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  • There Was A Fear Of Riots In Udaipur, 35 40 Thousand People Were On The Road, Among Them I Was The Only Trainee SHO In Uniform But Did Not Let Law And Order Deteriorate.

अवनी की शक्ति:उदयपुर में दंगों का डर था, 35-40 हजार लाेग सड़क पर थे, उनके बीच मैं अकेली वर्दी में ट्रेनी एसएचओ... कानून-व्यवस्था नहीं बिगड़ने दी

उदयपुर11 दिन पहले
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प्रशाखा माथुर, आईपीएस (पहली मूल राजस्थानी आईपीएस, 6 जिलों में एसपी रहीं। जब नकल के कारण भर्तियां अटकी थीं, तब रिकॉर्ड समय में 14 हजार कांस्टेबल भर्ती कराए) - Dainik Bhaskar
प्रशाखा माथुर, आईपीएस (पहली मूल राजस्थानी आईपीएस, 6 जिलों में एसपी रहीं। जब नकल के कारण भर्तियां अटकी थीं, तब रिकॉर्ड समय में 14 हजार कांस्टेबल भर्ती कराए)

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  • आप 6 जिलों में एसपी रही हैं, क्या कभी किसी जिले में पब्लिक विरोध का सामना भी करना पड़ा? प्रशाखा: कई बार, जॉब का हिस्सा है। उदयपुर में मस्तान बाबा का केस जरूर था। उन्हें दफनाने की कंट्रोवर्सी थी। लगा कि दंगा हो जाएगा। मैं ट्रेनी एसएचओ थी लेकिन हिम्मत नहीं हारी। जनाजे में 35-40 हजार लोग थे और उनके बीच मैं अकेले यूनीफॉर्म में गई। सब ऐसे हैंडल किया कि कोई ऊधम नहीं होने दिया।
  • लम्बे समय के बाद आपने 2018 में एक साथ 14 हजार कांस्टेबल की भर्ती कैसे करा ली? प्रशाखा: 2018 में 5000 कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा हुई लेकिन पेपर लीक हो गया। परीक्षा रद्द हो गई। कमी के कारण भर्ती का दबाव था। फिर मुझे जिम्मेदारी देते हुए विशेष आईजी (भर्ती) की पोस्ट क्रिएट की गई। मैंने 100 दिन में मामला सुलझाकर 14 हजार नियुक्तियां कराईं। इसमें 15-16 लाख परीक्षार्थी बैठे थे।
  • आप राजस्थान राज्य महिला आयोग की सचिव भी रहीं हैं तो महिलाओं के लिए क्या नया किया?
  • प्रशाखा: इस पद पर मैं छह महीने रही थी। उस समय चेयरपर्सन पवन सुराणा थीं। इस कार्यकाल में हमने हर विभाग की जेंडर आॉडिट करवाई। बहुत से विभागों के साथ मीटिंग/जनसुनवाई की। पता किया कि महिलाओं और पुरुषों पर कितना खर्च होता है। महिलाओं के साथ किसी तरह का भेदभाव तो नहीं होता।
  • आप एमबीबीएस डॉक्टर हैं फिर पुलिस की नौकरी क्यों चुनी, परिवार का दबाव था क्या?
  • प्रशाखा: मेरे परिवार में न कोई डॉक्टर था, न पुलिस में। पिता बिजली बोर्ड में एसई थे तो मां कॉलेज में म्यूजिक विभाग प्रमुख। अजमेर से मेरी स्कूलिंग हुई। सोफिया से कॉलेज किया। एमबीबीएस किया। प्रसूति एवं महिला रोग विशेषज्ञ के लिए एडमिशन लिया था कि तभी यूपीएससी में नंबर आ गया तो डॉक्टरी छोड़ दी।
  • कोई ऐसी घटना है, जिसमें आपको लगता है कि बहुत ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी?
  • प्रशाखा: पाली के पास देसुरी के नाल में एक बार ट्रेलर पलट गया। इसमें 250 लोग भरे थे, 125 की मौत हो गई। अचानक हुए हादसे से निपटना, फिर परिजनों को संभालना बेहद मुश्किल था।
  • एक पुरुष अधिकारी की तुलना में महिला के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखना ज्यादा मुश्किल है क्या? प्रशाखा: महिला अधिकारी भी सब कर सकती है। जैसे सिरोही, बांसवाड़ा में बहुत डकैतियां होती थीं, मैं रात-रात भर शहर में घूमती थी। लगातार पेट्रोलिंग व धरपकड़ से स्थिति सामान्य हो गईं।
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