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कोरोना जांच केंद्र से भास्कर लाइव:जिले के 42 स्वास्थ्य केंद्र में से 21 पर ही सैंपलिंग; इनमें से 10 जगह रोज जांच, बाकी जगह केस मिलने पर घरों से ले रहे नमूने

प्रतापगढ़2 महीने पहले
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  • कई केंद्रों पर मिली अव्यवस्थाएं, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही धज्जियां, कई जगह सेनिटाइजर ही नहीं

कोरोना की दूसरी लहर में बढ़ते हुए मामलों के बीच चिकित्सा विभाग स्टाफ की कमी और व्यवस्थाओं के अभाव से जूझ रहा है। जिला अस्पताल सहित 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में से केवल 21 ही ऐसे हैं जहां पर कोरोना सैंपल लेने का काम किया जा रहा है। इनमें से भी केवल 10 ऐसे हैं जहां पर प्रतिदिन सैंपल लिए जा रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि बाकी जगहों पर कोरोना सैंपल लिए नहीं जा रहे। चिकित्सा विभाग सेंटर पर सैंपल लेने की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में डोर टू डोर जाकर कोरोना के सैंपल एकत्र कर रहा है। एक समस्या यह भी है कि कोरोना जांच रिपोर्ट आने में भी 2 से 3 दिन का वक्त लग रहा है। इसके पीछे वजह यह है कि चिकित्सा विभाग की ओर से प्रतिदिन 1500 सैंपल औसत रूप से लिए जा रहे हैं जबकि जांच केवल 1000 से 1200 तक की ही हो पाती है।

मुख्यालय सहित उपखंड स्तर पर बने अस्पताल में समय की पाबंदी के कारण लोगों की इतनी भीड़ आ रही है कि सोशल डिस्टेंसिंग जैसे गाइडलाइन की धज्जियां उड़ती हुई नजर आ रही है। प्रतापगढ़ जिला चिकित्सालय में सुबह 9:00 बजे से लेकर दोपहर 3:00 बजे तक कोरोना के सैंपल लिए जाते हैं।

पीएमओ डॉ. ओपी दायमा ने बताया कि इस दौरान यहां पर 6 कार्मिकों की ड्यूटी रहती है। सैंपल के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या प्रतिदिन 200 से ज्यादा होती है जबकि सवा सौ से डेढ़ सौ लोगों के सैंपल ही 1 दिन में लिए जा सकते हैं। किसी का नंबर 2 दिन तो किसी का 3 दिन बाद आता है। बैठने की व्यवस्था नहीं होने से बरामदे में बिना सोशल डिस्टेंसिंग की कतारें नजर आती हैं।

धरियावद इन दिनों कोरोना का नया एपि सेंटर बना हुआ है तो यहां पर समस्या भी ज्यादा विकराल है। प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से लेकर दोपहर 3:00 बजे तक कोरोना के सैंपल धरियावद रेफरल हॉस्पिटल पर लिए जाते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हॉस्पिटल में औसत रोजाना 100 मरीज आ रहे हैं। लेकिन इनमें से प्रतिदिन करीब 80 लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं।

लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की पालना, सैनिटाइजर का उपयोग, हाथ धोने की व्यवस्था, मरीजों के बैठने की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं होने से मरीज परेशान हो रहे हैं। यहां तक की पॉजिटिव मरीज दूसरी जांच के लिए जब यहां पहुंचते हैं तो दूसरे लोगों के साथ ही रजिस्ट्रेशन के लिए कतार में खड़े हो जाते हैं। इस कारण कई बार जांच के लिए पहुंचे दूसरे मरीज भी संक्रमित हो जाते हैं।

कोरोना की जांच पहले प्रतिदिन उपखंड के मूंगाणा, पारसोला, देवला, पहाड़ा, नयाबोरिया, मांडवी, मानागांव, केसरियावाद में की जाती थी। लेकिन अब आवश्यक होने पर लक्षण वालों की ही जांच की जा रही है। एक समस्या यह भी है कि कोरोना जांच की रिपोर्ट 3 से 4 दिनों में आ रही है। ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एस के जैन ने बताया कि क्षेत्र में अब तक 1800 लगभग कोरोना की जांच की गई जिसमें 1200 लगभग पॉजिटिव आए हैं। ब्लॉक कार्यालय अधीनस्थ 571 केस एक्टिव चल रहे हैं।

