उदयपुर में स्ट्रीट डॉग का आतंक:गली मोहल्ले में पर्यटकों को बना चुके हैं शिकार, बावजूद 6 महीने से बंद नसबंदी अभियान

उदयपुर4 महीने पहले
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नगर निगम उदयपुर - Dainik Bhaskar
नगर निगम उदयपुर

राजधानी जयपुर में पिटबुल डॉग के हमले के बाद अब प्रदेशभर में जहां पिटबुल डॉग पर बैन है। वहीं आवारा श्वान को लेकर भी स्वास्थ्य शासन विभाग हरकत में आ गया है। जिसके तहत प्रदेशभर में आवारा श्वान को पकड़ने और नसबंदी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन पर्यटकों से आबाद रहने वाले उदयपुर में स्ट्रीट डॉग्स के कारण हालात चिंताजनक हैं। यहां साढ़े 6 साल में 24 हजार 116 लोगों को कुत्ते काट चुके हैं। हर साल 3 हजार 710 यानी रोज औसत 10 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं।

शहर में इनकी संख्या में लगातार बढ़ रही है, क्योंकि नगर निगम का श्वान नसबंदी प्रोग्राम कोरोना काल में पूरी तरह ठप है। साल 2021 के पिछले साढ़े 6 महीनों में एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की गई है। भास्कर ने आंकड़ों पर नजर डाली तो सामने आया कि साढ़े 6 साल में भी सिर्फ 1 हजार 668 कुत्तों की नसबंदी हुई है, जबकि शहर में 4 हजार आवारा कुत्ते हैं।

शरीर के अंगों को प्रभावित करता है रैबीज

पशु चिकित्सकों के मुताबिक कुत्ते के काटने से रैबीज हो सकता है। इसका नाम ‘लासा वायरस टाइप-वन’ है। जो जानवरों से फैलने वाला वायरल जूनोटिक इंफेक्शन है। किसी संक्रमित जानवर के काटने या खुले घाव को चाटने से संक्रमण फैलता है। वायरस आदमी के शरीर में प्रवेश करने से ये शरीर के विभिन्न अंगों पर आक्रमण करता है।

पशु पालन विभाग के टेंडर के अटकने से नसबंदी भी ठप

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी सत्यनारायण शर्मा का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या पता करने के लिए गणना नहीं हुई है। एक अनुमान के मुताबिक 4 हजार आवारा कुत्ते उदयपुर में हो सकते हैं। फिलहाल कुत्तों की गणना नहीं कराई गई है। नगर निगम अनुबंध के तहत पशु चिकित्सालय के माध्यम से कुत्तों की नसबंदी कराता आ रहा है।

फिलहाल 50 कुत्ते प्रतिमाह के हिसाब से नसबंदी के लिए 3.83 लाख रुपए का बजट जारी कर रखा है। लेकिन कोरोना काल के 6 महीनों से पशु पालन विभाग का टेंडर अटका हुआ है। जिससे नसबंदी प्रोग्राम ठप हो गया। इसे जल्द शुरू कराने के प्रयास कर रहे हैं।

एक कुत्ते की नसबंदी पर करीब एक हजार रुपए खर्च होते हैं। नसबंदी करने के 5 दिन बाद तक कुत्ते को ऑब्जर्वेशन में रखते हैं। प्रति श्वान 60 रुपए रोज के हिसाब से 300 रुपए खिलाने पर खर्च होते हैं। शेष खर्च इंजेक्शन व अन्य दवाओं पर खर्च होता है।

मुफ्त इलाज करती है सरकार

उदयपुर के डिप्टी CMHO राघवेंद्र राय ने बताया कि कुत्ता, बंदर, नेवला और ऊंट के काटने पर सरकार द्वारा मरीजों का निशुल्क उपचार किया जाता है। इसके तहत मरीज किसी भी नजदीकी अस्पताल में पहुंच अपना निशुल्क इलाज करवा सकता है। लेकिन जानकारी के अभाव में आम लोग सरकार की इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाते हैं।

वहीं राजधानी जयपुर में हुए हादसे के बाद उदयपुर महापौर गोविंद सिंह टाक ने भी शहर में श्वान की गणना के आदेश दिए हैं। जिसके तहत गणना के साथ ही नसबंदी कर पागल कुत्तों को जल्द से जल्द पकड़ा जाएगा। ताकि उदयपुर में राजधानी जयपुर जैसा हादसा ना हो।

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