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  • Two Thousand Years Old Aad Civilization Also Developed On The Banks Of The River, Every Year 12 Lakh Tourists Come To See The Beauty Of The Lakes.

आयड़ सभ्यता का विकास:दाे हजार साल पुरानी आयड़ सभ्यता का विकास भी नदी किनारे हुआ, हर साल झीलों की सुंदरता देखने आते हैं 12 लाख पर्यटक

उदयपुर9 महीने पहले
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हर साल 14 मार्च काे इंटरनेशनल-डे ऑफ एक्शन फाेर रिवर्स मनाया जाता है। इस साल 24वीं बार यह दिवस मनाया जा रहा है और थीम है राइट्स ऑफ रिवर्स। इसमें बताया गया है कि जहां नदी होती है, वहां सभ्यता का विकास होता है। वहां के लाेगाें की जीवन शैली और परिवेश दूसरी जगहों से अलग होती है। उदयपुर में विकास भी आयड़ नदी के किनारे हुआ है। आयड़ सभ्यता का विकास 1900 से 2200 ईसा पूर्व हुआ था। तभी से यहां पानी संरक्षण की नींव डल गई थी। इसी का नतीजा है कि झीलों की नगरी की सुंदरता काे निहारने हर साल 12 लाख पर्यटक आते हैं और यह लेकसिटी के रोजगार काे मुख्य सोर्स में शामिल हैं। नदी के किनारे ही घने जंगलों से ही हमें वनस्पति और जड़ी-बूटी मिलती है। इसके साथ नदियां जंगलों की आग काे बढ़ने से रोकती हैं और लाखों वन्यजीवों काे भाेजन और संरक्षण देती हैं।

नदियाें के किनारे सभ्यता का विकास होता है
रिटायर्ड सहायक वन संरक्षक डाॅ. सतीश शर्मा ने बताया कि नदियां सतही जल स्तर बढ़ाने के साथ ही भूगर्भ का जल स्तर भी बढ़ाती हैं। नदियों के किनारे राइटटेरियन फॉरेस्ट हाेते हैं। जाे सालभर हरे-भरे रहते हैं। इसमें खजूर, जामुन और अर्जुन के पेड़ शामिल हैं। यह जंगल हजारों वन्य जीवों काे संरक्षण औैर आवास देते हैं। इन जंगलों से लकड़ी, शहद औैर जड़ी-बूटियां प्राप्त होती हैं। यह तटवन बाढ़ काे रोकते हैं। इसके साथ नदी में मेंंढ़क, मछलियां काे आवास मिलता है, जाे पानी काे साफ करते हैं। नदियां जंगल की आग काे आगे नहीं बढ़ने देतीं और वन्यजीवों काे शरण मिलती है। हमारे यहां सिंधु घाटी और हड़प्पा सभ्यता नदी किनारे ही बसी है। यहां का कल्चर अलग होता है। सभ्यताओं के संरक्षण के लिए नदियों काे बचाना जरूरी है। नदियों में प्रदूषण हाेने से सभ्यता नष्ट हाे जाती है। साथ ही नदी के तटाें काे बचाना चाहिए। भारतीय संस्कृति में नदियों का धार्मिक महत्व है, इसलिए इनका संरक्षण हाेना चाहिए।

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