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मंडी टैक्स की मार:किसान एमपी की मंडियों में बेच रहे उपज, 6 गौण मंडियां संकट में, कारण-हमारे यहां मंडी टैक्स 5 गुना ज्यादा है

प्रतापगढ़11 दिन पहले
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  • प्रदेश में प्रति 100 रु. पर 2.60 रु., एमपी में यह टैक्स 50 पैसे ही लग रहा

जिले में पहले से ही ऑक्सीजन पर चलने वाली गौण मंडियां अब बंद होने की कगार पर है। इसके पीछे बड़ी वजह यह है राज्य सरकार का भारी टैक्स। सीमावर्ती मध्यप्रदेश में सरकार किसानों से 0.50 पैसे ताे राजस्थान में 2.60 पैसे टैक्स के रूप में किसानों से वसूल कर रही है।

इसको ऐसे समझा जा सकता है कि अगर मध्यप्रदेश में किसान किसी भी मंडी में ₹100 रुपए की फसल बेचता है तो उसे केवल 50 पैसे टैक्स के रूप में चुकाने पड़ते हैं, जबकि अगर राजस्थान की मंडी में फसल बेचता है तो उसे 2.60 पैसे टैक्स के रूप में चुकाने पड़ेंगे। जिसका सीधा असर किसानों की उपज पर पड़ता है। इसलिए किसान स्थानीय गौण मंडियों को छोड़कर मध्य प्रदेश की मंडियों का रुख कर रहे हैं। इसलिए अब कोरोना के समय प्रतापगढ़ में खोली गई। 13 में से मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र की 6 मंडी पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।

गिनती के किसान ही अब यहां पर अपनी फसल बेचने के लिए आते हैं। ऐसे में उन्हें फायदे की जगह नुकसान होता दिखाई दे रहा है। दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर फसल नहीं बिकने के कारण वापस ग्राहकों तक जब यह जींस पहुंचते हैं तो इनके भाव भी बढ़ जाते हैं और आम आदमी को भी इसका नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार ने उनके गृह क्षेत्र के नजदीक मंडी तो खोली लेकिन टैक्स के रूप में 5 गुना ज्यादा वसूली के कारण उन्हें मध्य प्रदेश जाने को मजबूर होना पड़ता है।

इन मंडियों पर छाया संकट : राजस्थान सरकार ओर से कोविड 19 के चलते प्रतापगढ़ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में 13 और प्रतापगढ़ शहरी क्षेत्र के पास दो सहित कुल 15 गौण मंडियां स्वीकृत हुई थी। बाद में दो मंडिया प्रतापगढ़ के क्षेत्र में होने के कारण इन्हें नहीं खोला गया था।

इनमें से अरनोद, चुपना, मोहेडा, दलोट, सालमगढ़, बड़ीसाखथली 6 ऐसी मंडिया है, जो मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों पर स्थित है। इनमें से किसी मंडी की दूरी मध्य प्रदेश की मंडी से 5 किलोमीटर तो किसी की 15 किलोमीटर तक ही है। ऐसे में किसान प्रति ₹100 की उपज बेचने के एवज में 5 गुना ज्यादा टैक्स देने की बजाय मध्य प्रदेश की मन्दसौर, दलौदा, सुखेडा, जावरा, सैलाना आदि मंडियों में जाकर अपनी फसल बेच रहे हैं। इन 6 मंडियों के हालात यह है कि किसी मंडी में प्रतिदिन 2 नग तो किसी में 5 नग से ज्यादा फसल बिकने के लिए नहीं आ रही है।

जानिए इस 5 गुणा मंडी टैक्स से किस तरह किसान और आम आदमी दोनों हैं परेशान
किसान : पहले दूरी की परेशानी फिर भाव का भी संकट : जो गौण मंडिया प्रतापगढ़ में खोली गई। वह किसानों के घरों के नजदीक भी रही है। ऐसे में अब किसान अगर मध्य प्रदेश में फसल बेचने के लिए जाता है तो उसे वहां पर टैक्स भले ही कम लग रहा हो, लेकिन माल को लाने ले जाने में दूरी की परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसके बाद मध्यप्रदेश में लोकल किसानों के माल को व्यापारी जुगलबंदी करके अच्छे दाम पर खरीदते हैं, जबकि बाहरी किसानों को उस तरह के दाम नहीं मिल पाते। मध्य प्रदेश की इन बाहरी मंडियों में किसानों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन ज्यादा टैक्स की इस मजबूरी के कारण किसानों को यहां आना ही पड़ रहा है।

आम आदमी: कृषि प्रधान जिला, लेकिन महंगे भाव में मिलती है उपज : प्रतापगढ़ कृषि प्रधान जिला है। यहां पर सोयाबीन से लेकर मक्की, उड़द, मसूर, गेहूं आदि सभी प्रकार की फसलें स्थानीय स्तर पर पैदा करके बाहरी जिलों में और प्रदेशों में बेची जाती है। लेकिन जब स्थानीय किसान इन फसलों को यहां की लोकल मंडियों में बेचने की बजाय मध्यप्रदेश में जाकर भेजते हैं तो आम आदमी तक जब यह फसल और उपज वापस पहुंचती है तो इनके भाव कई गुना तक बढ़ जाते हैं।

जब लोकल मंडियों में यह फसल पहुंचती ही नहीं है तो आम आदमी यहां से खरीद भी नहीं कर पाते हैं। इसको ऐसे समझा जा सकता है कि जो मसूर की दाल प्रतापगढ़ में मंडी के अंदर ₹60 किलो में मिल जाती है वही दाल जब मध्य प्रदेश से यहां पर बिकने के लिए आती है तो उसके भाव ₹80 किलो तक हो जाते हैं।

किसानों की समस्या का हल किया जाएगा
कोरोना के समय किसानों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने गौण मंडिया खोली थी। अब अगर किसान मध्यप्रदेश में उपज बेच रहे हैं तो वहां जाने का माल बड़ा भी ज्यादा लग रहा है। मंडी टैक्स को लेकर सरकार को अवगत कराएंगे। किसानों की समस्या को हल किया जाएगा।
-रामलाल मीणा, विधायक, प्रतापगढ़।

मंडी टैक्स सरकार का निर्णय है
मंडी टैक्स सरकार का निर्णय है इसमें हमारे स्तर पर कुछ नहीं हो सकता। इसमें बजट के बाद सरकार क्या निर्णय लेती है यह सरकार के ऊपर है।
-जयदेव सिंह देवल, उप रजिस्ट्रार, प्रतापगढ़।

संचालन में कोई समस्या नहीं आए
किसानों एव व्यापारियों की समस्या से कृषिमंत्री व राजस्थान के मुख्यमंत्री को लिखित में अवगत कराया जाएगा। जिससे समस्या का समाधान हो एवं गोण मंडी के संचालन में कोई समस्या नहीं आए।
नन्दलाल रैदास, मंडी व्यवस्थापक एवं सेकेट्री।

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