सरकार के सामने कोयला संकट:शहरों में 1 से 2 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 6 घंटे की बिजली कटौती, बच्चों की पढ़ाई से लेकर जरूरी काम तक प्रभावित हो रहे

प्रतापगढ़एक महीने पहले
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पवन ऊर्जा का उत्पादन दलोट,देवगढ़, प्रतापगढ़ - Dainik Bhaskar
पवन ऊर्जा का उत्पादन दलोट,देवगढ़, प्रतापगढ़
  • सितंबर में जरूरत जितनी 306 लाख यूनिट बिजली मिली थी, फिर भी अघोषित कटौती करते रहे, जिले में परेशान हो रहे हैं लोग

सरकार के पास कोयला संकट गहरा गया है। इसका असर प्रतापगढ़ जिले पर भी देखने को मिला है। जिले में इन दिनों खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में घोषित के साथ अघोषित बिजली कटौती भी हाे रही है। प्रतापगढ़, धरियावद, छोटीसादड़ी और अरनोद उपखंड के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली कटौती की वजह से लोग परेशान हैं। इसको लेकर डिस्कॉम की ओर से जिला मुख्यालय पर प्रतिदिन एक घंटा, छोटीसादड़ी शहरी क्षेत्र में 2 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 6 घंटे की बिजली कटौती करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

कोयले की कमी के कारण गहराते बिजली संकट के बीच अजमेर विद्युत वितरण निगम ने बिजली कटौती का नया शेड्यूल तय किया है। अब प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर एक घंटा कटौती, छोटीसादड़ी नगर पालिका क्षेत्र में 2 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 6 घंटे की बिजली कटौती होगी।

अधीक्षण अभियंता एनएच मंसूरी ने बताया कि ऊर्जा संकट से निपटने के लिए डिस्कॉम एमडी वीएस भाटी के निर्देशानुसार अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती का शेड्यूल जारी किया गया है। इस शेड्यूल के तहत प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर शाम 5 से 6 तथा छोटीसादड़ी नगर पालिका क्षेत्र में शाम 4 से 6 तक बिजली कटौती की जाएगी।

इसके अतिरिक्त जिले के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 6 घंटो की बिजली कटौती संभावित है। इसके पीक आवर्स शाम को 6 से रात 10 बजे के बीच एक से दो घंटे की कटौती संभावित है। अधीक्षण अभियंता मंसूरी ने कहा कि लोग इस संकट के बीच बिजली बचाने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करें।

फिर कटौती क्यों - हम तो पवन चक्की से भी अतिरिक्त बिजली पड़ोस के जिलों को भेजते हैं

आरवीपीएन 220 केवी जीएसएस के एक्सईएन रमेश चंद्र पुरोहित बताते हैं कि जिले के अंदर दलोट, देवगढ़ और प्रतापगढ़ तीन जगहों पर पवन चक्की की 225 यूनिट लगी है। इनमें प्रतापगढ़ में 142 और दोनों क्षेत्र में 83 यूनिट लगी हुई है। इनमें किसी पवन चक्की की क्षमता 1.5 तो किसी की 2 मेगावाट तक की है। सभी 225 यूनिट से मिला कर दिन भर में 355 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।

जबकि प्रतापगढ़ की कृषि की जरूरत को देखते हुए प्रतिदिन 100 से 125 मेगावाट बिजली खर्च होती है। अगर कृषि का समय नहीं चलता हो तो बिजली का खर्च मात्र 20 से 22 मेगावाट तक का रह जाता है। ऐसे में बचत की बिजली प्रतापगढ़ से बांसवाड़ा और चित्तौड़गढ़ को भी दी जाती है। एक तरफ डिस्कॉम के आंकड़ों में भी बिजली की आपूर्ति पूरी है और दूसरी तरफ पवन चक्की सभी बिजली की आपूर्ति हो रही है। तो बिजली की कमी तो नहीं है लेकिन इसके बावजूद अघोषित कटौती लापरवाही की तरफ इशारा कर रही है।​​​​​

इधर यह निर्देश .. जिला मुख्यालय पर एक घंटा, छोटीसादड़ी नगर पालिका क्षेत्र में 2 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 6 घंटे की बिजली कटौती

कोयले की कमी के कारण गहराते बिजली संकट के बीच अजमेर विद्युत वितरण निगम ने बिजली कटौती का नया शेड्यूल तय किया है। अब प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर एक घंटा कटौती, छोटीसादड़ी नगर पालिका क्षेत्र में 2 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 6 घंटे की बिजली कटौती होगी।

अधीक्षण अभियंता एनएच मंसूरी ने बताया कि ऊर्जा संकट से निपटने के लिए डिस्कॉम एमडी वीएस भाटी के निर्देशानुसार अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती का शेड्यूल जारी किया गया है। इस शेड्यूल के तहत प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर शाम 5 से 6 तथा छोटीसादड़ी नगर पालिका क्षेत्र में शाम 4 से 6 तक बिजली कटौती की जाएगी। इसके अतिरिक्त जिले के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 6 घंटों की बिजली कटौती संभावित है। इसके पीक आवर्स शाम को 6 से रात 10 बजे के बीच एक से दो घंटे की कटौती संभावित है। अधीक्षण अभियंता मंसूरी ने जिले के कहा कि लोग इस संकट के बीच बिजली बचाने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करें।

लोगों बोले- 10 से 12 घंटे तक लाइट बंद हो रही है

1. पारसोला में पिछले महीने भी 10 से 12 घंटे तक लाइट बंद की जा रही थी। अब तो घोषित कटौती कर रहे हैं। पहले कौन सा संकट था। बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है। छोटे-छोटे उद्योग जिसमें ईमित्र, बैंकिंग, दूध डेयरी, इलेक्ट्रॉनिक, वेल्डिंग, सुथारी काम भी प्रभावित है। रात के समय बिजली नहीं आने से चोरों का खतरा भी बढ़ जाता है।
सुधीर जैन, उपसरपंच, पारसोला।
2. एक तरफ बारिश नहीं आने से फसलें खराब हो रही है। दूसरी तरफ समय पर लाइट नहीं आने की वजह से इन्हें पानी नहीं मिल पा रहा। रात में लाइट जाने से छोटे बच्चों को मच्छर काट रहे हैं, वेबीमार पड़ रहे हैं। उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।-खानिया मीणा, किसान, मोखमपुरा।

इन दिनों बिजली उत्पादन का संकट होता जा रहा है। ऐसे में कटौती की जा रही है। इसे देखते हुए आमजन से भी अपील है कि वह संकट के समय में बिजली बचत पर अधिक ध्यान दें। -एनएच मंसूरी, एसई, डिस्कॉम, प्रतापगढ़।

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