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‘स्केटर गर्ल’:शूटिंग के लिए उदयपुर में बना प्रदेश का पहला स्केट पार्क, गांव के 40 बच्चे 2 साल से कर रहे प्रैक्टिस, 4 नेशनल खेले

उदयपुर12 दिन पहलेलेखक: कैलाश सांखला
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  • इस साल रिलीज हुई फिल्म ‘स्केटर गर्ल’ के लिए मावली के खेमपुर गांव में तैयार किया था पार्क

आपने ऐसी फिल्मों के नाम तो बहुत सुने होंगे, जिसने देश प्रेम का जज्बा जगा दिया या बहुत अच्छा संदेश दिया, लेकिन आज आपको एक ऐसे गांव की कहानी सुना रहे हैं, जिसमें एक फिल्म की शूटिंग हुई और वहां के बच्चों की तकदीर ही बदल गई।

उस गांव का नाम है खेमपुर, जो उदयपुर जिले की मावली तहसील में है। यहां हाल ही में नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित हुई फिल्म ‘स्केटर गर्ल’ की शूटिंग हुई थी। इसके लिए यहां 2018 में स्केट पार्क बनाया गया था। शूटिंग के बाद यह पार्क गांव को ही समर्पित कर दिया गया, ताकि यहां के बच्चे स्केट सीख सकें और देश में अपनी पहचान बना सकें।

इसके लिए एक प्रशिक्षक भी नियुक्ति किया गया, जो समय-समय पर यहां आकर बच्चों को स्केट बोर्ड सिखाते हैं। नतीजा यह निकला कि हाल ही में मोहाली में हुई नेशनल स्पर्धा में यहां के किसानों और मजदूरों के चार बच्चे जोगेंद्रसिंह, भूरालाल भील, शैतान बंजारा और पवन भील ने भाग लिया और फाइनल तक पहुंचे। यह प्रदेश का एकमात्र स्केट पार्क हैं, जहां बाहर से बच्चे स्केट बोर्ड चलाना सीखने आ रहे हैं और इनके गुरु गांव के बच्चे ही हैं।

सभी सुविधा निशुल्क : विनती ने बताया पार्क में आने वाले बच्चों को निशुल्क स्केट बोर्ड सिखाया जाता है। इसके लिए कोच समय-समय पर मार्गदर्शन देने आते हैं। यहां किसान और गरीब मजूदरों के बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं और बाहर से आने वाले बच्चों को सिखा रहे हैं। अब जल्द ही स्केट पार्क में विशेषज्ञ कोच आएंगे और आने वाले बच्चों को तैयार करेंगे। विनती और उनका परिवार द लिविंग ग्रेस फाउंडेशन के माध्यम से पार्क का संचालन करता है।

14500 स्क्वायर फीट का पार्क, अब गांव के बच्चे दूसरों को सिखा रहे हैं

फिल्म निदेशक मंजरी मेकीजानी और निर्माता विनती मेकीजानी और इम्मानुएल पैपस ने 2018 में स्केट पार्क तैयार कराया था। विनती ने बताया कि शूटिंग के लिए इंटरनेशनल मापदंडों के अनुसार 14500 स्क्वायर फीट में ऐसा स्केट पार्क तैयार कराया जो आगे खिलाड़ियों के लिए काम आ सके। शूटिंग खत्म होने के बाद पार्क को खेल प्रतिभाओं के लिए समर्पित कर दिया है। अब यहां कोरोना से पहले नियमित तौर पर कोच लगाकर बच्चों को स्केट बोर्ड सिखाया जा रहा है।

इसके तहत आसपास के गांवों से करीब 40 से 50 बच्चे लगातार आते हैं और अपने सुविधा अनुसार स्केट सीखते हैं। आज यह पार्क उदयपुर और मावली के आसपास के गांवों की प्रतिभाओं को मंच दे रहा है। इस स्केट पार्क में समय-समय पर देश और दुनिया के टूरिस्ट और खिलाड़ी आते हैं और बच्चों को प्रेरित करते हैं। अब वो दिन दूर नहीं है जब यहां के बच्चे स्टेट और नेशनल स्पर्धा में पदक विजेता होंगे।

मुंबई से वीडियो काॅल से लेती हैं फीडबैक-

विनती ने बताया कि वह जब भी अपने काम से मुंबई या बाहर जाती हैं तो बच्चों का फीडबैक फोन और वीडियो कॉल से लेती हैं। वैसे उनका अधिकांश समय स्केट पार्क में बच्चों के साथ ही गुजरता है। उन्हें लगातार प्रेरित करती हैं।

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