खाद की किल्लत:यूरिया पहुंचा तो खरीदने के लिए लाइनों में लगे किसान, कुछ ही घंटों में स्टॉक समाप्त

प्रतापगढ़एक महीने पहले
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शहर की नीमच रोड पर मंगलवार को 20 टन यूरिया खाद पहुंचा। सूचना मिलते ही यहां पर बड़ी संख्या में किसान पहुंचने लगे और देखते-देखते लंबी लाइन लग गई। कुछ ही घंटों में पूरा स्टॉक निकल गया और कई किसानों को यहां से खाली हाथ और मायूस ही लौटना पड़ा। इस दौरान यहां पर दो दिव्यांग किसान भी करीब 2 घंटे तक लाइनों में यूरिया खरीदने के लिए इंतजार करते रहे।

परेशान होने के बाद जब उन्होंने संचालक को कहा कि वह काफी परेशान हैं और उन्हें यूरिया दिया जाए तो संचालक ने स्पष्ट किया कि लाइन में ही लगना पड़ेगा और इंतजार करना पड़ेगा। कुछ घंटे बाद जब स्टॉक खत्म हो गया तो किसानों को यहां से खाली हाथ लौटना पड़ा। यहां पर करीब 40 से ज्यादा किसान यूरिया खरीदने के लिए इंतजार करते रह गए।

किसानों का कहना है कि सीमित स्टॉक को देखते हुए प्रत्येक किसान को यूरिया का एक कट्ठा ही देना चाहिए था, जबकि दुकानदार ने किसी को दो तो किसी को ज्यादा कट्टे भी दे दिए। क्योंकि यहां पर निगरानी करने वाला कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था।

एक सप्ताह तक नया स्टाॅक अाने की संभावना नहीं ^यहां पर 20 टन यूरिया का स्टॉक आया था, इसमें 445 कट्टे होते हैं। अब प्रत्येक किसान को दो कट्टे दिए जाते हैं, ऐसे में अगर 200 किसान भी हो जाते हैं तो स्टॉक समाप्त हो जाता है, इसमें क्या किया जा सकता है। फिलहाल अगले 7 से 8 दिन तक नया स्टॉक आने की संभावना नहीं है। -भंवर चौधरी, सेल्समैन, गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स।

जिले में इन दिनों रबी की बुवाई के बाद फसलें बड़ी होने लगी है और अब इन्हें यूरिया सहित अन्य खाद की जरूरत है। ऐसे में किसान खाद को लेकर जगह- जगह तलाश कर रहे हैं, लेकिन समय पर आपूर्ति नहीं होने की वजह से किसान परेशान हैं। पिछले दिनों हुई मावठ के बाद खाद की डिमांड काफी बड़ी है, लेकिन इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने की वजह से फसलों में नुकसान होगा। कुछ ऐसे ही हालात पिछले दिनों अरनोद क्षेत्र में भी देखने को मिले थे।

दुकान के बाहर लाइन में लगने वाले दिव्यांग किसान मानपुरा के राजेंद्र गायरी ने बताया कि अक्सर सभी जगह पर दिव्यांगों के लिए अलग से लाइन की व्यवस्था होती है, लेकिन यूरिया या अन्य खाद खरीदने के दौरान इस तरह की कोई भी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले काफी दिनों से जहां भी यूरिया की सूचना मिलती है तो वहां पहुंच जाते हैं लेकिन नंबर नहीं आता है। दिव्यांग होने की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और संचालक इसके बावजूद ध्यान नहीं देते हैं।

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