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हथकढ़ शराब पर छापा:तीन ठिकानों पर पहुंची टीम, जंगलों में भागे तस्कर, 3600 लीटर वाॅश नष्ट

उदयपुरएक महीने पहले
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  • टीलों पर मिली भटि्टयां, तालाब के पैंदे और झाड़ियाें में छिपा रखे थे 73 ड्रम, ताकि किसी की नजर न पड़े

हथकढ़ शराब बनाने की तैयारी कर रहा आबकारी विभाग मगरों-जंगलों में अवैध रूप से बन रही देसी शराब को लेकर अलर्ट हुआ है। विभाग के निरोधक दल बुधवार काे शहर से सटे पुरोहितों का तालाब, मेहरों का गुड़ा और काला गाेडवा की पहाड़ियाें में छापे मारे। प्लास्टिक के 73 ड्रम से हथकढ़ शराब वाॅश के साथ भट्टियाें काे नष्ट किया। एक बाइक भी जब्त की।

इससे पहले जैसे ही दल पहुंचा, अवैध शराब बनाने वाले पहाड़ाें की तरफ भाग गए। टीम ने भट्टियाें के पास जांच की ताे तालाब में पत्थरों से बांधकर पानी में छिपाए वाॅश के ड्रम मिले। तैरकर पहुंचे कांस्टेबल ने इन्हें निकाला। एक जगह ताे जंगल में नाले के पास घनी झाड़ियाें के बीच ड्रम मिले। बरामद बाइक और पूछताछ के आधार पर फरार आराेपी मेहरों का गुड़ा निवासी अंबालाल पुत्र रत्ता गमेती और प्रतापनगर में माेहर मगरी निवासी चुन्नीलाल पुत्र घीसू गमेती के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आबकारी अधिकारी विजय जोशी के निर्देशन में निरोधक दल प्रभारी सहायक आबकारी अधिकारी अजय जैन, प्रहराधिकारी नाथू सिंह व जाब्ते ने यह कार्रवाई की।

भास्कर लाइव : पानी पर तैर रही थी चप्पल, खींचा तो रस्सी ने पहुंचाया वॉश से भरे ड्रमों के जखीरे तक

सुबह 7 बजे आबकारी जाब्ता पुरोहितों का तालाब पहुंचा। करीब एक किमी दूर भट्टी चलने के संकेत मिले। इससे पहले कि टीम पहुंचती, दाे तस्कर पहाड़ियाें की तरफ भाग गए। भट्टी पर शराब बन रही थी। वाॅश कहीं नहीं दिखा। पहले भी कार्रवाई कर चुके दल को पता था कि तालाब में जहां चप्पल या काेई कपड़ा तैर रहा हाे, वहां पैंदे में वाॅश के ड्रम हाे सकते हैं। हुआ भी यही। तालाब के बीच चप्पल तैरती दिखी। कांस्टेबल चेक करने पहुंचा तो चप्पल से बंधी रस्सी पाई।

रस्सी खींची तो प्लास्टिक के ड्रम बाहर आ गए। तालाब खंगाला तो जगह-जगह से 25 ड्रम निकले। हरेक में 50 लीटर वाॅश था। यहां से टीम मेहरों का गुड़ा के जंगलों में पहुंची। वहां अलग-अलग जगह भट्टियां मिली। शराब बनाने वाले गायब हो चुके थे। टीम ने कुछ ही दूरी पर काला गाेडवा की पहाड़ी में वाॅश नष्ट किया। कहीं भी आरोपियों ने भट्टी के पास वाॅश के ड्रम नहीं रखे हुए थे। इन्हें तालाब या झाड़ियाें के बीच छुपा रखे थे। साथ ही एेसी जगह पर शराब बनाते हैं जहां से दूर तक रास्तों काे देख सके और आसानी से पहाड़ाें में भाग सके।

75 रुपए किलाे महुआ, दो लीटर तक बनाते हैं शराब, 90 रु. प्रति बाेतल सौदा

आबकारी अधिकारियों ने बताया कि तस्कर बाजार से 70-75 रुपए प्रति किलाे के भाव से महुआ खरीदते हैं। फिर उसे पानी के साथ ड्रम में रखकर 5-7 दिन तक सड़ने के लिए छाेड़ देते हैं। महुए की मात्रा जितना पानी डालकर ड्रम काे ठंडी जगह रखत जाता है ताकि अच्छे से सड़ जाए। फिर सड़े महुए काे जलती भट्टी पर रखे बर्तन में रखकर तांबे की थाली से कवर कर देते हैं। बर्तन में छेद कर नली के रास्ते भाप को बूंद-बूंद कर दूसरे बर्तन में इकट्‌ठा करते हैं। यही शराब 90 रुपए प्रति बोतल तक बेची जाती है।

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