स्टाफ की भी कमी : धरियावद हॉस्पिटल में डॉक्टर के 12 पद हैं, इनमें से केवल 3 ही डॉक्टर हैं। जबकि 2 को प्रतापगढ़ में डेपुटेशन पर लगाया गया है। यहां पर नर्सिंग कर्मियों के 14 पद है इनमें से 12 नर्सिंग कर्मी कार्यरत हैं। लेकिन इनमें से पांच नर्सिंग कर्मी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं और वर्तमान में होम क्वारंटाइन में है। जबकि दो नर्सिंग कर्मी पहाड़ा और देवला में डेपुटेशन पर लगाए गए हैं।

छोटीसादड़ी : केवल सीएचसी पर सैंपलिंग

छोटी सादड़ी ब्लॉक में 5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इसके अलावा नगर में जयचंद मोहिल सीएचसी है। इनमें से किसी भी पीएचसी पर रोज सैंपल नहीं लिए जा रहे। जबकि सीएचसी की ओर से इन दिनों दयानंद वाटिका में कैंप लगाकर सैंपलिंग की जा रही है। सीएमएचओ ललित पाटीदार ने बताया कि मेडिकल टीमें क्षेत्र में जहां भी मरीज मिलने की शिकायत आती है वहां जाकर सैंपल लेती है।

बारावरदा : केंद्र पर 2 दिनों में 1 बार जांच

बारावरदा सीएचसी पर 2 दिन में एक बार औसत 15 से 20 लोगों के सैंपल लिए जाते हैं। जबकि प्रतापगढ़ ब्लाॅक में बारावरदा क्षेत्र संक्रमण के मामले में टॉप-5 में शामिल है। यहां लक्षण दिखने पर घर जाकर सैंपलिंग हो रही है। जबकि नियमित सैंपलिंग की जरूरत है। चिकित्सा विभाग का कहना है कि केवल 4 चिकित्साकर्मियों के भरोसे ही सारी जिम्मेदारियां है, जबकि 10 लोगों की जरूरत है।

बड़ीसाखथली : 1 नर्स पर सैंपलिंग का भार

बड़ीसाखथली क्षेत्र के अंबीरामा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर करीब 15 दिन पहले स्वास्थ्य कर्मी सैंपल लेने के दौरान खुद ही संक्रमित हो गए थे। ऐसे में अब यहां केवल एक नर्सिंगकर्मी के भरोसे ही सैंपल लेने का काम किया जा रहा है। यहां पर भी रोजाना सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। मरीज की ओर से सूचना मिलने पर चिकित्सा टीम उसके घर पर जाकर ही सैंपल एकत्र करती है।

प्रतापगढ़-धरियावद में 7-7, छोटीसादड़ी में सिर्फ 1 सेंटर

कोरोना जिलेभर में बेकाबू होता जा रहा है। इसके लिए जिले में 33 पीएचसी, 8 सीएचसी, एक जिला अस्पताल सहित 42 स्वास्थ्य केंद्र है। इसके अलावा शाखाओं के रूप में 100 उप स्वास्थ्य केंद्र भी है। लेकिन प्रमुख 42 स्वास्थ्य केंद्र पर ही कोरोना की जांच की जाती है। यहां जांच भी प्रतिदिन नहीं की जा रही है।

पर्याप्त किट मौजूद, स्टाफ की कमी : सीएमएचओ

हमारे पास में कोरोना जांच के लिए वर्तमान में किट की पर्याप्त व्यवस्था है। जिले में जांच केंद्रों पर लगभग 50000 किट उपलब्ध है। चिकित्सा विभाग जांच केंद्र पर जांच के साथ गांवों में डोर टू डोर सैंपल ले रहा है। ताकि लोगों के बाहर नहीं आने से संक्रमण के फैलने से बचा जा सके। स्टाफ की कमी है लेकिन फिर भी हम व्यवस्था बनाने में जुटे हैं।- विष्णु दयाल मीणा, सीएमएचओ, प्रतापगढ़।

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