मोहर्रम पर उदयपुर के ताजिए में आग, हिंदुओं ने बुझाई:जले गुंबद को ढंकने को महिला ने दी साड़ी; यहीं हुआ था कन्हैया हत्याकांड

उदयपुर4 महीने पहलेलेखक: निखिल शर्मा

कन्हैयालाल हत्याकांड में पूर्व का वेनिस कहलाने वाले उदयपुर को कई बदनाम करने वाले नाम मिले। भाईचारे पर सवाल उठे और कौमों के बीच राजनीतिक बयानबाजी से गहरी खाई खोदने के प्रयास हुए। इन सबके बाद भी सैकड़ों सालों से मिलजुल कर यहां रहने वाले लोगों में एक-दूसरे के प्रति विश्वास कम नहीं हुआ।

इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला मंगलवार शाम को, जब शहर के मोचीवाड़ा की तंग गलियों से निकलते सबसे बड़े ताजिए में आग लग गई। हिंदू मोहल्ले में अचानक हुए इस हादसे से प्रशासन की चिंताएं बढ़ गईं, लेकिन वहां के हिंदू परिवारों ने कुछ मिनटों में ताजिए के गुंबद में लगी आग को बुझा दिया। यहां एक हिंदू महिला ने तो ताजिए को ढंकने के लिए अपनी साड़ी भी दी।

आपको बता दें कि जहां ताजिए में आग लगी, उससे सिर्फ 300 मीटर दूर 43 दिन पहले कन्हैयालाल हत्याकांड हुआ था। इसलिए यह एरिया काफी संवदेनशील है।

धर्म से बड़ी इंसानियत, हम बचपन से देखते आ रहे
मोचीवाड़ा के रहने वाले श्याम सुंदर सोलंकी बताते हैं कि मेरे घर के सामने आग लग गई। दो फीट की दूरी से दिख रहा था। हमारा चार मंजिला मकान है। चार परिवार रहते हैं। बचपन से हम ताजिया देखते आए हैं। यह कभी-कभी हमारी खिड़की को भी छू जाते हैं। हमारी नजर आग पर सबसे पहले पड़ी।

नीचे जो लोग खड़े थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि आग लगी है। जब हमें आग का पता चला तो हमने बिना सोचे पानी डालना शुरू कर दिया। हमारे दो घरों के आगे-पीछे कोई घर नहीं था। अगर थोड़ी देर हो जाती तो बड़ा नुकसान हो सकता था।

आग लगने के कारण ताजिए के गुंबद का हिस्सा जल गया था। इसे ढंकने के लिए पास में रहने वाली हिंदू महिला ने अपनी लाल साड़ी दी। जब गुबंद को ढंका जा रहा था, तब वहां मौजूद सैकड़ों ने लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया।
आग लगने के कारण ताजिए के गुंबद का हिस्सा जल गया था। इसे ढंकने के लिए पास में रहने वाली हिंदू महिला ने अपनी लाल साड़ी दी। जब गुबंद को ढंका जा रहा था, तब वहां मौजूद सैकड़ों ने लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया।

श्याम ने बताया कि ताजिए का गुंबद जल गया था। नीचे से लोग उसे ढंकने के लिए लाल कपड़ा मांगने लगे। मगर किसी के पास लाल कपड़ा नहीं था। इस पर मेरी भाभी रेखा सोलंकी ने अपनी नई लाल साड़ी दी। उस लाल साड़ी से गुंबद को ढंका गया। उन्होंने कहा कि धर्म से बड़ी इंसानियत होती है।

बुधवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदू परिवारों का स्वागत किया और सांवरिया सेठ मंदिर में माल्यार्पण कर श्रीफल चढ़ाया।
बुधवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदू परिवारों का स्वागत किया और सांवरिया सेठ मंदिर में माल्यार्पण कर श्रीफल चढ़ाया।

महाकाल यात्रा पर मुस्लिमों ने बरसाए थे फूल
इससे एक दिन पहले सोमवार को मुस्लिम समाज की ओर से भी ऐसी ही मिसाल पेश की गई थी। महाकाल की सवारी चेटक सर्किल स्थित पलटन मस्जिद के सामने से गुजरी तो मुस्लिम समाज ने महाकाल की सवारी का पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया था। मुस्लिमों ने सवारी पर गुलाब के फूल बरसाए थे।

रेखा सोलंकी, जिन्होंने अपनी साड़ी ताजिए के गुबंद के लिए दी।
रेखा सोलंकी, जिन्होंने अपनी साड़ी ताजिए के गुबंद के लिए दी।

हम-सब एक दूसरे के साथ हैं
पलटन मस्जिद कमेटी के सेक्रेटरी रियाज हुसैन ने बताया- पलटन मस्जिद मोहर्रम कमेटी ने तय किया था कि भाईचारे का संदेश देना है। इसलिए हमने महाकाल यात्रा पर फूल बरसाए। वहीं, जिन्होंने आग बुझाई हम उनको धन्यवाद देते हैं। उन्होंने बड़ा काम किया है। हमें खुद ही अब बताना पड़ेगा कि हम सब एक-दूसरे के साथ हैं और सब अमन चैन की बातें करते हैं।

जिला प्रशासन करेगा सम्मानित
स्थानीय निकाय उपनिदेशक कौशल कोठारी भी इस दौरान मौके पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि ये 20वां और सबसे बड़ा ताजिया था। लोगों ने जिस सौहार्द्र का परिचय दिया, वो काबिले तारीफ था। इसलिए उन सभी लोगों के नाम नोट किए हैं। इन्हें अब प्रशासन की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा।

उदयपुर के मोचीवाड़ा इलाके में निकाले जा रहे ताजिए की ऊंचाई करीब 30 फीट थी। बीते 20 सालों से शहर के प्रमुख इलाकों से यह ताजिया निकाला जाता है।
उदयपुर के मोचीवाड़ा इलाके में निकाले जा रहे ताजिए की ऊंचाई करीब 30 फीट थी। बीते 20 सालों से शहर के प्रमुख इलाकों से यह ताजिया निकाला जाता है।

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