पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरोना असर:अगहन लाया देवालयों में अनुष्ठान-मनोरथों का उल्लास, जगदीश मंदिर में छप्पन भोग 30 को

उदयपुर9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • भक्तों को सिर्फ दर्शन की होगी अनुमति, महोत्सव में नहीं हो सकेंगे शामिल

मार्गशीर्ष या अगहन महीने में शहर के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान शुरु हो गए है। श्रीकृष्ण का महीना होने के चलते भगवान को विशेष श्रंगार और भोग लगाया जा रहा है। 30 दिसंबर पूर्णिमा को जगदीश मंदिर में छप्पन भोग का कार्यक्रम होगा। इस बार कोरोना काल के चलते सादगी से मनाया जाएगा।

मंदिर में दर्शन शुरु रहेंगे, लेकिन गाइडलाइन के मुताबिक भक्तों को महोत्सव में शामिल होने की अनुमति नहीं रहेगी। जगदीश मंदिर के पुजारी विनोद ने बताया कि मंदिर के पुजारी और सेवादार भगवान जगदीश का पूजन करेंगे। लेकिन विशेष मनोरथ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नहीं होगी। मंदिरों में पूरे दिन भजन-कीर्तन रहेगा। छप्पन भोग में प्रभु को विविध प्रकार की मिठाइयां, लड्डू सहित कई व्यंजन भोग लगाए जाएंगे। लेकिन कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी वितरण नहीं होगा।

श्रीकृष्ण को प्रिय है मार्गशीर्ष, बाल गोपाल को लगाएं तुलसी-माखन-मिश्री का भोग

अभी अगहन यानी मार्गशीर्ष मास चल रहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में मार्गशीर्ष मास को स्वयं का स्वरूप बताया है। इस माह में बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं। अगहन मास में नदी में स्नान करने का काफी अधिक महत्व है। बालगोपाल की पूजा में कृं कृष्णाय नम: और भगवान विष्णु की पूजा में ऊँ नमो नारायणाय का जाप करें। शिवजी की पूजा में ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। गणेश जी की पूजा अवश्य करें। इस माह में आलस्य छोड़ दें। सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद पूजा-पाठ करें। रोज सुबह ध्यान करने से मन को शांति मिलती है, एकाग्रता बढ़ती है। कामों में ऊर्जा बनी रहती है और सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

शंख पूजा का भी विशेष महत्व
मार्गशीर्ष यानी अगहन माह में शंख की पूजा का भी विशेष महत्व है। जिस प्रकार देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, ठीक उसी तरह शंख का भी पूजा करें। क्रोध से बचना चाहिए। घर में क्लेश न करें। अन्यथा इस माह में किए गए शुभ कामों का पूरा फल नहीं मिल पाता है। माह में अन्न और धन का दान करें।

नियमित नदी में स्नान करने पर होती है अक्षय पुण्य की प्राप्ति
मान्यता है कि द्वापर युग में जब गोपियों ने श्रीहरि को प्राप्त करने के लिए तप किया, तब श्रीकृष्ण ने अगहन महीने में नदी स्नान करने की सलाह दी थी। इसी वजह से अगहन मास में यमुना नदी में काफी लोग स्नान करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि मार्गशीर्ष मास में नियमित रूप से नदी स्नान करने वाले श्रद्धालु को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। गुड़ का दान जरूरतमंद लोगों को करें।

ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का करें जाप
अगर नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो तुलसी की जड़ की मिट्टी को शरीर पर लगाकर भी स्नान कर सकते हैं। स्नान के समय सभी तीर्थों का ध्यान करें। पवित्र नदियों के नामों का जाप करते हुए स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।

खबरें और भी हैं...