ऊर्जा संरक्षण दिवस आज:प्रदेश में गुजरात-हरियाणा से पेट्रोल-डीजल 13 फीसदी महंगा, बिजली में भी महंगाई का करंट

उदयपुर8 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मंगलवार को है। राजस्थान की बात की जाए तो यहां ऊर्जा के स्रोत पेट्रोल, डीजल और बिजली देश के दूसरे प्रदेशों के मुकाबले बहुत महंगे हैं। सर्वाधिक वैट के कारण प्रदेशवासियों को पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी ज्यादा चुकानी पड़ रही हैं। जबकि पेट्रोल मध्य-प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों की तुलना में प्रदेश में 12 रुपए तक महंगा है। यहां हाल ही वैट कम करने के बाद भी पेट्रोल 107 रुपए प्रति लीटर के आसपास ही है।

पिछले महीने 16 नवंबर को पेट्रोल पर 4 रुपए और डीजल पर 5 रुपए कटौती के बावजूद भी कोई खास राहत नहीं मिली नहीं है। दूसरी ओर राजस्थान के मुकाबले में पंजाब में 20 फीसदी और गुजरात में 40 फीसदी बिजली सस्ती है। औसत 200 यूनिट बिजली उपभोग की बात करें, तो राज्य में प्रति यूनिट 7 रुपए 35 पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। जबकि पंजाब में 5.84, हरियाणा 5.25 और गुजरात में सबसे कम में महज 4.15 रुपए ही चुकाने पड़ रहे हैं।

मध्य-प्रदेश में 6.45 रुपए तक होने के बावजूद प्रदेश की तुलना में बिजली 90 पैसे सस्ती है। इस बीच व्यापारियों का कहना है कि फ्यूल महंगा होने से रोजमर्रा जरूरत की चीजें भी महंगी हो रही हैं। दाल-सब्जियां हों या औजार-उपकरण, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने से इनकी लागत के साथ कीमतें बढ़ रही हैं। जब तक ईंधन के मूल्य पर नियंत्रण नहीं किया जाता, जरूरत के साजो-सामान की महंगाई पर काबू पाने के दावे बेमानी ही साबित होंगे।

पेट्रोलियम एसोसिएशन का दावा- वैट कटौती नाकाफी, 11 फीसदी ही वैट हो तो दोगुना हो सकता है कारोबार

चार सीमाओं से लगने वाले प्रदेश में वैट सर्वाधिक होने के चलते कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनीत बगई का कहना है कि प्रदेश में रोज 30 लाख लीटर पेट्रोल-डीजल की तस्करी हो रही है। प्रदेश के कारोबार का 5 फीसदी हिस्सा मध्य प्रदेश, हरियाणा 30 फीसदी, यूपी-गुजरात 15 फीसदी और सबसे ज्यादा 40 फीसदी बिजनेस पंजाब को मिल रहा है। वैट घटाकर 11 फीसदी तक कर दिया जाए तो पेट्रोल-डीजल के मामले में प्रदेश को 100 फीसदी तक रिकवरी हो सकती है। यानी बिक्री दोगुनी तक पहुंच सकती है। तस्करी की समस्या भी हल हो जाएगा।

प्रदेश पेट्रोल डीजल
उदयपुर (राजस्थान) 107.90 91.47
भोपाल (मध्य-प्रदेश) 107.23 90.87
गंगानगर (राजस्थान) 111.58 94.79
पानीपत (हरियाणा) 95.31 86.52
जालंधर (पंजाब) 94.97 83.75
अहमदाबाद (गुजरात) 95.13 89.12

(पड़ोसी राज्यों में बॉर्डर से सटे पेट्रोल पंप पर बिक्री के अनुसार)

बिजली कंपनियों पर लोन, 2 रु./यूनिट ब्याज दे रहा उपभोक्ता

दरें सबसे ज्यादा होने के साथ ही फिक्स चार्ज सर्वाधिक होने के चलते प्रदेशवासियों पर बिजली का भार अतिरिक्त पड़ रहा है। रिटायर्ड इंजीनियर और एवीवीएनएल के अधीक्षण अभियंता येवंती कुमार बोल्या का कहना है कि बिजली कंपनियों पर बैंक लोन के चलते उपभोक्ताओं को 2 रुपए प्रति यूनिट तो सिर्फ ब्याज का चुका रहे है। क्योंकि विद्युत अधिनियम 2003 एक्ट के तहत बिजली कंपनियों की ओर से दी जानी वाले सब्सिडी की राशि सरकार को अग्रिम तौर पर चुकानी होती है। लेकिन सब्सिडी का पैसा बकाया होने के चलते कंपनी बैंक लोन पड़ता है। जिसकी वजह से सालाना 10 हजार करोड़ तक ब्याज का भार होता है। जिसका भुगतान उपभोक्ता की जेब से होता है। प्रदेश सरकार की गलत नीतियों का ही नतीजा है कि राज्य में बिजली सबसे ज्यादा महंगी है।

सबसे महंगा कंजंप्शन स्लैब राजस्थान में
प्रदेश यूनिट स्लैब दर
राजस्थान 151-300 7.35
पंजाब 101-300 5.84
हरियाणा 151-250 5.25
मध्यप्रदेश 151- 300 6.45
गुजरात 101-250 4.15
(घरेलू उपभोग के आधार पर)

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