राजस्व मंत्री रामलाल जाट का इंटरव्यू:जब सत्ता घमंड में चूर हो और सुनने को तैयार न हो तो विपक्ष को लोकतंत्र में रैली का सहारा लेना पड़ता है

उदयपुर2 महीने पहलेलेखक: निखिल शर्मा
रामलाल जाट।

कांग्रेस के प्रदेश राजस्व मंत्री रामलाल जाट का मानना है कि राजस्थान की जनता और संगठन अशोक गहलोत में विश्वास करता है और आलाकमान ने उन्हें ड्राइविंग सीट पर बैठा रखा है। उन्हीं के नेतृत्व में आगामी चुनाव भी लड़े जाने चाहिए। साथ ही तेजी से फैलते कोविड के बीच 12 दिसम्बर को होने वाली रैली को लेकर जाट का कहना है कि केंद्र सरकार के घमंड के चलते यह करना पड़ रहा है। जब सत्ता घमंड में चूर हो और सुनने को तैयार नहीं हो तो विपक्ष को इस तरह की रैली करने पड़ती है। उदयपुर आए राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने भास्कर से खास बातचीत में कहा कि अशोक गहलोत काजल की कोठरी में हैं, उनकी ईमानदारी को देखते हुए ही आलाकमान ने उन्हें राजस्थान का नेतृत्व सौंपा हुआ है।

भास्कर : सबसे बड़ा सवाल रैली को लेकर है कि कोविड बढ़ रहा है, नया वैरिएंट भी आ गया है, तो कांग्रेस इसे रद्द क्यों नहीं कर देती?

जाट : जब सत्ता घमंड में चूर हो, जब कोई नहीं सुन रहा हो तो लोकतंत्र में रैली के माध्यम से चीजें कहीं जाती हैं। हमारे नेताओं ने संसद में चीजें रखी, किसानों ने आंदोलन किया, सैंकड़ों की जान चली गई मगर ये सुन नहीं रहे। बीजेपी जनता की मांग को उठने नहीं देना चाहती, इसलिए विपक्ष में होने के नाते कांग्रेस का यह फर्ज है कि इन चीजों को उठाए। रही बात कोविड की तो अशोक गहलोत के मैनेजमेंट को डब्लयूएचओ ने भी माना है। रैली में हम तमाम कोविड प्रोटोकॉल को फॉलो करेंगे। हमने इसे ध्यान में रखते हुए ही गांव से रैली तक का प्लान बनाया है।

भास्कर : मंत्रिमंडल गठन के बाद लग रहा था कि कांग्रेस में मतभेद खत्म हो जाएगा, मगर ऐसा हुआ नहीं, लगातार गहलोत और पायलट गुट से बयान आ रहे हैं?

जाट : कांग्रेस हमेशा नेतृत्व में विश्वास करती है, जब आलाकमान ने तय कर लिया कि अशोक गहलोत राजस्थान में सीएम रहेंगे। जनघोषणा पत्र के समय सचिन पायलट भी थे और उनकी सहमति से सब हुआ है। घोषणा पत्र पर हम अमल कर रहे हैं। सबका टारगेट है कि 2023 में कांग्रेस आए, कोई गुटबाजी नहीं है। राहुल-प्रियंका गांधी कांग्रेस को मजबूत कर रहे हैं, उनको सिर्फ राज नहीं मिला विरासत में उन्हें चैलेंज भी मिले हैं।

भास्कर : कहा जा रहा है कि सचिन पायलट के नेतृत्व में 2023 का चुनाव लड़ा जाएगा, क्या ऐसा होगा, क्या यह सही है ?

जाट : यह प्रश्न मेरे लिए नहीं है, आलाकमान का प्रश्न है ये। आलाकमान ने अशाेक गहलाेत को आगे बैठा रखा है। उन्हीं के कामकाज में नेतृत्व में यह काम हो रहा है। गहलोत में यह क्वालिटी है, सबको साथ लेकर चलने की। उनके अंदर यह क्षमता है, इसलिए उन्हें ड्राइविंग सीट पर बैठा रखा है।

भास्कर : ड्राइविंग सीट का फाॅर्मूला 2018 में लागू क्यों नहीं हुआ, तब सचिन पायलट को बैठा रखा था, मगर मुख्यमंत्री गहलोत बन गए?

जाट : राजनीति में धैर्य, साहस, त्याग, तपस्या, बलिदान होना चाहिए। हमारे यहां त्याग के उदाहरण हैं। जब 2018 में तय किया अशोक गहलोत के पक्ष में किया तो आलकमान का फैसला था। जब 1998 में अशोक गहलोत को आलकमान ने जब नेतृत्व सौंपा तो सबने माना। उस समय भी कई बड़े नेता था, सबने माना। गहलोत में वो धैर्य है, अशोक गहलोत में वो ईमानदारी है, काजल की काली कोठरी में कोई रहे और कोई दाग नहीं लगे। यही आलाकमान ने देखा होगा।

भास्कर : राजनीतिक नियुक्तियां 3 साल में नहीं हुई, ऐसा कहा जा रहा है कि नियुक्तियां नहीं करने के पीछे मुख्यमंत्री की मंशा है कि कांग्रेस भविष्य में उनके बिना कभी आगे न बढ़ सके?

जाट : नियुक्तियां कई हुई हैं। बड़ी नियुक्तियां कामकाज और परिस्थितियों को देखते हुए समय लगा है। मैं तो हमेशा से देख रहा हूं ये नियुक्तियां इसी समय पर होती हैं। बीजेपी ने भी इसी समय की थी।

भास्कर : आप कह रहे हैं कि अशोक गहलोत जनता के बीच स्वीकार्य हैं, कांग्रेस केंद्र में जूझ रही है, तो क्या आपको नहीं लगता कि गहलोत जैसे प्रभावशाली नेता को केंद्र में होना चाहिए?

जाट : पीएम इतने जिद्दी स्वभाव के हैं। उसके बावजूद राहुल गांधी की बात को प्रधानमंत्री को मानना पड़ता है। इससे पता चलता है कि केंद्रीय नेतृत्व कितना मजबूत है। अशोक गहलोत की जरुरत फिलहाल राजस्थान में है।