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काेराेना ने प्रियजन छीना:गलत मृत्यु प्रमाण पत्र बनने से परिजन हाे रहे लाभ से वंचित

प्रतापगढ़एक महीने पहले
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  • प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोरोना लिखा हो, तभी मिलेगी सहायता राशि, संशोधन कराने परिजन लगा रहे चक्कर

कोरोना काल में मृतकों को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता राशि दिया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए सक्षम अधिकारी की रिपोर्ट को आधार माना गया है, लेकिन जिले में ऐसे भी उदाहरण हैं, जहां ग्राम पंचायताें ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए। इस मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु का कारण उल्लेखित नहीं है। ऐसे में अब मृतक के परिजन राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता से वंचित हाे रहे हैं।

अब इनके सामने संशाेधित मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए कार्यालयाें के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। राज्य सरकार के नियमानुसार सरकारी चिकित्सालय में जन्म व मृत्यु होने पर 21 दिन तक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र सरकारी चिकित्सालय से ही जारी किया जाता है। जिला चिकित्सालय की ओर से मृतक का नाम, उम्र, पिता का नाम, पता, चिकित्सालय में भर्ती की तिथि, मृत्यु तिथि, मृत्यु का कारण, प्रमाणित करने वाले चिकित्सक का नाम आदि सूचना निर्धारित फार्मेट में मृतक के परिजन को दी जाती है। 21 दिन बाद नगर परिषद इस रिपोर्ट के आधार पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 21 दिन बाद संबंधित ग्राम पंचायत सचिव की ओर से यह प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

जिले में 1 जनवरी 2020 से 7 जुलाई 2021 तक 8257 लोगों की मौत, सरकार 62 की ही काेराेना से माैत मान रही

केस 1 : ग्राम पंचायत पीलू के तोफाखेड़ा गांव निवासी भंवरलाल पाटीदार पुत्र रामलाल पाटीदार की कोरोना संक्रमण के चलते 8 मई को मृत्यु हो गई। इसका रिकार्ड चिकित्सा विभाग के पास है। बकौल मृतक के पुत्र रामनारायण पाटीदार उनके पिता जिला चिकित्सालय में 6 दिन तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर भी रहे। ग्राम पंचायत के मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु के कारण का उल्लेख नहीं है। ऐसे में परिजनों को राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला लाभ नहीं मिल पाएगा।

केस 2 : ग्राम पंचायत दलोट के गांव सेवना में बालूराम मीणा पुत्र कमजी मीणा की कोरोना संक्रमण के चलते जिला चिकित्सालय में 11 मई 2021 को मृत्यु हो गई। बालूराम के पुत्र कालूराम मीणा ने बताया कि पिता की कोरोना संक्रमण के चलते मृत्यु होने के बाद पंचायत ने प्रमाण पत्र जारी कर दिया, जिसमें मृत्यु का कारण नहीं है। अब वह जिला चिकित्सालय के चक्कर काटने को मजबूर है।

केस 3 : इसी प्रकार पीपलखूंट की महूंवाल ग्राम पंचायत के आमलीखेड़ा के हुमिया पुत्र भैरिया की मृत्यु जिला चिकित्सालय में 21 अप्रैल को हो गई। इसके बाद 23 जून 2021 काे पंचायत ने हुमिया का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इस प्रमाण पत्र में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि हुमिया की मृत्यु कोरोना संक्रमण से हुई है। ऐसे में परिजन सरकार के लाभ से वंचित है।

पत्नी को एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता का प्रावधान

कोरोना संक्रमित की मृत्यु होने पर राज्य सरकार की ओर से मृतक के परिजन को एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है। इसमें शर्त यह है कि महिला की मृत्यु पर परिजनों को आर्थिक सहायता नहीं मिलती। पुरुष की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी को एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता का प्रावधान है।

बनाए गए मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त हो

ग्राम पंचायत सचिव द्वारा बनाए गए मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त कर जिला चिकित्सालय से जारी किया जाना चाहिए, ताकि परिजनों को राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

- मुकेश धोबी, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रतापगढ़।

21 दिन बाद प्रमाण पत्र जारी करते हैं

मृतक के परिजनाें ने पंचायत में सूचना दी होगी, इस आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया होगा। हम तो मृत्यु के 21 दिन बाद ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करते हैं।

- सुरेश कुमार मीणा, सचिव, ग्राम पंचायत पीलू।

पंचायत द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को निरस्त किए जाने की कार्रवाई की जाएगी

मृतक के परिजनों की ओर से ई-मित्र पर आवेदन प्रस्तुत करने के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। जिला चिकित्सालय के चिकित्सक का सोमवार को फोन आने के बाद अब पंचायत द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को निरस्त किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।

हरिलाल मीणा, सचिव, ग्राम पंचायत दलोट।

गलत प्रमाण पत्र बन गया है ताे कलेक्टर काे करें आवेदन

यदि किसी व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र गलत बन गया है तो वह कलेक्टर के यहां आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी, चिकित्सकों की टीम गठित कर ऐसे प्रकरणों का निस्तारण कराने के लिए अधिकृत है। टीम आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट, भर्ती टिकट में कोरोना संक्रमित का इलाज होना आदि के आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और उसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र में संशोधन कराया जा सकता है।

डॉ. वीडी मीणा, सीएमएचओ, प्रतापगढ़।​​​​​​​

31 दिसंबर 2020 तक जिले में 4283 लोगाें की मौत हुई
जिला सांख्यिकी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार एक जनवरी से 31 दिसंबर 2020 तक जिले में 4283 लोगाें की मौत हुई। इसमें अरनोद ब्लॉक में 885, छोटीसादड़ी ग्रामीण ब्लॉक में 749, धरियावद में 859, पीपलखूंट ब्लॉक में 689, प्रतापगढ़ ग्रामीण ब्लॉक में 1127, सुहागपुरा में 11, धमोत्तर में 24, दलोट में 25, प्रतापगढ़ शहरी क्षेत्र में 288 तथा छोटीसादड़ी शहरी क्षेत्र में 126 लोगों की मृत्यु हुई। वहीं एक जनवरी 2021 से 7 जुलाई तक 3474 लोगाें की मृत्यु हो चुकी है।

इनमें अरनोद ब्लॉक में 316, छोटीसादड़ी ग्रामीण ब्लॉक में 683, धरियावद में 577, पीपलखूंट ब्लॉक में 235, प्रतापगढ़ ग्रामीण ब्लॉक में 586, सुहागपुरा में 152, धमोत्तर में 342, दलोट में 304, प्रतापगढ़ शहरी क्षेत्र में 195 तथा छोटीसादड़ी शहरी क्षेत्र में 84 लोगों की मृत्यु हुई। 8257 लोगों की मौताें में भी सरकार केवल 62 लाेगाें की ही काेराेना से माैत मान रही है।

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