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उदयपुर के प्रमुख रैन बसेरे से रियलिटी चेक:वैक्सीन डोज की जानकारी और सेनेटाइजेशन के बाद एंट्री, लोगों ने टॉयलेट्स में सफाई और पेयजल पर सुधार की बताई जरूरत

उदयपुर6 दिन पहले
रैन बसेरे में ओढ़ने के लिए सभी के पास पर्याप्त बिस्तर हैं।

उदयपुर में कड़कड़ाती सर्दी के बीच दैनिक भास्कर ने प्रमुख रैन बसेरे का रियलिटी चेक किया। रात बिता रहे लोगो ने टॉयलेट के पानी और पेयजल को लेकर और भी इंतजामों के सुधारने की बात कही। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत पालना हो रही थी। नगर निगम की ओर से शहर में 14 रैन बसेरे लगाए गए है, ताकि बेघर को फुटपाथ या कही भी खुले में ठंड से सिकुड़कर सोने को मजबूर नहीं होना पड़ें।

रूकने से पहले एंट्री करवता कर्मचारी दयालाल।
रूकने से पहले एंट्री करवता कर्मचारी दयालाल।

दरअसल बढ़ी सर्दी के बीच रैन बसेरो के हाल जानने के लिए भास्कर संवाददाता उदियापोल बस स्टैंड स्थित रैन बसेरे पर पहुंचे। रात करीब 10.30 बजे नगर निगम की ओर संचालित पर बसेरे में करीब दो दर्जन लोग रुके थे। इस बसेरे में 20 लोगो ठहरने की व्यवस्था थी। हालांकि ज्यादा लोगो के आने पर यहां अधिकतम 27-28 लोगों को रोका जा सकता है। लोगों को आधार कार्ड और अन्य आईडी कार्ड देखकर उन्हें रुकने दिया जा रहा था। रैन बसेरे में ज्यादातर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद नजर आई। कोरोना काल में सोशल डिस्टेंस से लेकर खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था मिली। खाने-पीने की व्यवस्था एक एनजीओ की ओर से की जाती है। वहीं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रखा गया संबंधित गार्ड भी तैनात मिला।

सभी के पास ओढ़ने के लिए दो कंबल और एक-एक रजाइयां थी।
सभी के पास ओढ़ने के लिए दो कंबल और एक-एक रजाइयां थी।

व्यवस्थाओं में लोगों से पूछने पर सामने आया कि बिस्तर की सफाई को लेकर थोड़ा और ध्यान रखे जाने की जरूरत है। जयपुर से आए राकेश कुमार ने बताया ​वे कई शहरों के रैन बसेरो में ठहरे है। उन सब में उदयपुर की यह व्यवस्थाएं अच्छी है। एक परीक्षा के सिलसिले में उदयपुर आए अलवर निवासी हेमेन्द्र ने बताया कि टॉयलेट्स में सफाई को लेकर सुधार किया जाना चाहिए।

कर्मचारी दयालाल ने बताया कि पिछले कुछ​ दिनों से रोजाना रुकने वाले लोगो में बढ़ोतरी हुई है। रात को 10 या 11 बजे भी लोग रुकने आ रहे है। प्रति व्यक्ति को 2 कंबल और एक रजाई दी जाती है, ताकि उन्हें बिल्कुल सर्दी ना लगे। रोजाना सुबह 9 बजे पूरे परिसर की सफाई करवाई जाती है। हालांकि कर्मचारी की कमी से टॉयलेट को दोनों वक्त साफ नहीं करवा पाते। 24 घंटे रैन बसेरे के गेट खुले रहते है, देर रात को भी लोग आते है, जो जगह नहीं होने पर भी उन्हें निराश नहीं कर एडस्ट कर लेते है।

उदियापोल बस स्टैंड के पास यह रैन बसेरा फर्स्ट फ्लोर पर संचालित किया जाता है।
उदियापोल बस स्टैंड के पास यह रैन बसेरा फर्स्ट फ्लोर पर संचालित किया जाता है।

दयालाल ने बताया कोविड प्रोटोकॉल और संक्रमण को विशेष तौर पर ध्यान में रखते हुए हर आने वाले यदि किसी के पास मास्क नहीं है तो भी उसे मास्क दिया जाता है। दोनों डोज के सर्टिफिकेट को देखा जाता है। साबुन से हाथ-मुंह धोने और सेनेटाइज करने के बाद ही सोने के लिए बिस्तर दिए जाते है।

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