पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बुरा वक्त:लॉकडाउन में किसी ने कुआं खोदा, किसी ने पुराने को ही गहराकर जलसंकट दूर किया

उदयपुर6 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • कोटड़ा के आदिवासी बहुल बिलवन पंचायत के तलाब फला और मवला गांव के लोगों की पहल

कोटड़ा. लगातार दूसरे वर्ष भी कोरोना ने हाहाकार मचा रखा है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतना बुरा वक्त भी आएगा। लॉकडाउन में पाबंदियों के चलते सभी घर में बंद होकर अपने दैनिक कार्यों को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में आदिवासी क्षेत्र के लोगों ने इस आपदा को अवसर में बदला। किसी परिवार ने 22 फीट कुआं खोद दिया और खुद के साथ ही दूसरे लोगों का जलसंकट दूर किया। तो किसी ने कुआं गहरा कर पहली फसल ली। कुछ एेसे ही लोगों की कहानी यहां बताई जा रही है।

देशी जुगाड़ से किया अपने मिशन को पूरा
कानिया ने कुआं खोदने के लिए उसके पास मशीनरी, मजदूरी और उपकरण खरीदने का पैसा नहीं था। कानिया ने देशी जुगाड़ से कुआं खोदने के लिए लकड़ी का डोला (डोंगला) बना लिया। कुएं की खोदी हुई मिट्टी इसी डोला मशीन से बाहर निकाली।

कनिया से दूसरे आदिवासी ले रहे प्रेरणा
आसपास गांवों के लोग कानिया के कुएं को देखने आते हैं। देशी जुगाड़ की तकनीक सीख कर जाते हैं। आसपास के गांवों में भी कानिया से प्रेरणा लेकर लोग कुएं खोदना, कुएं पक्के करना, नया खेत निकालना, नए घर बनाना आदि काम कर रहे हैं।

परिवार के 4 सदस्यों ने 4 माह में ही खोद दिया 22 फीट कुआं, पहली बार ली रबी की फसल

लॉकडाउन में श्रमदान का दूसरा उदाहरण मवला गांव का है, जहां एक परिवार ने जीतोड़ मेहनत कर से चार माह में नया कुआं खोद दिया। इस कुएं में आए पानी से पहली रबी की फसल के रूप में दस बोरी गेहूं पैदा किया। देवला-कोटड़ा मार्ग पर स्थित महुला गांव के कानिया व उसके परिवार के सदस्यों ने लॉकडाउन में यह कुआं खोदा। कानिया लॉकडाउन से पहले सुमेरपुर में मजदूरी करता था। पहले लॉकडाउन में जब घर लौटा तो मजदूरी छोड़कर गांव में ही खेती करने का विचार आया।

यह बात उसने पिता लाडुरा, पुत्र राजू, पत्नी रमी को बताई। सभी ने सहमति जताई। इसके बाद कानिया का पूरा परिवार कुआं खोदने में लग गया। चार महीने की कठोर मेहनत, तेज गर्मी में बिना किसी मशीनरी के 22 फीट (स्थानीय भाषा में 15 हाथ) गहरा कुआं खोद डाला। मुश्किलें काफ़ी आई, लेकिन किसी ने हिम्मत नहीं हारी। आखिर सफलता ने कानिया के कदम चूमे। कुएं में पानी आने व डीजल इंजन से पानी निकाल कर पहली फसल लेने से कानिया का पूरा परिवार बहुत खुश है। कुएं के पास ही सब्जियां भी उगाई हैं। कुएं को और गहरा कर रहे हैं।

इस बस्ती में दो हैंडपंप सालों से बंद हैं : ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एक हैंडपंप स्कूल के पास व एक काफी दूर लगा है, लेकिन वे सालों से बंद हैं। कुएं में पानी नहीं था, तब सभी लोग करीब एक किमी दूर दूसरे कुएं से पानी लाते थे। इसके अलावा दूसरा विकल्प नदी के पेटे में वेरी बनाकर वहां से भर रहे थे।

खबरें और भी हैं...