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परेशानी:फसली बीमा का नहीं मिला मुआवजा, आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान

प्रतापगढ़2 महीने पहले
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  • 2019 में जिले में 40 हजार किसानों ने फसल बीमा करवाया था, बीमा राशि के लिए किसान कर चुके हैं धरना-प्रदर्शन

धरतीपुत्र को हर साल सरकारी अनदेखी के चलते आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। गत वर्ष का फसली बीमा का मुआवजा जिले के हजारों किसानों को अब तक नहीं मिल पाया है। वहीं इस वर्ष भी खरीफ की फसल में भी खासा खराबा हो चुका है। ऐसे में किसानों का कहना है कि राम रूठने के साथ लगता है अब राज भी रूठ गया है। किसानों की हालत यह हो गई है कि वे साहूकारों के कर्ज तले डूबे हुए हैं। पिछले साल 2019 में जिले में 40 हजार किसानों ने फसल बीमा करवाया था। इनमें से अब तक करीब 37 हजार किसानों को ही बीमा राशि मिल पाई है। इसके अलावा शेष किसानों को तकनीकी खामियों के चलते फसली बीमा नहीं मिल पाया है।

बीमा राशि प्राप्त करने के लिए किसानों ने कई बार धरना-प्रदर्शन भी किए लेकिन अब तक उनकी मांग अधूरी ही है। दूसरी ओर इस वर्ष भी सैकड़ाें किसानों की खरीफ की फसल में खराबा हो चुका है। ऐसे में किसानों पर अब दोहरी मार पड़ गई है। सरकारी कार्य की चाल का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल खरीफ के खराबे का अब तक सर्वे तक नहीं किया गया है। इससे किसानों में रोष व्याप्त है। नौगांव, अरनोद और रायपुर के किसानों को अब तक खरीफ का बीमा नहीं मिल पाया है।
फैक्ट फाइल: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में खरीफ फसल से हुई। इस वर्ष जिले के किसानों के बीच करीब 8 करोड रुपए की राशि का वितरण किया गया। इसके बाद रबी 2018 में 608 किसानों को बीमा मिला था। इसके बाद वर्ष 2019-20 में अतिवृष्टि के कारण किसानों की फसल में काफी खराबा हो गया। इस दौरान 37 हजार 109 किसानों के बीच 91 करोड़ 47 लाख 99 हजार 356 रुपए की राशि वितरित की गई थी। वहीं अब भी करीब ढाई हजार किसानों को फसल बीमा की राशि नहीं मिल पाई है।

अब भी कई किसान गत वर्ष खरीफ के खराबे के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसानों को बीमा राशि के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार और बीमा कंपनी को शेष रहे किसानों को शीघ्र बीमा राशि का भुगतान करना चाहिए।
कर्नल जयराज सिंह, संरक्षक, भारतीय किसान संघ, प्रतापगढ़।

एक लाख 87 हजार हैक्टेयर में हुई खरीफ की बुवाई

गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष खरीफ की बुआई का रकबा बढ़ाया गया। इस वर्ष एक लाख 87 हजार हेक्टर क्षेत्र में बुआई की गई। इसमें मक्का का रकबा 66 हजार हेक्टेयर तथा सोयाबीन का रकबा एक लाख 11 हजार 798 हेक्टर रहा। वहीं इस वर्ष मक्का और सोयाबीन की फसलों में इल्लियों का प्रकोप भी अधिक रहा। ऐसे में किसानों को कीटनाशक छिड़काव में काफी खर्चा करना पड़ा। वहीं जिले में कई स्थानों पर कहीं कम तो कहीं अधिक बारिश के चलते सोयाबीन की फसल में काफी खराबा हुआ। ऐसे में किसान फसल में हुए खराबे का सर्वे और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

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