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लापरवाही:पाठ्यपुस्तक मंडल इस बार स्कूल तक सीधे नहीं पहुंचा रहा किताबें, 2 करोड़ का खर्चा बढ़ेगा

उदयपुर10 महीने पहले
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  • ये कैसी व्यवस्था : ब्लॉक से स्कूल तक किताबें पहुंचाने जिला शिक्षा विभाग अब कर रहा टेंडर

इस बार राज्य के सरकारी स्कूलों में निशुल्क पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने का खर्च करीब तीन गुना से ज्यादा होगा। जहां अब तक पाठ्यपुस्तक मण्डल स्कूल तक जिला स्तर पर पुस्तकों को 4.50 लाख तक पहुंचा रहा था, वहीं इस सत्र के लिए निकाले टेंडर सहित कुल 13 लाख रुपए खर्च होंगे। ऐसे में राज्यभर में 2 करोड़ से भी ज्यादा आर्थिक भार पड़ने का अनुमान है।

दरअसल, पहले पाठ्यपुस्तक मंडल सीधे ही जिला स्तर तक पाठ्यपुस्तक पहुंचाता था। इसका खर्च 4.50 लाख रुपए तक रहता था। इस बार प्रक्रिया बदलने से किताबें पाठ्यपुस्तक मण्डल की ओर से नोडल स्कूल और नोडल स्कूल से पीईईओ स्कूल तक पहुंचाई जा रही हैं। यह काम अब तक मंडल का ही था। ऐसे में समय भी ज्यादा लगेगा और आर्थिक बोझ भी पड़ेगा। कुछ शिक्षकों-पीईईओ का कहना है कि सत्र की शुरुआत में ही पुस्तक वितरण हो जाना चाहिए, जबकि टेंडर के चलते जुलाई तक भी प्रक्रिया जारी है।

राज्य स्तर पर गवर्निंग काउंसिल में बदली प्रक्रिया

गत वर्ष तक किताबें सीधे ही स्कूल तक पहुंचती थी। इसका कुल खर्च 4.50 लाख था। नए सत्र से प्रक्रिया में बदलाव के तहत पाठ्यपुस्तक मंडल की जिम्मेदारी स्कूल तक किताबें वितरण के बजाय नोडल तक पहुंचाने की है।

इसका खर्च 3.50 लाख है, जबकि नोडल केंद्र से स्कूल तक वितरण का जिम्मा बीकानेर निदेशालय ने जिला शिक्षा विभाग को सौंपा है। इसके लिए राज्य भर में टेंडर की प्रक्रिया भी जारी की गई है। अकेले उदयपुर के लिए 29 जून को 9.50 लाख का टेंडर जारी हुआ है। ऐसे में कुल खर्च 13 लाख तक आने का अनुमान है। पिछले साल के मुकाबले यह अंतर 8.50 लाख तक है। 

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