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सार्वजनिक गोशाला:1000 अस्थि कलशों से भर गए तीन कमरे, अब कम पड़ने लगी है जगह

उदयपुर24 दिन पहले
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  • पिछले साल लगे लाॅकडाउन के बाद से अब तक विसर्जन नहीं

सनातन मान्यता के अनुसार अंत्येष्टि के बाद मृतक की आत्मा की मुक्ति के लिए अस्थि विसर्जन-तर्पण की परंपरा है, लेकिन काेराेना ने यह अवसर भी छीन लिया है। प्रमाण अशोक नगर माेक्ष धाम के पास गाे सेवा समिति की सार्वजनिक गोशाला है, जिसके तीन कमराें में 1000 अस्थि कलश पड़े हैं। अब इनमें और कलश रखने की गुंजाइश भी बेहद कम बची है।

ये अस्थि कलश पिछले साल लॉकडाउन यानी कोरोना की दस्तक से अब तक के मृतकाें के हैं और चाैंकाने वाली बात यह कि इनमें में 400 तो सिर्फ अप्रैल और मई के 50 दिनों में ही पहुंचे हैं। हालांकि इन मृतकाें में वे भी शामिल हैं, जिन्हें काेराेना नहीं हुआ था।

सामान्य दिनों में हर माह 50 कलश आते थे, हरेक का 500 रु. शुल्क

गोशाला प्रभारी अनिल ने बताया कि सामान्य स्थिति में हर माह 50 अस्थि कलश आते थे। अप्रैल- मई के 50 दिन की बात करें ताे करीब 400 कलश आए। अब तक आए 1000 कलश 3 कमरों में पड़े हैं, जिनमें से अधिकतर पिछले साल मार्च के बाद के हैं। कई लाेग इन्हीं यहीं से हरिद्वार ले जाने के विचार से रख ताे जाते हैं लेकिन लेने नहीं आ रहे।

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