में नशा नहीं मिलने पर आते हैं।

पति भी करता था यही नशा - अंजलि ने बताया कि वह और पति दोनों अफीम के आदी थे। गर्भवती हुई तो इलाज शुरू किया। अफीम छोड़ने की दवाइयां भी दी गईं। इनसे भी मामूली नशा रहता था। उदयपुर में प्रसव हुआ। जन्म के बाद दो दिन तक शिशु को ऊपर का दूध पिलाया तो तकलीफ होने लगी।

नशे के कारण पेन किलर और अन्य दवाएं भी नहीं दिखा पातीं असर : डॉ. मधुबाला चौहान
आरएनटी मेडिकल कॉलेज की गायनेकोलॉजिस्ट और पन्नाधाय जनाना अस्पताल की अधीक्षक डॉ. मधुबाला चौहान बताती हैं कि गर्भवती के खून में जो कुछ एलिमेंट हो, वह वर्टिकल ट्रांसमिशन के जरिए गर्भस्थ शिशु तक पहुंच जाता है।

फिर वह कोई नशीली चीज ही क्यों न हो। ऐसी हाई रिस्क डिलेवरी में ज्यादा ब्लीडिंग के आसार होते हैं। महिला के नशे की आदी होने से पेन किलर और दूसरी दवाइयां भी ज्यादा असरदार नहीं रहती हैं। गर्भ में शिशु का हृदय कमजोर होने और धड़कन रुकने का खतरा रहता है।

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