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वसुंधरा के करीबियों को टिकट नहीं:परिवारवाद के नाम पर 'राजे' खेमा कमजोर करने की कोशिश, दोनों सीटों पर समर्थकों के टिकट काटे

उदयपुर13 दिन पहले
भाजपा नहीं, वसुंधरा राजे के करीबियों को टिकट नहीं दिया।

राजस्थान में होने वाले उपचुनाव में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने टिकट वितरण में एक तीर से कई निशाने लगाए। टिकट वितरण में सबसे चौंकाने वाला निर्णय धरियावद से पूर्व विधायक गौतमलाल मीणा के पुत्र कन्हैयालाल मीणा के बजाय खेतसिंह मीणा को टिकट देना रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देने के फॉर्मूले की आड़ में केंद्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा राजे खेमे को कमजोर करने का काम किया है। गौतमलाल मीणा वसुंधरा राजे के कट्टर समर्थक थे। आमतौर पर किसी विधायक के निधन के बाद सहानुभूति लहर को देखते हुए उन्हीं के परिवार से टिकट मिलता है। सहाड़ा, सुजानगढ़ और राजसमंद चुनाव में ऐसा ही हुआ था।

वसुंधरा राजे के साथ रणधीर सिंह भींडर और उनकी पत्नी।
वसुंधरा राजे के साथ रणधीर सिंह भींडर और उनकी पत्नी।

धरियावद में भी ऐसा ही होने की उम्मीद थी। बीजेपी से कोई खास चुनौती नहीं होने के चलते कन्हैया का टिकट तय माना जा रहा था। कन्हैया मीणा गुरुवार सुबह नामांकन भी भरने वाले थे, मगर बुधवार रात केंद्रीय नेतृत्व से उनकी जगह खेतसिंह का नाम तय हो गया। इसी तरह वल्लभनगर में भी रणधीर सिंह भींडर को टिकट दिए जाने की बात उठी थी। रणधीर सिंह भींडर वसुंधरा के काफी करीबी हैं। पिछले दिनों दो बार भींडर वसुंधरा से मिल चुके हैं। ऐसे में यहां भी केंद्रीय नेतृत्व की चली और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी की पसंद से हिम्मत सिंह झाला को टिकट दिया गया।

संगठन ने कटारिया को भी साधा, मगर डांगी को टिकट नहीं दिया
टिकट तय होने के बाद नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि बीजेपी में एक व्यक्ति टिकट तय नहीं करता है। संगठन के स्तर पर जो नाम तय होते हैं। पार्टी का जो निर्णय होता है, वही सबका निर्णय होता है। वल्लभनगर में बीजेपी से गुलाबचंद कटारिया उदयलाल डांगी को टिकट दिलाना चाहते थे, मगर ऐसा नहीं हुआ।

हिम्मत सिंह झाला को टिकट मिला। हालांकि वल्लभनगर में बीजेपी ने बीच का रास्ता निकाला। कटारिया के पसंद के उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया तो उनके विरोधी रणधीर सिंह भींडर या उनके परिवार को भी टिकट नहीं दिया गया।

गुलाबचंद कटारिया के साथ खेतसिंह।
गुलाबचंद कटारिया के साथ खेतसिंह।

गौरतलब है कि वल्लभनगर से बीजेपी का एक खेमा रणधीर सिंह भींडर की पत्नी दीपेंद्र कंवर को टिकट देने के पक्ष में था, लेकिन गुलाबचंद कटारिया ने वीटो लगा दिया था। ऐसे में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने बीच का रास्ता निकालते हुए हिम्मत सिंह झाला को टिकट दिया। बता दें कि वल्लभनगर में डांगी के खिलाफ अन्य सभी उम्मीदवार भी एकजुट हो गए थे। ऐसे में बीजेपी को तीसरे नाम पर विचार करना पड़ा। सभी समीकरण साधने के लिए झाला को उम्मीदवार घोषित किया।

वल्लभनगर में भले ही कटारिया की पंसद के उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया गया, लेकिन धरियावद की टिकट हासिल करने वाले खेतसिंह मीणा उनके करीबी बताए जाते हैं। धरियावद को लेकर कटारिया ने कहा कि यहां कन्हैया का टिकट तय था, मगर बाद में केंद्र ने परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देने के फार्मूले पर काम करते हुए बदलाव किया। कटारिया ने कहा कि सब एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे, जो नाराज हैं उन्हें मनाएंगे।

भाजपा के किसी खेमे में फिलहाल नहीं कोई विवाद
इस उपचुनाव में यह बात भी दिलचस्प है टिकट वितरण को लेकर बीते दिनों वसुंधरा राजे की भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया से जयपुर में मुलाकात हुई थी। इसके बाद से नामों को लेकर सहमति बनी हुई है। ऐसे में भाजपा में न तो वसुंधरा राजे का विरोध है और न कटारिया का। दोनों सीटें मेवाड़ की होने के कारण कटारिया से भी विचार-विमर्श किया गया। उससे पहले वसु्ंधरा राजे और पूनिया की मुलाकात भी हुई।

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