न्याय अभियान की घोषणा:लोग कोरोना, बेरोजगारी, महंगाई से त्रस्त, भाजपा- कांग्रेस खुद को हिंदू हितैषी साबित करने में व्यस्त

उदयपुरएक महीने पहले
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राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस को आमजन की परेशानियों से कोई वास्ता नहीं है। कोरोना महामारी के बीच लोग महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त है, लेकिन दोनों प्रमुख दल खुद को हिंदू हितैषी साबित करने में व्यस्त हैं। असल में दोनों का एकमात्र लक्ष्य सत्ता ही है।

यह बात मोर्चा के घटक दलों ने मंगलवार को यहां सामाजिक न्याय अभियान की घोषणा के साथ कही। मीडिया से बातचीत में जनता दल (धर्मनिरपेक्ष) के प्रदेशाध्यक्ष अर्जुन देथा ने कहा केंद्र की भाजपा सरकार हो या प्रदेश की कांग्रेस सरकार, सत्ता में आने के बाद दोनों ने जनता से वादाखिलाफी ही की है।

सत्ता बचाने की जोड़-तोड़ में जनहित को नजरअंदाज किया जा रहा है। केंद्र ने किसानों से सलाह लिया बिना 3 कृषि कानून बनाए, फिर विरोध पर घुटने टेकने पड़े। भाकपा (माले) के शंकरलाल चौधरी ने कहा कि कोरोना की आपदा के दौर में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, बिजली आदि वस्तु-सेवाओं में जनता को राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकारों ने बेतहाशा टैक्स लगाकर इन्हें पहले से भी ज्यादा महंगा कर दिया।

मजदूर, किसान, दस्तकार, छोटे व्यापारी और ठेले वाले बर्बाद हो रहे हैं। बंद रहने के बावजूद स्कूल-कॉलेजों ने फीस वसूली की। भाकपा के बीएल छानवाल ने भी जनता की तकलीफोें और भाजपा-कांग्रेस की सोच पर चर्चा की। माकपा के के.आर. सिद्दीकी ने बताया मोर्चे में जनता दल (सेक्युलर), माकपा, भाकपा, भाकपा-माले, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल शामिल हैं, जिन्होंने गत 12 अक्टूबर को जयपुर में इन मुद्दों पर सामाजिक न्याय के प्रदेशव्यापी अभियान की शुरुआत की थी।

बिहार की तरह राज्य में हो जातिगत जनगणना, सरकार केंद्र को भेजे प्रस्ताव

मोर्चा ने सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने और बिहार की तरह जातिगत जनगणना की मांग की है। कहा कि विधानसभा में जाति आधारित जनगणना के लिए प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा जाए। सरकार की गलत कृषि नीतियों के कारण किसानों पर कर्ज चढ़े हैं। इसलिए किसानों के सभी ऋण माफ होने चाहिए। राज्य और केंद्र सरकार ने कर्ज माफ करने के वादे किए थे। केंद्र सरकार से एमएसपी तय करने, निजीकरण की नीति छोड़ने, चारों लेबर कोड बिल रद्द करने, सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्रथा बंद करने की मांग भी की गई।

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